दिल्ली दरबार मे आजकल मध्यप्रदेश पर जमकर विश्लेषण चल रहा है,कारण नगरीय निकाय चुनावों के परिणाम,मध्यप्रदेश में जल्दी बड़ी प्रशासनिक सर्जरी होने वाली है भाजपा में,तमाम मीडिया मैनेजमेंट के बाद भी सच्चाई से मुंह नही मोड़ा जा सकता,जानकारी अनुसार और महत्वपूर्ण सूत्र के अनुसार मध्यप्रदेश को लेकर पूरा खाका तैयार कर लिया गया है और लक्ष्य है विधानसभा चुनाव 2023….
रीवा में आज नगर निगम अध्यक्ष पद का चुनाव था. यहां भी कांग्रेस के एक पार्षद ने क्रॉस वोटिंग कर दर दी. उसके बाद अध्यक्ष का पद बीजेपी के खाते में चला गया. बीजेपी के वेंकटेश पांडे नगर निगम के अध्यक्ष चुने गए. यहां महापौर अजय मिश्रा कांग्रेस के हैं. उन्होंने चुनाव में खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है.
रीवा में आज नगर निगम अध्यक्ष पद की निर्वाचन प्रक्रिया पूरी हुई. महापौर पद पर कांग्रेस की जीत के बाद अब बीजेपी अध्यक्ष पद पर कब्जा करने में कामयाब हुई. वेंकटेश पांडे नगर निगम अध्यक्ष चुने गए. अध्यक्ष पद के लिए हुई वोटिंग में वेंकटेश पांडे को 26 मत मिले. वहीं कांग्रेस प्रत्याशी नजमा बेगम को महापौर के वोट सहित 19 मत प्राप्त हुए. इसके अलावा एक अन्य वोट हुआ है निरस्त हो गया. कांग्रेस के एक प्रत्याशी ने बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की. कांग्रेस महापौर अजय मिश्रा बाबा ने कहा भाजपा ने धन बल का इस्तेमाल किया.
एक वोट निरस्त
नगरीय निकाय चुनाव होने के बाद आज रीवा में नगर निगम अध्यक्ष पद का चुनाव था. भारतीय जनता पार्टी के वेंकटेश पाण्डेय को जीत हासिल हुई है. नगर निगम स्पीकर पद के लिए भारतीय जनता पार्टी ने वेंकटेश पांडे को प्रत्याशी बनाया था. कांग्रेस पार्टी ने नजमा बेगम पर अपना दांव खेला था. निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारतीय जनता पार्टी के वेंकटेश पांडे के पक्ष में 26 वोट पड़े. जबकि कांग्रेस की नजमा बेगम महापौर के वोट सहित 19 मत ही हासिल कर पायीं. एक वोट रिजेक्ट हुआ है.
ये था गुणा-भाग
रीवा नगर निगम के 45 वार्डों में से 18 वार्डो में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने पार्षद का चुनाव जीता था. 16 वार्डों में कांग्रेस का कब्जा हुआ. 11 निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी चुनाव में जीत हासिल की थी. उनमें से सात को भाजपा ने अपनी पार्टी की सदस्यता दिला दी थी. जिससे 45 में से 25 मत भाजपा के तय हो गए थे. इसके अलावा अन्य 20 मत कांग्रेस के पास थे. परंतु वोटिंग प्रक्रिया शुरू होने के बाद एक पार्षद का वोट रिजेक्ट हो गया. कांग्रेस के एक पार्षद ने भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोट कर दिया जिससे भाजपा प्रत्याशी वेंकटेश को 26 वोट मिल गए.
बीजेपी पर खरीद फरोख्त का आरोप
नगर निगम स्पीकर पद पर भाजपा की जीत के बाद कांग्रेस के महापौर अजय मिश्र बाबा ने भाजपा पर खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा सात निर्दलीय पार्षदों को खरीद कर भाजपा ने अपने कब्जे में ले लिया. कांग्रेस के एक अन्य पार्षद का भी वोट तोड़ लिया.
सतना और रीवा में जिला सरकार बनाने के साथ भाजपा ने अपने गढ़ को बचाकर हैट्रिक बनाई है. भाजपा की रणनीति के आगे कांग्रेस चारो खाने चित्त हो गई. रीवा में भले ही कांग्रेस के सदस्य ज्यादा थे, बावजूद इसके भाजपा नेताओं की रणनीति में कांग्रेस उलझ कर रह गई. भाजपा समर्थित चार सदस्य जीते और उसके बाद निर्दलियों को साध कर तीसरी बार भाजपा ने जिला सरकार बना ली. यहां पूर्व मंत्री रीवा विधायक राजेन्द्र शुक्ला की सियासी रणनीति के आगे कांग्रेस टिक नही पाई. जिला पंचायत को लेकर भाजपा एकजुट रही तो वही कांग्रेस तितर-बितर नजर आई.
महापौर चुनाव की जीत की खुमारी कांग्रेस की नही उतरी और भाजपा एक कदम आगे निकल गई. सतना में पहले से ही भाजपा के सदस्यों की संख्या ज्यादा थी, ऐसे में तय था कि जिला सरकार भाजपा की ही बनेगी. आखिरकार भाजपा का कब्जा बरकरार रहा. पार्टी लगातार तीसरी बार अध्यक्ष बनाने में कामयाब रही. यहां कांग्रेस का हांथ एक बार फिर खाली रह गया. ऊर्जाधानी सिंगरौली में इस बार जिला पंचायत में कांग्रेस का पहली बार परचम लहराया. बीजेपी का सूपड़ा साफ हो गया. यहां कांग्रेस को जिला सरकार में पहली बार इंट्री मिली है. जिला बनने के बाद कांग्रेस जिला सरकार नही बना पाई, पहली बार खाता खुला. भाजपा यहां पर गुटबाजी का शिकार हो गई. जिसका फायदा कांग्रेस ने उठाते हुए ऐसी रणनीति बनाई की भाजपा बुरी तरह से फस गई. जनपदों में भी भाजपा साफ हो गई. नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में भाजपा की बुरी हार हुई है.
मंत्री के क्षेत्र में हारी भाजपा
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाजपा नेता अपने समर्थकों को जिताने के लिये हर दांव चले पर कई जगह असफल भी हुए. सतना में जनपद अध्यक्षों के चुनाव में दो भाजपा विधायकों की दमदारी देखने को मिली. मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी अपने समर्थक को अध्यक्ष बनाने में सफल रहे. तो वहीं अमरपाटन और रामपुर बघेलान में रामपुर विधायक विक्रम सिंह का जलवा देखने को मिला पर इसका उलट मंत्री के क्षेत्र में भाजपा हार गई. प्रदेश के पंचायत राज्यमंत्री रामखेलावन पटेल को झटका लगा. उनके गृह क्षेत्र रामनगर में भाजपा हार गई और कांग्रेस जीती. अमरपाटन में जिसका समर्थन किया उसे भी पराजय मिली.
भाजपा के दो विधायक आमने-सामने
अनुशासन और चरित्र का पाठ पढ़ाने वाली भाजपा में अब गुटबाजी खुलकर सामने आ चुकी है. कोई किसी से कम नही होना चाहता. भाजपा नेताओं का अनुशासन उस समय देखने को मिला जब अपने समर्थक को जनपद अध्यक्ष बनवाने के लिये भाजपा के दो विधायक आमने-सामने आ गए. दरअसल सिरमौर जनपद में अध्यक्ष के लिये सेमरिया विधायक के.पी त्रिपाठी अपने समर्थक को जिताना चाहते थे, तो वहीं सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह अपने समर्थक को अध्यक्ष की कुर्सी में बैठाने के लिये तमाम दांव खेले. निर्वाचन के दौरान बाहर परिसर में दोनो विधायकों के समर्थकों के बीच जमकर झूमाझटकी हुई. जो नजारा था वह भाजपा के अनुशासन की बेडिय़ों को तोड़ रहा था और जमकर भाजपा की किरकिरी हुई.
राहुल भैया का विंध्य में चला जादू
नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिस तरह से विंध्य में कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़ी और जीत हासिल की. उससे कहीं न कहीं प्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेता पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया किंग मेकर साबित हुए. रीवा महापौर की जीत, सीधी और सिंगरौली में पंचायत चुनाव में जीत के साथ कांग्रेस को एक करने की जो रणनीति बनाई. उससे विंध्य में एक बार फिर कांग्रेस उभर कर सामने आई. सतना से लेकर सिंगरौली तक राहुल भैया ने सियाशत की रणनीति तय की और उसमें भाजपा उलझ कर रह गई. आगामी विधानसभा को लेकर यह एक बड़ा संदेश है. विंध्य में कांग्रेस की राजनीति राहुल भैया के इर्दगिर्द घूमती है. इस बार उनका समूचे विंध्य में जादू चला.
क्या गिर सकती है जिलाध्यक्षों पर गाज?
नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाजपा प्रदेश संगठन ने हार का मंथन-चिंतन किया. जहां पर भाजपा को सिकस्त मिली उसके पीछे क्या कारण रहें और भाजपा की ऐसी हार क्यूं हुई इस पर तमाम बिन्दुओं को लेकर सत्ता और संगठन के बीच मैराथन बैठक हुई. रीवा, सीधी, सिंगरौली में जिस तरह से भाजपा की हार हुई और जिला संगठन की भूमिका संदिग्ध रही. उसको लेकर अब चर्चा है कि इन जिलों के जिलाध्यक्षों पर गाज गिर सकती है. सतना जिलाध्यक्ष भी राडार में है. मंथन के बाद जो खबर निकल कर आ रही है उसका भरोसा करें तो विंध्य के सभी जिलाध्यक्ष हटाए जा सकते है.






