Thursday, May 7, 2026
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कपिल सिब्बल को फटकार लगाई सुप्रीम कोर्ट ने,हवा में बातें मत करो

 

सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्‍बल को लगाई फटकार, कहा- हवा में बहस मत कीजिए

जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान देश के वरिष्‍ठ वकील और पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्‍बल (Kapil Sibbal) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने उनसे कहा कि ‘मिस्‍टर सिब्‍बल, हवा में तर्क न करें.

नई दिल्‍ली. देशद्रोह कानून आईपीसी की धारा 124 ए पर रोक लगाने संबंधी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान देश के वरिष्‍ठ वकील और पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्‍बल (Kapil Sibbal) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने उनसे कहा कि ‘मिस्‍टर सिब्‍बल, हवा में तर्क न करें. देशद्रोह कानून को एक दिन में खत्‍म नहीं किया जा सकता है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि जब तक केंद्र सरकार कानून की समीक्षा नहीं कर लेती तब तक देशद्रोह कानून की धारा के तहत कोई नया एफआईआर दर्ज न हो. साथ ही इस कानून के तहत लंबित सभी मामलों पर आगे कोई कार्रवाई न हो और इस धारा के तहत जेल में बंद लोग जमानत के लिए कोर्ट की शरण ले सकते हैं. मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी.

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यहां किसी अभियुक्‍त ने याचिका दाखिल नहीं की है, यहां एक जनहित याचिका पर विचार हो रहा है. कोर्ट को तीसरे पक्ष के कहने पर संज्ञेय अपराध वाले कानून पर रोक नहीं लगानी चाहिए, इससे गलत नजीर पेश होगी. उन्‍होंने कहा कि कोई और आदेश देना ठीक नहीं होगा, क्‍योंकि कोर्ट जनहित याचिका की सुनवाई कर रहा है. कोर्ट पहले इस कानून को वैध ठहरा चुका है. इधर, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील कपिल सिब्‍बल ने कहा कि उन्‍हें ये स्‍वीकार नहीं है. इस कानून को रद्द करना चाहिए. जब कोर्ट यह कह चुका है कि यह कानून प्रथम दृष्‍टया गलत है तो फिर इस कानून को रद्द करना होगा. अगर विधायी बदलाव होता है तो भी पुराना कानून तो जाएगा.
इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि केंद्र सरकार का सुझाव है कि इस धारा में मामला वरिष्‍ठ अधिकारी की निगरानी में दर्ज होना चाहिए, इस पर आप क्‍या कहना चाहते ? कपिल सिब्‍बल ने फिर कहा कि उन्‍हें ये स्‍वीकार नहीं है. यह कानून तो रद्द होना चाहिए. इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने फटकार लगाते हुए कहा कि ‘ मिस्‍टर सिब्‍बल आप हवा में कैसे तर्क दे रहे हैं. अभी मामले की मेरिट पर सुनवाई नहीं हो रही है. कानून की समीक्षा तक अंतरिम आदेश पर विचार हो रहा है. इसके बाद सिब्‍बल ने कहा कि अंतरिम तौर कानून पर रोक लगनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट को तुषार मेहता ने बताया कि यह दो पत्रकारों की याचिका है जिसमें कानून रद्द करने की मांग नहीं की गई है.

 

राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. इस फैसले का कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने स्वागत किया. साथ ही इसी बहाने मोदी सरकार को भी निशाने पर लिया. उनके बयान पर केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने पलटवार किया है.

कानून मंत्री ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर कांग्रेस और गांधी परिवार पर निशाना साधा. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि भारतीय इतिहास में इंदिरा गांधी सरकार ने धारा 124ए को सबसे पहले संज्ञेय अपराध बनाया था. साल 1973 में इस नए दंड प्रक्रिया संहिता को बनाया गया जिसे 1974 में लागू किया गया. क्या कांग्रेस ने अपने पिछले कार्यों की जाँच की है?

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने अपने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने की बात आती है, तो श्रीमती इंदिरा गांधी जी स्वर्ण पदक विजेता हैं! आपातकाल के बारे में तो हम सभी जानते हैं लेकिन क्या आप यह भी जानते हैं कि उन्होंने 50 से अधिक बार अनुच्छेद 356 लगाया था! वह हमारे तीसरे स्तंभ न्यायपालिका को कमजोर करने के लिए “प्रतिबद्ध न्यायपालिका” के विचार के साथ आई थी!
किरण रिजिजू यहीं नहीं रुके उन्होंने राहुल गांधी के ट्वीट का भी जवाब दिया. राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा था, ”सच बोलना देशभक्ति है, देशद्रोह नहीं. सच कहना देश प्रेम है, देशद्रोह नहीं. सच सुनना राजधर्म है, सच कुचलना राजहठ है. डरो मत!”
राहुल गांधी के इस ट्वीट पर रिजिजू ने कहा, ”अगर कोई एक पार्टी है जो स्वतंत्रता, लोकतंत्र और संस्थानों के सम्मान की विरोधी है, तो वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस है. यह पार्टी हमेशा भारत को तोड़ने वाली ताकतों के साथ खड़ी रही है और भारत को विभाजित करने का कोई मौका नहीं छोड़ा है.”
कानून मंत्री ने कांग्रेस सरकार कर हमला करते हुए लिखा कि यूपीए सरकार का देशद्रोह के मामले दर्ज करने का सबसे खराब ट्रैक रिकॉर्ड रहा है. उन्होंने यूपीए के कार्यकाल में देशद्रोह को लेकर दर्ज हुए मामलों पर निशाना साधते हुए लिखा कि 2012 में ‘रिकाउंटिंग मिनिस्टर’ पी. चिदंबरम की चौकस निगाहों में हजारों लोगों के खिलाफ देशद्रोह के मामले दर्ज किए गए थे. किरण रिजिजू ने अपने अगले ट्वीट में अन्ना आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि अन्ना आंदोलन और अन्य भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों के दौरान भी, जो यूपीए की लाइन पर नहीं चल रहे थे, उन्हें बदमाशी, उत्पीड़न, धमकी और गिरफ्तारियों के अधीन किया गया था. यह सब कुछ यूपीए की चौकस निगरानी में हुआ था!
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार हमेशा भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करेगी. हमारी सरकार संविधान में निहित मूल्यों की भी रक्षा करेगी. कांग्रेस पार्टी और उसके टुकड़े-टुकड़े गैंग और इसके इको-सिस्टम को दूसरों को उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है

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