Thursday, May 7, 2026
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(LIVE VIDEO) झूठ बोलने का इतिहास रचेगा यह व्यक्ति,बड़े बड़े को किनारे लगा दिया,और चैनलो को गुलाम बना लिया विज्ञापन से

आम आदमी पार्टी के ट्विटर हैंडल से 7 अप्रैल को शेयर किए एक वीडियो में मुख्यमंत्री केजरीवाल एक निजी चैनल के पत्रकार से कह रहे हैं कि केंद्र सरकार के पास जो पैसा है, वह पब्लिक का पैसा है और भगवंत मान उसी पैसे को लेने के लिए गए थे। केजरीवाल का कहना है कि पंजाब के पब्लिक का पैसा केंद्र के पास पड़ा हुआ है।

राजनीति में आने से पहले अरविंद केजरीवाल भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी रहे हैं। उन्हें अच्छी तरह पता होगा कि केंद्र के आय के स्रोत क्या हैं और उसके खर्चे क्या हैं। राज्यों को किस आधार पर राशि का आवंटन होता है। ऐसा नहीं है कि उन्हें वित्त आयोग जैसी संस्थाओं और उसके कामों के बारे में नहीं पता होगा। इसके बावजूद, वह संवैधानिक व्यवस्था को दरकिनार कर माँगी गई राशि को पंजाब का पैसा बता रहे हैं।

कहाँ से आता है केंद्र के पास पैसा

केंद्र के आय में आयकर (Income Tax), कॉरपोरेट टैक्स, उधारी और GST की प्रमुख हिस्सेदारी होती है। केंद्र अपनी आय का 21 प्रतिशत कॉरपोरेट टैक्स, 20 प्रतिशत उधारी, 16 प्रतिशत आयकर और 19 प्रतिशत जीएसटी से प्राप्त करता है। इसके अलावा, केंद्र सरकार को गैर-कर आय से 9 प्रतिशत, कस्टम से 4 प्रतिशत, एक्साइज ड्यूटी से 8 प्रतिशत और गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों से 3 प्रतिशत की आय होती है।
जहाँ तक खर्च की बात है तो केंद्र सरकार पर केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन-भत्ते, रक्षा, आधारभूत संरचना पर खर्च करना पड़ता है। केंद्र अपनी आय का सबसे अधिक हिस्सा 23 प्रतिशत राज्यों को देता है। 18 प्रतिशत कर्ज का ब्याज चुकाने और 13 प्रतिशत केंद्रीय योजनाओं तथा 9 प्रतिशत उज्ज्वला, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर खर्च करता है। वहीं, सब्सिडी पर 8 प्रतिशत, रक्षा पर 9 प्रतिशत और पेंशन पर 5 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार खर्च करती है।

राज्यों में पैसे का बँटवारा

जीएसटी प्रणाली के तहत राज्य SGST लेते हैं, जबकि केंद्र CGST लेता है। दोनों ही कर योग्य वस्तु पर लागू जीएसटी का 50% है। इसका मतलब है कि राज्य पहले से ही ज्यादातर वस्तुओं और सेवाओं पर 50% टैक्स खुद ही वसूल कर लेते हैं। इसके अलावा, आयकर और कॉर्पोरेट टैक्स जैसे अन्य करों के साथ केंद्रीय जीएसटी का एक हिस्सा राज्यों को भी दिया जाता है। ऐसे में राज्यों को राजस्व में अपना हिस्सा माँगने के लिए केंद्र के पास जाने की जरूरत नहीं है। वह पहले से ही वित्त आयोग की सिफारिश के आधार पर केंद्र द्वारा आवंटित किया जाता है। केंद्रीय बजट 2022-23 में पंजाब को केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए विभिन्न करों से ₹14,756.86 करोड़ आवंटित किए जा चुके हैं।

जब केंद्र सरकार अपनी आय का 23 प्रतिशत हिस्सा राज्यों के साथ साझा कर देती है, ऐसे में अपनी लोक-लुभावनों वादों को पूरा करने के लिए केंद्र को दोषी ठहराना सीएम अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान का राजनैतिक स्टंट से अधिक कुछ नहीं है। अरविंद केजरीवाल ने इस कदम से यह भी साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार को कम करके अपनी लोक-लुभावन योजनाओं के खर्चों का पोषण उनका महज खोखला दावा था। पहले से ही खस्ताहाल राज्य में अगर मुफ्त वाली घोषणाएँ लागू कर दी जाती हैं तो यह राज्य के लिए आत्मघाती साबित होगा।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पंजाब के हिस्से की पूरी राशि माँग करके संघीय व्यवस्था को चुनौती देने का काम कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने हाल ही में भारत के विचार को चुनौती देते हुए कहा था कि भारत कोई राष्ट्र नहीं, बल्कि ‘राज्यों का संघ’ मात्र है। इस तरह की मानसिकता राज्य को स्वतंत्र इकाई के रूप में पेश कर देश को विभाजित करने का खेल खेलने जैसा है। पंजाब वैसे भी अलगाववाद जैसे खतरों से जूझ रहा है। ऐसे में इस तरह की अव्यवस्था केंद्र और राज्यों के बीच की दूरी को बढ़ाने का काम करेगा।

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