सोचिये कितना गन्दा खून होगा उस नमकहराम का जो रोटी हिन्दू पण्डितो की खाता था,स्कूल की फीस हिन्दू पंडित देते थे,पहनने के कपड़े भी वहीं देते थे और उन्ही की हत्या की इस नमकहराम ने,सरकार कितनी दोगली और नपुंसक थी कि बीबीसी संवाददाता को लाइव इंटरव्यू में कबूली 20 से ज्यादा हत्या पर कुछ नही हुआ था….
घाटी में 1990 कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandit Murders) की हत्या करने वाले फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे के जुर्म की फाइल फिर से खुलने जा रही है। अब सतीश टिक्कू के परिवार ने कोर्ट में अर्जी दायर की है। अदालत इस पर सुनवाई भी करने को तैयार भी हो गया है। श्रीनगर सेशन कोर्ट में सतीश टिक्कू हत्याकांड में आज पहली शारीरिक सुनवाई। अदालत ने मामले को सकारात्मक रूप से सुना और जम्मू-कश्मीर सरकार को पिछले 31 वर्षों में किए गए कार्यों के लिए फटकार लगाई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आरोपी बिट्टा कराटे के खिलाफ अब तक कोई चार्जशीट क्यों दायर नहीं की गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पीड़ित सतीश टिक्कू के परिवार से याचिका की हार्ड कॉपी कोर्ट में जमा करने को कहा है। यह सुनवाई परिवार के लिए एक आशा की किरण की तरह है। मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी। अधिवक्ता उत्सव बैंस ने श्रीनगर में News24 को बताया, जिन्होंने सतीश टिक्कू परिवार की ओर से याचिका दायर की थी।
आपको बता दें कि आतंकी बिट्टा कराटे ने एक चर्चित इंटरव्यू में कहा था कि उसने 20 से ज्यादा कश्मीरी पंडितों को मौत के घाट उतार दिया था। आतंकी बिट्टा कराटे ने सबसे पहले उसने सतीश टिक्कू को जान से मारा था। सतीश टिक्कू उसका दोस्त था लेकिन पाकिस्तान परस्त लोगों के संपर्क रहने के बाद उसने यहां तक कह दिया था कि कश्मीर की आजादी के लिए तो वो अपनी मां और भाई का गला भी काट देता।
साल 1991 में दिए इंटरव्यू में बिट्टा ये भी बताता है कि कैसे उसने 22 वर्षीय कश्मीरी पंडित सतीश कुमार टिक्कू की हत्या से घाटी में कत्लेआम का सिलिसला शुरू किया था। बिट्टा को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत भी गिरफ्तार किया गया था। बिट्टा पर 19 से अधिक उग्रवाद से संबंधित मामले थे।
2008 में अमरनाथ विवाद के दौरान भी उसे गिरफ्तार किया गया था। बिट्टा मार्शल आर्ट में ट्रेंड था, इसलिए उसके नाम के आखिर में लोग कराटे लगाने लगे। बिट्टा कराटे ने करीब 16 साल सलाखों के पीछे बिताए। आखिर में 23 अक्टूबर, 2006 को टाडा अदालत ने उसे जमानत पर रिहा कर दिया।
कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandits) की नृशंस हत्या करने वाले इस्लामिक आतंकवादी फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे (Farooq Ahmed Dar alias Bitta Karate) पर 31 साल बाद केस चलने जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिजनेसमैन सतीश टिकू के परिवार ने श्रीनगर सेशंस कोर्ट में एक याचिका दायर कर आतंकी फारूक अहमद डार के खिलाफ फिर से सुनवाई करने की माँग की है।
टिकू के परिवार की ओर से वरिष्ठ वकील उत्सव बैंस ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा। वहीं, कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सतीश टिकू के परिवार से याचिका की हार्ड कॉपी पेश करने को कहा है। अब इस मामले में 16 अप्रैल को फिर सुनवाई होगी।
साल 1990 में कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार करने वालों में शामिल बिट्टा कराटे ने एक लाइव टीवी इंटरव्यू में कबूल किया था कि उसने ही सतीश कुमार टिकू को मारा था। साथ ही आतंकी कराटे ने दावा किया था कि उसे टिकू को मारने के लिए ऊपर से आदेश मिला था।
बताया जाता है कि फारूक अहमद डार ने इंटरव्यू में निर्दोष लोगों को खत्म का आदेश देने वाले जिस अज्ञात शख्स का नाम लिया था, वह जेकेएलएफ (JKLF) का शीर्ष कमांडर अशफाक मजीद वानी था। उसने ही घाटी में रहने वाले निर्दोष कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार करने का आदेश दिया था। वानी वह शख्स था, जो बिट्टा कराटे और अन्य को आतंकियों को प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान ले गया था।
पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का नेतृत्व करने वाले बिट्टा ने 42 लोगों को बड़ी ही बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। उसने अपना जुर्म कबूलते हुए कहा था कि 1990 में कम से कम 20 या ‘शायद 30-से 40 कश्मीरी पंडितों की हत्या’ की थी। उसने यह भी बताया था कि सतीश टिकू उसका करीबी दोस्त था।
आतंकी ने कहा था, “मैंने हिंदुओं को मारने के लिए 20 से 30 गज की दूरी से पिस्तौल का इस्तेमाल किया था। कभी-कभी, मैंने सुरक्षाकर्मियों पर गोली चलाने के लिए एके-47 राइफल का भी इस्तेमाल किया।” कराटे का कहना था कि वह इसलिए आतंकवादी बना, क्योंकि उसे स्थानीय प्रशासन द्वारा परेशान किया गया था।
पाकिस्तान के निर्देश पर निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की बेरहमी से हत्या करने वाले बिट्टा की पहली बार गिरफ्तारी 1990 में हुई थी। उस पर कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का आरोप लगाया गया था, लेकिन सबूतों के अभाव में उसे 17 साल बाद रिहा कर दिया गया था। इसके बाद अमरनाथ भूमि विवाद उपद्रव मामले में उसे 2008 में गिरफ्तार किया गया, लेकिन इसके आठ महीने बाद उसकी रिहाई हो गई। साल 2019 में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने उसे आतंकी फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया।
बता दें कि विवेक अग्रिहोत्री के निर्देशन में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को काफी पसंद किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस फिल्म की सराहना की है





