मोदी की नीति कामयाब
‘अगर ईरानी जहाज दिखे तो उड़ा देंगे’: ट्रंप ने होर्मुज रास्ते पर 15+ युद्धपोत किए तैनात, नाकाबंदी के बीच तेहरान ने कहा- भारतीय जहाजों को नहीं कोई होगी दिक्कत

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसा खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका ने ईरान के समुद्री रास्तों की पूरी तरह नाकाबंद कर दी है। ट्रंप ने साफ कह दिया है कि अगर ईरान की कोई भी नाव हमारे घेरे के पास आई, तो उसे तुरंत तबाह कर दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच बातचीत फेल होने के बाद कच्चे तेल की कीमत ₹8,500 (100 डॉलर) प्रति बैरल के ऊपर पहुँच गई है और शेयर बाजार धड़ाम हो गया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव के बीच ईरान ने भारत के साथ अपनी गहरी दोस्ती निभाते हुए बड़ी राहत दी है। ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने साफ किया है कि भारतीय जहाजों से कोई टोल टैक्स नहीं वसूला जा रहा है और भविष्य में भी उन्हें इस रास्ते से सुरक्षित निकलने दिया जाएगा।
ट्रंप की सख्त चेतावनी और समुद्र में हलचल
अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अपने 15 से ज्यादा युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साफ कहा कि ईरानी जहाजों को उसी तरह खत्म किया जाएगा जैसे समुद्र में ड्रग डीलरों को खत्म किया जाता है।
अमेरिका का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना है ताकि वह बातचीत की मेज पर आए। इस नाकाबंदी के शुरू होते ही समुद्र में असर दिखने लगा है। ‘रिच स्टारी’ और ‘ओस्ट्रिया’ जैसे बड़े तेल टैंकरों ने अपना रास्ता बदल लिया है और वे वापस लौट रहे हैं।
ईरान का पलटवार: ‘हम झुकेंगे नहीं’
ईरान ने भी पीछे हटने से इनकार कर दिया है। ईरान की संसद के स्पीकर ने चेतावनी दी है कि इस नाकाबंदी की वजह से दुनिया को जल्द ही $4-$5 के पेट्रोल वाले पुराने दिन याद आएँगे, यानी कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ सकती हैं।
ईरान के दूत मोहम्मद फथाली ने कहा कि वे शांति के लिए तैयार हैं लेकिन युद्ध के लिए भी पूरी तरह मुस्तैद हैं। ईरानी सेना (IRGC) ने धमकी दी है कि उनके पास ऐसे आधुनिक हथियार और तरीके हैं जिनका अमेरिका को अंदाजा भी नहीं है।
शांति वार्ता क्यों हुई फेल?
पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच करीब 21 घंटे तक लंबी चर्चा चली, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु काम (यूरेनियम बनाना) पूरी तरह बंद कर दे, पर ईरान इसके लिए तैयार नहीं है। हालाँकि, पाकिस्तान और अमेरिका के बड़े अफसरों का कहना है कि बातचीत अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और जल्द ही दोनों देश दोबारा मिल सकते हैं।






