Wednesday, April 29, 2026
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8 सितंबर: राहुल,प्रियंका क्यों नही जाते अपने दादा की कब्र पर,फ़िरोज़ गांधी की आशिकमिजाजी और रंग बिरंगी तबियत,रँगे हाथ पकड़ाया था दो महिलाओं के साथ बिस्तर में

भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति और कांग्रेस पार्टी के नायक स्व. फिरोज गांधी की बुधवार को 61वीं पुण्यतिथि थी। कांग्रेस पार्टी में फिरोज गांधी का जितना बड़ा कद था। आज उनके दुनिया से जाने के बाद उनकी समाधि पर अपने परिवार का कोई दो फूल भी चढ़ने वाला नहीं आता। हर साल की तरह इस साल भी 61वीं पुण्यतिथि प्रयागराज में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मिलकर उनकी समाधि पर फूल अर्पण कर उनको याद किया। तकरीबन 12 साल से फिरोज गांधी की समाधि स्थल पर न प्रियंका गांधी आईं न ही राहुल आए और न ही सोनिया गांधी आई हैं। इसका मलाल पुण्यतिथि पर कांग्रेसियों को आज भी है।

रायबरेली से सांसद रह चुके हैं फिरोज गांधी

फिरोज गांधी रायबरेली से सांसद भी रहे और कांग्रेस पार्टी को आगे लाने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है, लेकिन फिरोज गांधी के मरहूम होने के बाद आज उनकी समाधि दो फूल अपनों से पाने के लिए तरस रही है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व महासचिव इरशाद उल्लाह बताते हैं कि तकरीबन साल 2007 और उसके बाद 2009 में राहुल और सोनिया गांधी समाधि पर आए थे, लेकिन कई दशक बीत जाने के बाद भी अब फिरोज गांधी के समाधि स्थल पर उनके परिवार के कोई लोग नहीं आए। कांग्रेस पार्टी किशोर वार्ष्णेय बहुत दुखी हैं। उनका कहना है कि हम लोग मिलकर कई साल से फिरोज गांधी की पुण्यतिथि मना रहे हैं, लेकिन कार्यक्रम तो दूर समाधि की साफ-सफाई पर कोई ध्यान नहीं देता है। प्रयागराज के ममफोर्ड गंज में एक कब्रिस्तान है। जहां पर फिरोज गांधी की समाधि है। तकरीबन कई साल पहले जब कांग्रेस फुल फ्लैश में हुआ करती थी तो कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और प्रयागराज जिले के बड़े नेताओं का जमावड़ा होता था और बहुत अच्छे तरीके से पुण्यतिथि मनाई जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे समय बीतता गया और पुण्यतिथि पर उसी तरह लोगों के आने का सिलसिला भी कम होता गया है। इस मामले में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता बाबा अवस्थी कहते हैं कि यह बहुत दुख की बात है, जिस आदमी ने कांग्रेस पार्टी को ऊंचाइयों पर ले गया। आज उनकी समाधि पर कुछ ही कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता आते हैं।

फिरोज गांधी के अफेयर के इतने किस्से अलग-अलग लोगों ने उछाले हैं कि ये बस फीरोज गांधी को पता था और या फिर उस लेडी को जिसका नाम उनके साथ जुड़ता था कि सच्चाई क्या है. एम ओ मथाई अपनी बुक में लिखते हैं कि इंदिरा गांधी अपनी साड़ियों को जब किसी और महिला को पहने देखती थीं, तो वो सुलग जाती थीं. मथाई ने ही लिखा है कि एक बार तो फिरोज इंदिरा की बुआ विजय लक्ष्मी पंडित की लड़की के ही काफी करीब आ गए थे. दरअसल उन दिनों इंदिरा तो पिता नेहरू के साथ दिल्ली में रहती थीं और फिरोज बतौर मैनेजिंग डायरेक्टर परिवार का अखबार नेशनल हेराल्ड लखनऊ में संभालते थे. उसी ऑफिस में विजय लक्ष्मी की पंडित की बेटी भी बतौर जर्नलिस्ट काम करती थीं, रिश्ते में फिरोज की साली थीं, बीवी से दूर साली के करीब थे फिरोज तो अफेयर की अफवाहें लखनऊ की फिजाओं से उड़ती हुई पहले दिल्ली और फिर मास्को में विजय लक्ष्मी पंडित तक जा पहुंची.

ये खबरें सुनकर वो पहली फ्लाइट से ही भारत आईं और बेटी को अपने साथ मास्को ही ले जाकर मानीं. ‘रेमनिसन्सिज़ ऑफ द नेहरू एज’ किताब के मुताबिक कमला की फिरोज ने इतनी सेवा की फिर भी वो कतई नहीं चाहती थीं कि फिरोज से इंदिरा की शादी हो. तो कैथरीन फ्रैंक ने अपनी किताब ‘द लाइफ ऑफ इंदिरा गांधी’ में लिखा है कि कैसे ऑल इंडिया रेडियो में काम करने वाली एक नेपाली तलाकशुदा महिला से फिरोज के रिश्ते थे. साथ में तारकेश्वरी सिन्हा, सुभद्रा जोशी, महमूना सुल्तान कई लोगों से उन्होंने फिरोज के रिश्ते बताए हैं. फिरोज का अंतिम संस्कार तीन मूर्ति भवन से ही हुआ. इस दिन का एक अनोखा किस्सा इंदिरा गांधी की एक बायोग्राफर कैथरीन फ्रैंक ने लिखा है कि फिरोज की लाश पर फिरोज की कई गर्लफ्रेंड्स को रोते देख इंदिरा एकदम खामोश हो गईं, ये अजीब स्थिति थी. ये वजह थी या कोई और लेकिन उसके बाद इंदिरा के घर की दीवारों पर कभी भी फिरोज की कोई तस्वीर नहीं दिखी. तो सच क्या है और झूठ क्या, ये जिनको पता था, वो राज अपने सीने में दफन किए दुनियां से चले गए. लेकिन ये झूठी-सच्ची कहानियां हमेशा जिंदा रहेंगी.

फिरोज शादी से पहले अपने एक वामपंथी दोस्त से इंदिरा को मिलाने ले गए तो उसने फीरोज से एक ऐसा सवाल कि वो शर्मिंदा ही हो गए, और इंदिरा भौचक, कौन था वो दोस्त और क्या सवाल था उसका? जानने कि लिए देखिए ये वीडियो

फिरोज गांधी की 61वीं पुण्यतिथि पर इस बार भी कोई अपना नहीं पहुंचा, कुछ कांग्रेसी ही पहुंचे

(समस्त जानकारी नेट पर उपलब्ध है,)

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