उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी कार रखने से पहले सचिन वाजे महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख से मिला था। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिह ने इस मामले में रिपोर्ट बदलने के लिए 5 लाख रुपए दिए थे। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया है।
एजेंसी ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल किया है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि मुंबई पुलिस के बर्खास्त सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाजे ने क्यों और कैसे पूरी प्लानिंग रची। किस तरह से मनुसख हिरेन की हत्या की गई और इसमें अन्य कौन-कौन लोग उसके साथ थे। 2021 की 25 फरवरी एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी कार मिली थी और 5 मार्च को हिरेन का शव मुंब्रा की खाड़ी से बरामद किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, NIA ने अपनी चार्जशीट में खुलासा किया है कि घटना वाले दिन सचिन वाजे क्राइम इंटेलीजेंस यूनिट के अधिकारियों को अपने साथ शाम के करीब 7 बजे मालाबार हिल स्थित अनिल देशमुख के आवास पर ले गया था। वहाँ पहुँचने के बाद वाजे ने बाकी पुलिसवालों को लॉबी में इंतजार करने के लिए कहा और खुद अंदर चला गया। करीब 50 मिनट बाद वह बाहर निकला और कहा कि सीक्रेट ऑपरेशन जल्द ही शुरू होगा। साथ आए स्टाफ को सीआईयू मुख्यालय जाने का आदेश दिया।
अनिल देशमुख के सेक्रेटरी संजीव पलांडे ने सीबीआई को बताया था कि सचिन वाजे ने NCP नेता से मुलाकात की थी। इसके अलावा कुछ मौकों पर मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह भी देशमुख के घर पर केस की प्रोग्रेस के बारे में बात करने के लिए जाते थे।

मुंबई पुलिस के बर्खास्त सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाजे (Sachin Waze) ने व्यवसायी मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के परिवार को आतंकी धमकी देने के लिए न केवल उनके आवास के बाहर 24 फरवरी, 2021 को 20 जिलेटिन स्टिक (विस्फोटक) और धमकी भरे नोट के साथ महिंद्रा स्कॉर्पियो वाहन पार्क किया, बल्कि इसी कड़ी में उन्हें डराने के लिए व्यवसायी मनसुख हिरन की हत्या करवा दी. इन वारदातों को अंजाम देने में उसने मुंबई पुलिस के कम से कम अपने पांच सहयोगियों और भाड़े के दो हत्यारों को भी शामिल कर लिया था.
वाजे ने मुकेश अंबानी से अपनी इस जबरदस्ती वसूली की योजना को अंजाम देने के लिए उन्हीं पैसों का इस्तेमाल किया, जिन्हें उसने जबरन वसूली से हासिल किया था. और इस साजिश में एक कमजोर कड़ी मनसुख हिरन की हत्या करवा दी. यह आरोप आईएनए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने वाजे के खिलाफ दायर चार्जशीट में लगाया है.
एनआईए का आरोप है कि वाजे ने 24 फरवरी, 2021 को 20 जिलेटिन स्टिक (विस्फोटक) और धमकी भरे नोट के साथ मुकेश अंबानी के आवास के पास महिंद्रा स्कॉर्पियो वाहन पार्क किया और बाद में व्यवसायी मनसुख हिरन की हत्या का आदेश दिया. चार्जशीट में कहा गया है कि मुकेश अंबानी परिवार को डराने और आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने के लिए ऐसा किया गया.
एनआईए का आरोप है कि वाजे ने हिरन को विस्फोटक लगाने की जिम्मेदारी लेने के लिए मजबूर किया. जब उसने मना कर दिया, तो वाजे और अन्य ने मुंबई पुलिस कमिश्नरेट कंपाउंड में बैठे हिरन को मारने की योजना बनाई.
प्रदीप शर्मा के अगुवाई में किराए के हत्यारों ने हिरन को लालच देकर मार डाला. एजेंसी ने कहा कि उसका शव 5 मार्च को मुंबई के बाहर ठाणे की खाड़ी से बरामद किया गया था.
एनआईए ने कहा कि जबरन वसूली के माध्यम से, वह भारी मात्रा में धन एकत्र कर रहा था, जिसका एक हिस्सा तत्काल अपराध करने के लिए इस्तेमाल किया गया. जैसा कि कारमाइकल रोड पर खुद आरोपी सचिन वाजे (ए 1) द्वारा लगाए गए वाहन में विस्फोटकों के साथ रखे गए धमकी नोट से स्पष्ट है.
वाजे का इरादा…
एजेंसी ने आगे बताया है कि आरोपी वाजे का इरादा स्पष्ट रूप से धनी और समृद्ध व्यक्तियों को आतंकित करने और उन्हें गंभीर परिणामों के डर से पैसे निकालने का था. टेलीग्राम चैनल जैश उल हिंद पर पोस्ट आतंक के उपरोक्त कृत्य में विश्वसनीयता जोड़ने का एक जानबूझकर प्रयास प्रतीत होता है और मनसुख हिरन की हत्या आतंक के उक्त कृत्य का प्रत्यक्ष परिणाम है.
एजेंसी का दावा है कि वाजे के कथित अपराध के पीछे का मकसद 16 साल बाद, 2020 में मुंबई पुलिस बल में उनकी बहाली के बाद खोई हुई प्रतिष्ठा को फिर से हासिल करना और खुद को “सुपर कॉप” के रूप में स्थापित करना भी था.
एनआईए ने आरोप लगाया कि वाजे ने हिरन से स्कॉर्पियो वाहन की चोरी के संबंध में एक गुमशुदगी दर्ज करने के लिए कहा, ताकि वह इसे अपराध में इस्तेमाल कर सके. मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी की सुरक्षा के लिए काफिले द्वारा इस्तेमाल किए गए पंजीकरण नंबर के साथ नकली नंबर प्लेट, स्कॉर्पियो पर चिपका दी गई थी.
मुकेश अंबानी के आवास के पास कार रखने के बाद, उन्होंने अंततः मामले को क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट, मुंबई पुलिस को स्थानांतरित कर दिया, जिसका नेतृत्व वाजे ने ही किया. इसके बाद आपत्तिजनक सीसीटीवी फुटेज आदि को नष्ट कर दिया गया.
NIA द्वारा दायर 10,000 पन्नों की चार्जशीट से पता चलता है कि पूर्व पुलिस प्रमुख परमबीर सिंह ने इस मामले में आतंकी समूह जैश-उल-हिंद की संलिप्तता का हवाला देकर जाँच को गुमराह किया था। एक साइबर एक्सपर्ट के बयान के मुताबिक सिंह ने रिपोर्ट में आतंकी संगठन की भूमिका का जिक्र करने के लिए 5 लाख रुपए दिए थे।
साइबर एक्सपर्ट ने 5 अगस्त को एनआईए के समक्ष परमबीर सिंह के कहने पर रिपोर्ट में बदलाव की बात कबूली थी। उसने बताया, “सीपी मुंबई के आग्रह पर मैंने सीपी मुंबई के कार्यालय में बैठकर अपने लैपटॉप पर एक रिपोर्ट तैयार की, जो एक पैराग्राफ में थी और मैंने इसे सीपी मुंबई को दिखाया। रिपोर्ट पढ़ने के बाद परमबीर सिंह सर ने मुझसे एंटीलिया मामले में जिम्मेदारी लेते हुए टेलीग्राम चैनल पर ‘जैश-उल-हिंद’ के पोस्टर डालने के लिए कहा।”
चार्जशीट के मुताबिक 16 साल बाद वाजे की मुंबई पुलिस में दोबारा बहाली हुई तो उसने ‘सुपर कॉप’ के तौर पर अपनी पुरानी प्रतिष्ठा हासिल करने के लिए पूरी साजिश रची। इसके लिए उसने उगाही से इकट्ठा रकम का इस्तेमाल किया। जब उसे एहसास हुआ कि हिरेन की वजह से उसकी पूरी साजिश सामने आ सकती है तो उसकी हत्या करवा दी। एनआईए ने चार्जशीट में 20 संरक्षित गवाहों सहित 178 गवाहों के बयानों का हवाला दिया है।
चार्जशीट के अनुसार वाजे को जब लगा कि हिरेन से पूछताछ में उसका सच सामने आ सकता है तो उसने प्रदीप कर उसे पैसे दिए। शर्मा ने यह पैसा संतोष आत्माराम शेलार को दिया। शेलार को हिरेन की हत्या की जिम्मेदारी दी गई थी। चार्जशीट में जो लोग आरोपी बनाए गए हैं उनमें वाजे के अलावा एनकाउंटर स्पेशलिस्ट रहे प्रदीप शर्मा का भी नाम है। शर्मा मुंबई पुलिस का चर्चित अफसर रहा है। वाजे उसे अपना ‘गुरु’ मानता है। अपने 36 साल के करियर में शर्मा ने करीब 312 एनकाउंटर किए। उसने शिवसेना के टिकट पर पिछला विधानसभा चुनाव पालघर की नालासोपारा सीट से लड़ा था। अन्य आरोपितों में नरेश रमणीकलाल गोर, विनायक बालासाहेब शिंदे, रियाज़ुद्दीन हिसामुद्दीन काज़ी, सुनील धर्म माने, आनंद पांडुरंग जाधव, सतीश तिरुपति मोथकुरी और मनीष वसंतभाई सोनी शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार हिरेन की हत्या महज 11 मिनट के भीतर अंजाम दी गई थी। सुनील माने ने 4 मार्च को क्राइम ब्रॉन्च इंस्पेक्टर तावड़े बनकर हिरेन को कॉल किया और ठाणे के घोड़बंदर रोड स्थित सूरज वॉटर पार्क के पास मिलने के लिए बुलाया। यहाँ से माने उसे सफेद रंग की कार में लेकर सुरेखा होटल पहुँचा। फिर उसे लाल रंग की टवेरा में बिठाकर उसका मोबाइल फोन ले लिया गया। टवेरा कार में हिरेन को ड्राइवर के पीछे वाली सीट पर योजना के तहत बीच में बैठाया गया। हिरेन के बैठते ही उसके एक तरफ संतोष शेलार और दूसरी ओर आनंद जाधव बैठ गया। इस सीट के पीछे पहले से ही सतीश बैठा हुआ था।
सतीश ने पीछे से हिरेन का सिर पूरी ताकत से जकड़ लिया और रूमाल से उसका मुँह और नाक दबा दिया। जब हिरेन ने बचाव में विरोध शुरू किया तो शेलार और जाधव ने उसके हाथ पकड़ लिए। हत्या के बाद उसका शव खाड़ी में फेंक दिया।
यह बात भी सामने आई है कि वाजे ने 2 मार्च को हिरेन को पुलिस हेडक्वार्टर में बुलाया था। तब प्रदीप शर्मा और संदीप माने भी मौजूद थे। ऐसा इसलिए किया गया ताकि शर्मा और माने भी हिरेन को पहचान लें। जिस दिन हिरेन की हत्या की गई उस दिन वाजे ने एक बार पर छापा मारा ताकि किसी को उस पर शक न हो। एंटीलिया के बाहर गाड़ी पार्क करने के बाद उसने अपने कपड़े जला दिए थे। अपना मोबाइल फोन भी नष्ट कर दिया था।
गौरतलब है कि इस मामले ने पूरी मुंबई पुलिस को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। पुलिस कमिश्नर पद से हटाए जाने के बाद परमबीर सिंह ने दावा किया था कि अनिल देशमुख ने गृह मंत्री रहते वाजे को वसूली का टारगेट दे रखा था। इसके बाद देशमुख को भी पद से इस्तीफा देना पड़ा था।





