1947 में देश का विभाजन हुआ। खान अब्दुल गफ्फार खान इसके सख्त खिलाफ थे। विभाजन के बाद वे पाकिस्तान के हिस्से में रह गए। लेकिन दुख की बात देखिए, जिस इंसान ने पूरी जवानी अंग्रेजों की जेलों में काट दी, आजादी के बाद पाकिस्तान की सरकार ने उन्हें ‘भारत का एजेंट’ और ‘गद्दार’ घोषित कर दिया!
उन्हें अपनी ही जमीन पर करीब 30 साल तक जेल और नजरबंदी में गुजारने पड़े। वे इस कदर टूट चुके थे कि उन्होंने एक वसीयत लिखी
”जब मैं मरूं, तो मुझे पाकिस्तान की इस तानाशाही हुकूमत की सरजमीं पर दफन न किया जाए। मुझे अफगानिस्तान के जलालाबाद में सुपुर्द-ए-खाक करना।”
1988 का वो ऐतिहासिक दिन जब मौत ने युद्ध को झुका दिया!
साल 1988 में इस महान आत्मा ने हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं। उनकी आखिरी इच्छा के मुताबिक, उनके पार्थिव शरीर को पाकिस्तान से अफगानिस्तान के जलालाबाद ले जाना था।
लेकिन उस समय एक बहुत बड़ा संकट था। अफगानिस्तान में उस वक्त भयानक और खूनी गृहयुद्ध (Civil War) चल रहा था। चारों तरफ बमबारी हो रही थी, टैंक चल रहे थे और दो विरोधी सेनाएं एक-दूसरे के खून की प्यासी थीं। ऐसे माहौल में वहां से जनाजा ले जाना साक्षात मौत के मुंह में जाने जैसा था।
लेकिन फिर इतिहास ने वो चमत्कार देखा जो न कभी पहले हुआ था और न शायद कभी बाद में होगा!
जैसे ही दोनों विरोधी सेनाओं को पता चला कि ‘सीमांत गांधी’ बादशाह खान का जनाजा सरहद पार कर रहा है, वैसे ही दोनों तरफ के कमांडरों ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया। उन्होंने एलान किया:
”जब तक इस महान इंसान का जनाजा गुजर नहीं जाता और इन्हें सुपुर्द-ए-खाक नहीं कर दिया जाता, तब तक कोई भी सैनिक गोली नहीं चलाएगा।”
इतिहास में इसे ‘एक दिन का ऐतिहासिक युद्धविराम’ (24-Hour Ceasefire) कहा जाता है। जो काम दुनिया की बड़ी से बड़ी अदालतें या बातचीत नहीं करवा सकीं, वो बादशाह खान के प्रति सम्मान ने कर दिखाया। गोलियों की आवाज थम गई, तोपों के मुंह बंद हो गए और दोनों तरफ के लड़ाके, जो एक-दूसरे को मार रहे थे, सिर झुकाकर उस जनाजे के साथ रोते हुए चल पड़े।
नॉलेज अड्डा की तरफ से:
दोस्तों, खान अब्दुल गफ्फार खान का जीवन हमें सिखाता है कि जब हम अपने सिद्धांतों, अपनी सादगी और अहिंसा पर अडिग रहते हैं, तो हमारी ताकत बंदूकों से भी बड़ी हो जाती है। नफरत कितनी भी बड़ी क्यों न हो, वो एक सच्चे इंसान के जनाजे के सामने भी घुटने टेक देती है।
आपको भारत मां के इस गुमनाम’ और महान नायक की कहानी कैसी लगी? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें और इस गौरवशाली इतिहास को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए पोस्ट को शेयर जरूर करें।
#KnowledgeAdda #FrontierGandhi #KhanAbdulGhaffarKhan #IndianHistory #InspirationalStories #HistoryFacts #UnsungHeroes
Mnsnews > Uncategorized > नेहरू ,गांधी के स्वार्थ का शिकार , ख़ान अब्दुल गफ्फार खान






