Tuesday, August 4, 2026
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ठरकी चाचा लेहड़ू

चमचे मेलोडी पर उछल कूद रहे है….
मेलोनी और बुधनी, दोनों नामों में आख़िर में एक जैसी ध्वनि आती है.
दोनों का एक साथ ज़िक्र इसलिए क्योंकि जिस तरह आज पीएम मोदी का नाम इटली की पीएम मेलोनी से जोड़ा जा रहा है.

उसी तरह 1959 में बुधनी का नाम कभी (पंडित.?) नेहरू से जोड़ा गया था.

मेलोनी ऐसे पद पर हैं कि उनको कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा. लेकिन बुधनी की कहानी बहुत दर्दनाक है.

नेहरू जी को दामोदर घाटी निगम योजना का शायद उदघाटन करना था. पंडित नेहरू के स्वागत के लिए निगम ने धनबाद की संथाल आदिवासी महिला बुधनी मंजियायिन को चुना.

उसने नेहरूजी को माला पहनाई, और आदत से ठरकी नेहरू ने भी बुधनी के गले में माला डाल दी.

आमतौर पर नेता ऐसा करते हैं लेकिन पुरुषों के साथ नेहरू तो नेहरू ठहरे ….ठरकी बादशाह

उसके बाद नेहरू जी ने बुधनी से ही उद्घाटन करवाया👇 फोटो में देखिए.

जब बुधनी वापस गाँव पहुँची तो मुखिया ने बुला भेजा, कहा तुम दोनों ने एक दूसरे के गले में माला डाल दी हैं, आज से तुम लोग पति पत्नी हो. और अब इस गाँव में नहीं रहोगी.

परिवार ने भी उसका बहिष्कार कर दिया. इतना ही नहीं दामोदर घाटी निगम ने भी नौकरी से बर्खास्त कर दिया. लोग उसे नेहरू की आदिवासी पत्नी तक कहने लगे.

वो धनबाद छोड़कर कहीं और चली गई, कोई कहता है किसी मजदूर से शादी कर ली.

लेकिन नेहरूजी ने कोई एक्शन नहीं लिया और ना ही दुखियारी की मदद की.

आज उन्हीं के लोग एक और महिला का मज़ाक़ उड़ा रहे हैं, क्योंकि पीएम ने उसे नाम से मिलती जुलते नाम वाली टॉफ़ी मेलोडी भेंट कर दी..

ओर भाई उन्होंने ठरकी नेहरू की तरह बदनामी नहीं दी
उन्होंने मेलोडी दी है कोई “माला-डी” नहीं

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