Saturday, April 25, 2026
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मुसलमान बनाने वाले कमाते हैं अरबो रुपये,प्रति व्यक्ति पेमेंट,बड़ा खेल,शातिर हरामी

 

उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने धर्मांतरण मामले में तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है। राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने आज यहां यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मूक बधिरों की भाषा समझने और उन्हें अपनी भाषा में समझाने वाला इरफान मूक बधिरों को ऐसा ज्ञान देने लगा था, जिससे कुछ मूक बधिरों को अपने ही धर्म से नफरत होने लगी थी। उन्होंने बताया कि इरफान मूक बधिरों को इस्लाम का ज्ञान देता था और दूसरे धर्मों की बुराइयां करता था। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में बाल कल्याण मंत्रालय का इंटरप्रेटेटर इरफान ख्वाजा खान और अपना धर्म परिवर्तन कर चुके दो मूक बधिर राहुल भोला और मन्नू यादव उर्फ अब्दुल मन्नान शामिल हैं। तीनों को दिल्ली व हरियाणा से गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि इरफान तरह-तरह के प्रलोभन देकर इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मूक बधिरों को तैयार करता था। उन्होंने कहा कि इनफान अपने इरादे में कामयाब होने पर दिल्ली के जामिया स्थित इस्लामिक दावा सेंटर जाकर उमर गौतम से मिलकर जहांगीर आलम से धर्मांतरण प्रमाण पत्र बनवाता था।

कुमार ने बताया कि गिरफ्तार राहुल भोला जो खुद भी मूक बधिर है, वह इरफान के साथ मिलकर मूक बधिरों को धर्मांतरण के लिए प्रेरित करता था। जांच एजेंसियों का कहना है कि इरफान और राहुल ने मिलकर मन्नू यादव का धर्म परिवर्तन कराया और इन तीनों ने मिलकर आदित्य गुप्ता का धर्म परिवर्तन कराया। उन्होंने बताया कि मन्नू यादव ने अपने घर के पूजा स्थल पर रखी मूर्ति को तोड़ दिया था और इस्लाम धर्म के प्रति अति कट्टर हो गया था। उन्होंने बताया कि इन तीनों को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की गई। राहुल और मन्नू यादव की भाषा समझने के लिए एटीएस ने इंटरनप्रेटेटर की मदद ली। कुमार ने बताया पूछताछ पर यह भी पता चला है कि धर्मांतरण के तार फिलीपींस के घोषित आतंकी बिलाल फिलिप से जुड़े हैं। बिलाल दोहा, कतर में इस्लामिक आनलाइन युनिवर्सिटी चलाता है, जिसे अंतररष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित किया जा चुका है। बिलाल को 2014 में गिरफ्तार भी किया जा चुका है। उमर के बिलाल से भी संबंध प्रकाश में आए हैं। उन्होंने बताया कि इस्लामिक दावा सेंटर के खातों में जनवरी 2010 से 14 जून 2021 के बीच एक करोड़ 82 लाख 83 हजार 910 रुपये जमा किए गए। इसमें काफी पैसे कैश में जमा किए गए।

उन्होंने बताया कि विदेशों से इन लोगों के खाते में चेक से भी पैसे आए और खाड़ी देशों कतर, रियाद, अबूधाबी और दुबई से लगभग 50 लाख रुपये जमा किए गए। उन्होंने बताया कि उमर गौतम फातिमा चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम से संस्था बनाकर उसमें फंड मंगवाता था। इस ट्रस्ट का न तो कोई रजिस्ट्रेशन कराया गया है और न ही कभी आयकर रिटर्न दाखिल किया गया है। उसके परिवार के कई सदस्यों के खातों में भी विदेशों से पैसे आए हैं। उन्होंने बताया कि खाते में नकद लेन-देन में हवाला से भी तार जुड़े होने की भी जानकारी मिली है। इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की भी मदद जी जा रही हैं।  कुमार ने बताया कि यह बड़ा मामला है और एटीएस प्रदेश के 32 जिलों में छानबीन कर रही है। इसमें 27 जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर संबंधित जिले के लिए मिले जानकारी को सत्यापित कराया जा रहा है जबकि कुछ जिलों में एटीएस खुद छानबीन कर रही है। जिन जिलों में एटीएस और पुलिस छानबीन कर रही है उसमें अलीगढ, आजमगढ़, आगरा, वाराणसी, कानपुर, बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर, नोएडा, गाजियाबाद और बुलदशहर जैसे बड़े जिले शामिल हैं।

कुमार ने बताया कि एटीएस द्वारा रिमांड पर लिये गये उमर गौतम असम के मरकज-उल-मारिफ नाम की संस्था के साथ काम कर चुका है। यह संगठन बांग्लादेशी और और अन्य नागरिकों के लिए काम करता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में उमर दिल्ली आ गया था और वहां उसने इस्लामिक दावा सेंटर नाम की संस्था खोल ली। असम की संस्था के खातों से भी उमर की संस्था के खातों में पैसों का लेन देन हुआ है। मरकज-उल-मारिफ नाम की संस्था के खिलाफ 2020 में दिसपुर और फेमा और फेरा में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार धर्मांतरण को लेकर गंभीर है। आरोपियों पर रासुका लगाने के साथ उनकी सम्पत्ति जब्त करने पर भी विचार कर रही है।

 

उत्तर प्रदेश में सामूहिक धर्मांतरण रैकेट मामले में विदेशी फंडिंग का खुलासा हुआ है। इसमें हवाला के माध्यम से फंडिंग की बात सामने आई है जिसमें कतर, दुबई और आबूधाबी से ट्रांजेक्शन होने के सबूत मिले हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश एटीएस ने इस मामले में तीन अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार किया है।

यूपी एडीजी (लॉ &ऑर्डर) की प्रेस कांफ्रेंस में बताया गया है कि उमर गौतम जो पूर्व से ही हिरासत में है, उसने इरफान के साथ मिलकर प्रलोभन देकर धर्मांतरण करने का कार्य किया है। इनका पूरा गैंग था जो प्रलोभन देकर लोगों के धर्म परिवर्तन का कार्य करता था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा गया है कि सामूहिक धर्मांतरण के इस मामले अलीगढ़, बनारस, नोएडा और सहारनपुर समेत 27 जिलों के एसपी को पत्र लिखकर सत्यापन करवाया जा रहा है। आरोपितों द्वारा कई मूक-बधिरों का धर्मांतरण कराया गया। इन मूक-बधिरों के ब्रेन वाश करने का काम एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए राहुल भोला के द्वारा किया जाता था।

जाँच में विदेशी फंडिंग का एंगल भी सामने आया है। एटीएस के अनुसार 2 करोड़ रुपए यूनाइटेड किंगडम से आए जिनका उपयोग मुख्य आरोपित उमर गौतम और मुफ्ती कासिम के द्वारा किया गया। एटीएस के मुताबिक यूके से यह फंडिंग गुजरात के किसी व्यापारी के खाते के माध्यम से की गई जिसकी जानकारी को वैरिफाई किया जा रहा है। इस पूरी फंडिंग में लगातार फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट अधिनियम का उल्लंघन होता रहा और जिसकी जाँच ईडी के द्वारा की जा रही है।

साभार- दैनिक जागरण

इसके अलावा यह जानकारी भी सामने आ रही है कि एटीएस को दोनों मुख्य आरोपितों के बैंक खातों में मध्य-पूर्वी देशों से फंडिंग के भी सबूत मिले हैं। इस पूरे मामले में विभिन्न पहलुओं पर जाँच की जा रही है। हालाँकि एटीएस ने आज (28 जून) ही तीन अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में मन्नू यादव उर्फ अब्दुल मन्नान निवासी गुरुग्राम हरियाणा, इरफान शेख निवासी बीड महाराष्ट्र और राहुल भोला निवासी नई दिल्ली शामिल हैं। इसके अलावा शनिवार (26 जून) को एटीएस मुख्य आरोपितों को एनसीआर के आसपास उन 4 जिलों में लेकर गई जहाँ आरोपितों के द्वारा बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के उद्देश्य से यात्राएं की गई।

उत्तर प्रदेश में भूचाल मचा देने वाले इस धर्मांतरण मामले में फतेहपुर के नूरुल हुदा इंग्लिश मीडियम स्कूल की भूमिका भी संदिग्ध रही है। जाँच के दौरान यह जानकारी सामने आई थी कि नूरुल हुदा स्कूल का उपयोग उमर गौतम अपने धर्मांतरण के कार्य के लिए करता था। इस स्कूल में पढ़ाने वाली अंग्रेजी की एक टीचर ने भी स्कूल में इस्लामी धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर आवाज उठाई थी। हिन्दू बच्चों को उर्दू और अरबी पढ़ाने का विरोध करने पर अंग्रेजी की टीचर को स्कूल से निकाल दिया गया था और उनके साथ बदतमीजी भी की गई थी। हालाँकि ऑपइंडिया की रिपोर्ट के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग ने फतेहपुर के DM और SP को तलब किया था।

ज्ञात हो कि यूपी ATS ने मूक बाधिर छात्रों व कमजोर आय वर्ग के गरीबों-असहायों को धन, नौकरी व शादी करवाने का प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने वाले एक बड़े गिरोह के दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया था। इन दोनों पर अब तक करीब 1000 मूक बधिर, महिलाएँ और बच्चों को निशाना बनाकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप है। यही नहीं, इस मामले में यूपी पुलिस ने आईएसआई और विदेशी फंडिंग होने का शक भी जताया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये इस्लामी गिरोह ब्रेनवाश के जरिए हिंदुओं का धर्मांतरण कराते थे। गिरफ्तार आरोपितों में मुफ्ती काजी जहाँगीर आलम कासमी और मोहम्मद उमर गौतम शामिल हैं। उमर गौतम का खुद इस्लामीकरण हुआ था।

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