गढ़वा. गढ़वा के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से आदिवासियों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है. बताया जाता है कि एक बड़ी साजिश के तहत आदिवासी समुदाय के लोगों का धर्म परिवर्तन करा कर उन्हें ईसाई बनाया जा रहा है. ऐसे में आदिवासी अब अब सरना धर्म छोड़ कर लोग ईसाई धर्म को अपना रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार गढ़वा के नक्सल एवं आदिम जनजाति समुदाय के लोगों को एक बड़ी साजिश के तहत टारगेट कर उन्हें ईसाई धर्म में परवर्तित किया जा रहा है. इसी क्रम में जिले बढ़गढ़ के हेसातु गांव के 22 कोरवा जाती परिवार के लोगों का ईसाई धर्म में परिवर्तन कराया गया है. स्थानीय लोगों के ये लोग पांच वर्ष पहले तक सरना धर्म को ही मानते थे. लेकिन, यहां सरकारी भूमि पर एक बड़ा चर्च बनाकर आदिवासियों को ईसाई धर्म में बुला लिया गया.
टीम जब इस मामले की पड़ताल करने ग्राउंड जीरो पहुंची तो देखा कि बढ़गढ़ के कई आदिवासी अपना धर्म परिवर्तन कर चुके हैं. कुछ स्थानीय लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि ईसाई धर्म के प्रचारक पहले इन परिवारों को उनके सरना धर्म के बारे में बुरा भला समझाते है और फिर कहते हैं आप चर्च जाओगे तो आपकी सारी परेशानी दूर हो जाएगी. इसी प्रलोभन के बाद पिछले 5 वर्षों में इस क्षेत्र में ईसाई धर्म को मानने वालो की संख्या बढ़ती चली गई.
जानें क्यों कर रहे हैं धर्म परिवर्तन
सरना धर्म के लोगों से जब न्यूज 18 संवाददाता ने धर्म परिवर्तन के कारणों के बारे में पूछा तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पहले हमलोगों को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब ईसाई बनते ही सारे कष्ट दूर हो गए. वहीं जब चर्च के निर्माण के बारे में पूछा गया तो लोगों ने बताया कि इसे हम लोगों ने आपसी सहयोग से बनाया है. लेकिन, लोगों का कहना है कि इसके लिए विदेशों से भी फंड जुटाया गया है. इस मामले पर जब हमने फादर रेजी से उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि हम लोगों ने कोई प्रलोभन नहीं दिया है. लोग खुद ईसाई बन रहे है. ग्रामीणों ने ही इस चर्च को बनवाया है.
बीजेपी विधायक ने की जांच की मांग
बताया जाता है कि पिछले दस वर्षों में मिशनरी ने इस इलाके में लगभग 25 से 30 हजार आदिम जनजाति के लोगों को ईसाई बना दिया है. इस मामले पर स्थानीय बीजेपी विधायक आलोक चौरसिया ने बताया कि पिछले कई वर्षों से इस क्षेत्र में एक साजिश के तहत गरीब आदिवासी परिवारों को ईसाई धर्म मे परिवर्तन किया जा रहा है जो जांच का विषय है. वहीं इस मामले पर जिले के अधिकारियों की चुप्पी उनकी लापरवाही को दर्शाती है. पंचायत सेवक एरियल कछप ने कहा कि यहां लोगों ने धर्म परिवर्तन कब किया हमें इसकी जानकारी नहीं है.





