Sunday, May 24, 2026
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गांधी और गांधी के प्रयोग 18 से ज्यादा महिलाओं के साथ

देख लो इस ठरकी की सच्चाई
दो ठरकीयो ने देश को आज इस मुहाने पर ला खड़ा किया है. एक ने दूसरे को देश का बापू और दूसरे ने पहले को चाचा बना दिया 😡😡
दोस्तों, लंदन के प्रसिद्ध अखबार द टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक 82 साल की गांधीवादी इतिहासकार कुसुम वदगामा ने गांधीजी को लेकर चौंकाने वाले बयान दिए बता दें कि कुसुम वदगामा कभी अपनी किशोरावस्था में गांधी की अनुयायी रह चुकी थीं,,,,,,

उन्होंने कहा कि गांधीजी के जीवन में ब्रह्मचर्य के प्रयोगों को लेकर कई सवाल उठते हैं उनके अनुसार, गांधी आश्रम में महिलाओं के साथ एक ही बिस्तर पर सोने का प्रयोग करते थे, जिसे वे आत्म-संयम की परीक्षा बताते थे इसी सिलसिले में उन्होंने अपने रिश्ते की पोती मनुबेन गांधी, जो अमृतलाल तुलसीदास गांधी की पोती और जयसुखलाल की बेटी थीं, के साथ भी इस तरह का प्रयोग किया था,,,,,

ये बातें इसलिए ज्यादा चर्चा में आईं क्योंकि कुसुम खुद गांधी के विचारों से गहराई से जुड़ी रही हैं ब्रिटिश इतिहासकार जेड एडम्स ने करीब 15 साल की रिसर्च के बाद 2010 में
“गांधी: नेकेड एम्बिशन” नाम से किताब लिखी उस किताब में उन्होंने गांधी के ब्रह्मचर्य प्रयोगों को “अर्ध-दमित यौन उन्माद” जैसा बताया और गांधी के जीवन में महिलाओं के साथ उनके निजी संबंधों पर विस्तार से चर्चा की,,,,,,

किताब में जिक्र है कि गांधी कई बार महिलाओं के साथ बिना कपड़ों के सोते थे और स्नान के समय भी महिलाएं उनके साथ होती थीं जाने-माने लाइब्रेरियन गिरिजा कुमार ने भी गांधी से जुड़े दस्तावेजों की स्टडी के बाद करीब डेढ़ दर्जन महिलाओं का उल्लेख किया है जो इन प्रयोगों का हिस्सा थीं,,,,,

निर्मल कुमार बोस, जो लगभग 20 साल तक गांधी के निजी सहायक रहे, ने अपनी किताब “माय डेज विद गांधी” में लिखा कि गांधी आत्म-नियंत्रण जांचने के लिए महिलाओं से मालिश करवाते थे और उनके साथ सोते थे नोआखली की एक घटना का जिक्र करते हुए बोस ने बताया कि एक सुबह जब वे गांधी के कमरे में पहुंचे तो सुशीला नैयर को रोते हुए और गांधी को दीवार पर सिर मारते देखा इसके बाद बोस ने इन प्रयोगों का विरोध किया और जब गांधी नहीं माने तो वे उनसे अलग हो गए,,,,,,,

एडम्स के हवाले से बताया जाता है कि गांधी ने खुद लिखा था कि जब सुशीला स्नान के दौरान उनके सामने होती थीं तो वे आंखें बंद कर लेते थे उन्हें सिर्फ साबुन लगाने की आवाज सुनाई देती थी और वे समझ नहीं पाते थे कि वह कब पूरी तरह बिना कपड़ों के हैं या कब सिर्फ अंतर्वस्त्रों में,,,,,,,

पंचगनी में जब गांधी के इन प्रयोगों की चर्चा फैली तो नाथूराम गोडसे के नेतृत्व में विरोध हुआ हालात ऐसे बने कि गांधी को वहां अपने प्रयोग रोकने पड़े और जगह छोड़नी पड़ी बाद में गांधी हत्याकांड की सुनवाई में इस विरोध को उन पर हुए कई हमलों में से एक माना गया,,,,,,,

एडम्स का कहना है कि सुशीला, मनु, आभा और अन्य महिलाओं ने गांधी के साथ अपने संबंधों पर कभी साफ-साफ कुछ नहीं कहा पूछने पर वे इतना ही कहती थीं कि यह सब ब्रह्मचर्य के सिद्धांत का हिस्सा था,,,,,,,

गांधी की हत्या के बाद इन प्रयोगों से जुड़ी चर्चाएं दबा दी गईं आरोप लगते रहे कि गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ के तौर पर स्थापित करने के लिए कई दस्तावेज और सबूत नष्ट किए गए यह भी कहा जाता है कि कांग्रेस ने राजनीतिक कारणों से इस सच को सामने नहीं आने दिया गांधी की हत्या के बाद मनु को चुप रहने को कहा गया और उन्हें गुजरात के एक दूर-दराज इलाके में भेज दिया गया। सुशीला भी इस विषय पर मौन रहीं,,,,,,,

एक ब्रिटिश इतिहासकार के मुताबिक, जवाहरलाल नेहरू गांधी के ब्रह्मचर्य प्रयोगों को अप्राकृतिक मानते थे सरदार पटेल और जे.बी. कृपलानी ने भी इस वजह से उनसे दूरी बना ली गिरिजा कुमार लिखते हैं कि पटेल तो इसे ‘अधर्म’ तक कहने लगे थे बेटे देवदास गांधी समेत परिवार के कई सदस्य और सहयोगी भीउनके इन प्रयोगों से नाखुश थे,,,,,

बी.आर. अंबेडकर, विनोबा भावे, डी.बी. केलकर, छगनलाल जोशी, किशोरलाल मशरूवाला, मथुरादास त्रिकुमजी, वेद मेहता, आर.पी. परशुराम और जयप्रकाश नारायण जैसे नेताओं ने भी खुले तौर पर इन प्रयोगों का विरोध किया था,,,,,,

अब तक गांधी की जो छवि रही है वह गोल चश्मा पहने, दो युवतियों के कंधों का सहारा लेकर चलने वाले बुजुर्ग की है अपने अंतिम समय तक गांधी इसी तरह के माहौल में रहे,,,,,,

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