खेल सीधा है.
सोनम वांगचुक को ‘एक नया गांधी ‘ बनने का सपना दिखाकर बली का बकरा बनाया जा रहा है. उसे शुरू में कहा गया था कि सप्ताह भर में आआपा, कांग्रेस और दूसरे दलों के नेता उसके मंच पर पहुंचने लगेंगे और बहुत बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से सरकार को जल्द ही बैकफुट पर आना पड़ेगा, धर्मेंद्र प्रधान को त्याग पत्र देना पड़ेगा और सोनम देश का नया गांधी बन जाएगा.
लेकिन अब सोनम समझ चुका है कि सबकुछ झूठ बोला गया. अब कॉकरोच चाहते हैं (पीछे से आआपा, कांग्रेस आदि भी) कि सोनम की तबीयत बहुत खराब हो जाए- मर ही जाए तो और बेहतर. और तब सभी विपक्ष वाले खुलकर सरकार को घेर लें. भारत की जनता को किसी के भूख हड़ताल से कोई फर्क़ नहीं पड़ता लेकिन ऐसा करते हुए कोई सचमुच मर जाये तो जनता उसे गांधी मान लेती है.
उधर सरकार की नीति भी स्पष्ट है. राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लगे मूर्खों की कोई भी अनुचित मांग नहीं मानी जाएगी. रही बात सोनम की- तो सरकार पूरी तरह से CCTV आदि से सोनम की शारीरिक स्थिति पर नजर रख रही है, रोजाना डॉक्टर उसकी जांच कर रहे हैं. जब भी लगेगा कि सोनम की जान को खतरा है- पुलिस की सहायता से उसे उठाकर हॉस्पिटल ले जाया जाएगा.
लेकिन, सरकार को ध्यान रखना होगा कि कहीं ये कॉकरोच पहले ही सोनम को पानी में मिलाकर कुछ ऐसा न दे दें जिससे उसकी अचानक मृत्यु हो जाए.
विपक्ष इस समय 2027 उत्तर प्रदेश चुनाव जीतने के लिए एक सोनम वांगचुक तो क्या, ऐसे 10 वांगचुक की बली देने को भी तैयार बैठा है. उन्हें पता है कि मोदी जी की केंद्र सरकार तो 2029 तक रहेगी ही, पर मोदी पर बंदूक ताने हुए भी उनका असली निशाना योगी जी और उनका 2027 चुनाव है. मोदीजी तो अपनी आयु के कारण 2029 के बाद प्रधानमंत्री नहीं रह पाएंगे, पर विपक्ष किसी भी कीमत पर मोदीजी के बाद योगीजी को केंद्र में प्रधान मंत्री रूप में स्वीकार नहीं करेगा. इसके लिए 10-20 सोनम वांगचुक की बली देना कोई बड़ी बात नहीं.






