Friday, February 27, 2026
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रिटायर्ड जज काटजू और थिप्से गए थे,भगोड़े नीरव मोदी की ममद को,इंग्लैंड की अदालत ने औकात दिखा दी दोनों की

यूके के जज सैम गूजी ने रिटायर्ड भारतीय जज अभय थिप्से और मार्कंडेय काटजू की तरफ से भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के समर्थन में एक्सपर्ट के रूप में राय को पूरी तरह से खारिज कर दिया। जज गूजी ने दोनों भारतीय जजों को खरी-खरी सुनाई। थिप्से ने दावा किया था कि नीरव के खिलाफ सबूत भारतीय कानून के तहत धोखाधड़ी और क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट के क्राइटेरिया को पूरा नहीं करेंगे।

काटजू की गवाही पर उठाए सवाल
यूके के जज गूजी ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू की गवाही पर सवाल उठाए। काटजू ने वेस्टमिंस्टर कोर्ट में एक एक्सपर्ट के रूप में नीरव मोदी के पक्ष में बाते कही थीं। काटजू ने कहा था कि भारत में जूडिशरी का अधिकांश हिस्सा भ्रष्ट है और जांच एजेंसियां सरकार की ओर झुकाव रखती हैं। लिहाजा नीरव मोदी को भारत में निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिलेगा। गूजी ने काटजू के बयान को हैरानकरने वाला, अनुचित और तुलनात्मक रूप से ठीक नहीं माना। उन्होंने कहा कि मेरी नजर में उनकी राय निष्पक्ष और विश्वसनीय नहीं थी।

काटजू का होता है अपना एजेंडा
यूके जज ने कहा कि काटजू ने भारतीय जूडिशरी में इतने ऊंचे ओहदे पर काम किया है। इसके बावजूद उनकी पहचान ऐसे मुखर आलोचक के रूप में रही है जिनका अपना एजेंडा होता है। मुझे उनके सबूत के साथ ही उनका व्यवहार भी सवालों के घेरे में लगा। जज सैम गूजी ने काटजू की पूर्व CJI की टिप्पणी का भी उल्लेख किया। पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने पर काटजू ने फेसबुक पोस्ट में उनकी कड़ी आलोचना की थी। जबकि काटजू रिटायरमेंट के बाद खुद प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन रहे थे।

नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू (Markandey katju) ने नीरव मोदी के पक्ष में गवाही भी दी थी, लेकिन यह काम नहीं आ सकी।

पूर्व CJI काटजू ने की थी नीरव को बचाने की कोशिश,

लंदन की कोर्ट ने कहा- उनकी गवाही पर भरोसा नहीं, कही महत्वपूर्ण बात

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के मामले में गुरुवार को मिली भारत को जीत

नई दिल्ली: लंदन स्थित वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत ने नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए भारत सरकार की दलील को स्वीकार कर लिया और कहा कि उसके खिलाफ सबूत ‘उसे आरोपों का सामना करने के लिए भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश देने के वास्ते प्रथम दृष्टया पर्याप्त हैं।’ नीरव मोदी ने अपने बचाव के लिए तमाम प्रयास किए लेकिन अंतत: उसे हार मिली। यहां तक कि अपने पक्ष में गवाही देने के लिए नीरव मोदी ने पूर्व सीजेआई मार्केंडेय काटजू तक को गवाह के तौर पर पेश किया लेकिन कोर्ट के आगे एक ना चली।
काटजू की गवाही पर सवाल
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, गुरुवार को नीरव मोदी के प्रत्यर्पण का आदेश देते हुए, वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में जिला न्यायाधीश सैम गोजी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू की गवाही विश्वसनीय नहीं थी और उनकी पहचान अपने व्यक्तिगत एजेंडे के साथ एक मुखर आलोचक की की थी। काटजू पिछले साल वेस्टमिंस्टर कोर्ट में एक विशेषज्ञ के रूप में पेश हुए थे जिन्होंने नीरव मोदी का बचाव करते हुए कहा था कि भगोड़े हीरा व्यापारी को भारत में निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी।

कोर्ट ने कही बड़ी बात
खबर के मुताबिक जज सैम गोज़ी ने कहा: ‘मैं जस्टिस काटजू के विशेषज्ञ राय की बात करता हूं। 2011 में सेवानिवृत्त होने तक भारत में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश होने के बावजूद, उनके द्वारा दिए गए सबूत मेरे हिसाब से कम विश्वसनीय थे। अदालत में उनके सबूत पूर्व वरिष्ठ न्यायिक सहयोगियों के प्रति नाराजगी के साथ दिखाई दिए। इसमें उनकी पहचान मुखर आलोचक और उनके अपने निजी एजेंडे के तौर पर हुई।’

क्या कहा था काटजू ने
अपनी गवाही में, काटजू ने अदालत से कहा था कि भारत की एक खराब आर्थिक स्थिति है जिसके लिए नीरव मोदी एक बलि का बकरा बनाया गया और उसे भारत में वित्तीय संकट पैदा करने का क़ में जमानत अर्जी के

भारत सरकार पर संदेह का कोई कारण नहीं- कोर्ट
न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें इस मामले में विपरीत राजनीतिक प्रभाव का कोई साक्ष्य नहीं मिला जैसा कि हीरा कारोबारी के कानूनी दल ने दावा किया था। न्यायाधीश ने यह भी उल्लेख किया कि मामले में जनता और मीडिया की बड़ी दिलचस्पी को देखते हुए उन्हें नहीं लगता है कि भारत सरकार के आश्वासन पर संदेह करने का कोई कारण है। न्यायाधीश ने फैसले में लिखा है, ‘भारत और इस देश के बीच मजबूत संबंधों पर भी मैंने गौर किया है। ऐसे कोई साक्ष्य नहीं हैं कि भारत सरकार ने राजनयिक आश्वासन का उल्लंघन किया।’

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