Saturday, May 2, 2026
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इतिहास का काला सच: 1920 से पहले कोई जोधाबाई का ज़िक्र नही था,कम्युनिस्ट दलालो,भिखमंगे इतिहासकारों और बॉलीवुड के हिजड़ो ने बढ़ावा दिया,हिन्दुओ को नीचा दिखाने

जब पैसा, सत्ता,सेना और साधन आपके हाथ हो तो आप सुअर को शेर दिखा सकते हो किताबो में मीडिया में …….आशु

भारत के मुग़ल शहंशाह अकबर का नाम आपने सुना ही होगा। अकबर के जीवन की बात करें तो यह बात सामने आती अकबर की कई पत्नियां थीं। लेकिन आपने सबसे अधिक नाम ‘जोधाबाई’ का ही सुना होगा। कई फिल्मों ओर सीरियल्स में भी अकबर ओर जोधाबाई के जीवन को काफी करीब से दिखाया गया था। लेकिन वास्तविकता आखिर क्या है। क्या अकबर ने जोधबाई से विवाह किया था। क्या जोधाबाई का अस्तित्व सही में था। ऐसे ही कुछ प्रश्नों के सही उत्तर आज हम आपको यहां दे रहें हैं।

ये तथ्य बताते हैं कि जोधाबाई का अस्तित्व था ही नहीं

1 . आपको जानकर हैरानी होगी की प्रसिद्ध पुस्तक अकबरनामा में जोधाबाई का कोई जिक्र नहीं है।
2 . जहांगीर की आत्मकथा ” तुजुक-ए-जहांगिरी” में भी जोधाबाई का कहीं कोई उल्लेख नहीं मिलता है।

3 . बहुत सी प्राचीन अरेबिक किताबों में लिखा है ‘हम इस निकाह को नहीं मानते, निकाह पर हमें संदेह है।”

4 . अकबर-ए-महुरियत पुस्तक में उल्लेख है कि “हमें इस हिन्दू निकाह पर संदेह है क्यौकी निकाह के वक्त राजभवन में किसी की आखों में आँसू नही थे और ना ही हिन्दू गोद भरई की रस्म हुई थी ।।”

5 . पारसी लोगों की पुस्तक परसी तित्ता में लिखा हुआ है कि “यह भारतीय राजा एक परसियन वैश्या को सही हरम में भेज रहा है , अत: हमारे देव (अहुरा मझदा) इस राजा को स्वर्ग दें ”
6 . हमारे इतिहास को राव तथा भट्ट ही प्राचीन काल से लिखते आये हैं। इन्होने लिखा है कि “गढ़ आमेर आयी तुरकान फौज , ले ग्याली पसवान कुमारी ,राण राज्या राजपूता लेली इतिहासा पहली बार ले बिन लड़िया जीत (1563 AD )।” मतलब आमेर किले में मुग़ल फ़ौज आती है। और एक दासी की पुत्री को ब्याह कर ले जाती है, हे रण के लिये पैदा हुए राजपूतों तुमने इतिहास में ले ली बिना लड़े पहली जीत।

यह है वास्तविकता

असल सत्य यह है कि शहंशाह अकबर का निकाह किसी तथाकथित जोधाबाई से नहीं बल्कि “मरियम-उल-जमानी” नामक महिला से हुआ था। यह लड़की आमेर के महाराज भारमल के विवाह में उनकी रानी के साथ आई पारसी दासी की पुत्री थी। पारसी लोगों की पुस्तान “परसी तित्ता” में इसी कारण अकबर को स्वर्ग देने की प्रार्थना पारसी लोग कर रहें हैं। क्यों की वे जानते हैं कि अकबर का निकास पारसी वैश्या के साथ हुआ था। इसके अलावा यह भी एक ऐतिहासिक तथ्य है कि बुंदेला राजपूतों ने मराठी राजपूतों के साथ मिलकर अकबर तथा उसके पुत्र जहांगीर को अपने क्षेत्र से खदेड़ दिया था।
जहांगीर की मां यदि जोधाबाई होती तो वह वास्तव में कभी मराठा तथा बुंदेला राजपूतों से लड़ने के लिए जहांगीर को भेजती ही नहीं। वर्तमान स्थिति यह है कि आजकल इस प्रकार के कई सीरियल्स टीवी पर दिखाई जा रहें हैं। जिनका किसी भी ऐतिहासिक तथ्यों से कोई सरोकार नहीं है। इस प्रकार ने सीरियल तथा फिल्मों से आज के युवा लोगों में भ्रामक जानकारी पहुंच रही है। यदि इस प्रकार के सिरियल्स अथवा फिल्मों का विरोध किया जाये तो इनको फ्री पब्लिसिटी का लाभ मिल जाता है। अतः सही यही है आप स्वयं ही इस प्रकार के मानसिक प्रदूषण फैलाने वाली चीजों का खुद ही बहिष्कार कर दें।

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