Tuesday, April 16, 2024
Uncategorized

सोनिया गांधी ने क्यों छोड़ा रायबरेली, कुछ नही बचा था,सूपड़ा था साफ

 

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने राज्यसभा चुनाव के लिए पर्चा भरा है. उनके नामांकन से साफ हो गया है कि अब वह रायबरेली से 2024 का लोकसभा नहीं लड़ेंगी. कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, लगातार 4 बार रायबरेली लोकसभा सीट (Raebareli Lok Sabha Seat) से जीत हासिल कर लोकसभा में पहुचीं. यहीं नहीं, 1951 के बाद से सिर्फ 3 लोकसभा चुनाव को छोड़कर, हर बार कांग्रेस (Congress) यहां से जीतती आई है.

अब सियासी गलियारों में कयास है कि सोनिया (Sonia Gandhi) के बाद कांग्रेस के गढ़ रायबरेली (Raebareli) का क्या होगा? पार्टी अपनी पारंपरिक सीट किसे सौंपेगी? आखिर सोनिया ने यह सीट क्यों छोड़ दी? समझते हैं इस Explainer में…

रायबरेली कैसे बना कांग्रेस का गढ़?
रायबरेली लोकसभा सीट के इतिहास को उठाकर देखें तो पता लगता है कि 1951 (पहले लोकसभा चुनाव) से हर बार नेहरू-गांधी परिवार का कोई न कोई सदस्य यहां से चुनाव लड़ा. सिर्फ 2 बार ऐसे मौके आए, जब नेहरू-गांधी परिवार के किसी सदस्य ने इस सीट से चुनाव नहीं लड़ा. वो था- 1962 और 1999 का चुनाव. रायबरेली, सिर्फ सोनिया गांधी ही नहीं उनकी सास इंदिरा गांधी का भी गढ़ रहा. इंदिरा गांधी 3 बार रायबरेली से लोकसभा चुनाव लड़ीं और जीतकर लोकसभा में पहुंची थीं. इंदिरा के पति फिरोज गांधी भी रायबरेली से चुनाव लड़े. उन्होंने 1952 और 1957 में दो बार जीत हासिल की.

इसी तरह, पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू के पोते अरुण नेहरू ने 1980 के उपचुनाव और 1984 में रायबरेली से जीत हासिल की थी. 1989 और 1991 में, जवाहरलाल नेहरू की भाभी शीला कौल ने इस सीट से जीत हासिल की थी.

 

रायबरेली में कब-कब हारी कांग्रेस?
आजादी के बाद से कांग्रेस 3 बार रायबरेली से लोकसभा चुनावी हारी. पहला- आपातकाल के बाद के चुनावों में, जब इंदिरा गांधी जनता पार्टी के राज नारायण से हार गई थीं. इसके अलावा 1996 और 1998 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी थी. तब इंदिरा के चचेरे भाई विक्रम कौल और दीपा कौल भाजपा से हार गए थे. ठीक इसी दौर में गैर-कांग्रेसी गठबंधन सरकारें थोड़े समय के लिए केंद्र की सत्ता में आई थीं.

रायबरेली सीट के साल 1951 के पहले लोकसभा चुनाव से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो 17 में से केवल 6 चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर एक तिहाई से भी कम रहा है. पार्टी ने आठ बार 50% से अधिक वोट हासिल किए, जिसमें सोनिया द्वारा लड़े गए सभी 4 चुनाव शामिल हैं. कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 2009 में इस सीट से किसी भी उम्मीदवार द्वारा जीते गए सबसे अधिक वोट शेयर 72.2% हासिल कर रिकॉर्ड बनाया था. उस चुनाव में यूपीए दोबारा केंद्र में सत्ता में लौटी थी.

1996 और 1998 में सबसे बुरा प्रदर्शन
रायबरेली सीट पर कांग्रेस का सबसे खराब प्रदर्शन 1996 और 1998 के चुनाव में था. तब उसे 10% से भी कम वोट मिले थे, लेकिन 1999 के चुनाव से उसका वोट शेयर फिर बढ़ने लगा. इस चुनाव में राजीव और सोनिया के करीबी गांधी परिवार के वफादार सतीश शर्मा यहां से चुनाव लड़े थे और जीतकर लोकसभा में पहुंचे थे.

BJP ने कैसे किया गेम?
2014 से पहले तक रायबरेली में कांग्रेस के मुख्य प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) हुआ करते थे, लेकिन 2014 के बाद कहानी बदल गई. सपा-बसपा को पीछे धकेल, भाजपा मुख्य प्रतिद्वंदी बन गई. 2014 के चुनाव में भाजपा उप-विजेता थी. 2014 में जहां बीजेपी ने 21.1% वोट हासिल किया तो 2019 में 38.7 फीसदी वोट अपने नाम किया. रायबरेली लोकसभा सीट पर कांग्रेस भले ही अच्छा प्रदर्शन करती रही हो, लेकिन हाल के दिनों में विधानसभा क्षेत्रों में कहानी अलग रही है.

2022 का विधानसभा चुनाव: 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस न केवल रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र के सभी 5 विधानसभा क्षेत्रों में हार गई. बल्कि इन 5 में से 4 में तीसरे और 1 में चौथे स्थान पर रही. इनमें से 4 सीटों पर सपा ने जीत हासिल की, और 1 पर भाजपा ने. ​​5 विधानसभा क्षेत्रों में, कांग्रेस को केवल 13.2% वोट शेयर हासिल हुआ, जो कि सपा के 37.6% और भाजपा के 29.8% से बहुत कम था. आपको बता दें कि 2022 के विधानसभा चुनाव में पूरे सूबे में पार्टी को सिर्फ 2 सीट और 2.3% वोट नसीब हुआ था.


2022 विधानसभा चुनाव का परिणाम.
2017 का विधानसभा चुनाव: अब 2017 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस और भाजपा ने रायबरेली लोकसभा सीट की 2-2 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी. जबकि सपा ने 1 सीट जीती थी. तब कांग्रेस ने सभी क्षेत्रों में 31.2% के साथ सबसे अधिक वोट शेयर हासिल किया था, उसके बाद भाजपा 27.8% वोट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर थी. लेकिन 2017 में यूपी में कांग्रेस की कुल सीटों की संख्या बहुत निराशाजनक थी. कुल 7 सीटें हासिल की थीं और 6.2% वोट शेयर अपने नाम किया था.

यह भी पढ़ें: सुबह जगते ही ये काम किया करते थे बनारस के राजा, नवाब रामपुर को पता लगा तो उड़ गए होश

2012 का विधानसभा चुनाव: 2012 में, जब केंद्र में कांग्रेस की सत्ता थी और रायबरेली लोकसभा सीट उसके कब्जे में थी, तब भी विधानसभा में कुछ खास नहीं कर पाई थी. 2012 में रायबरेली की 5 में से 4 सीटें नवोदित पीस पार्टी ऑफ इंडिया ने जीती थीं. हालांकि 2012 के विधानसभा चुनाव में रायबरेली के विधानसभा क्षेत्रों में खराब प्रदर्शन के बावजूद, कांग्रेस ने यूपी में कुल मिलाकर बेहतर प्रदर्शन किया था.28 सीटें और 11.7% वोट अपने नाम किया था.

Leave a Reply