असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम) बिहार और उत्तर प्रदेश में के बाद अब मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले अपनी सियासी जमीन तलाश रही है. नगरीय निकाय चुनाव में अपनी किस्मत अजमाने जा रही यह पार्टी इंदौर, भोपाल, बुरहानपुर समेत करीब 22 जिलों में अपने प्रत्याशी उतारने जा रही है. इसकी तैयारी के लिए औवेसी ने 9 जून को मध्यप्रदेश के नेताओं को साथ हैदराबाद में बैठक बुलाई है. इसके बाद प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया जाएगा.
भोपाल. भोपाल नगर निगम में पार्षद पद के उम्मीदवारों के चयन को लेकर कांग्रेस की बुलाई गई बैठक में सोमवार को जमकर बवाल मचा. कांग्रेस ने नरेला विधानसभा के वार्ड क्रमांक 75, 76, 77, 78, 79 और 36, 37, 38, 39, 40 समेत 59,70, 71,59, 58,44, 43 वार्ड की बैठक बुलाई थी. इस महत्वपूर्ण बैठक में नरेला विधानसभा से जुड़े पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं को बुलाया गया था. वार्ड वार दावेदारों को भी बैठक में बुलाया गया था, लेकिन बताया जा रहा है कि वार्ड दावेदारी को लेकर कांग्रेस के दो गुट आपस में भिड़ गए. पूर्व पार्षद मोहम्मद सगीर ने जिस वार्ड से दावेदारी पेश की उस वार्ड पर उनके बाहरी होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता महेंद्र सिंह चौहान के समर्थकों ने विरोध किया.
स्थानीय निकाय चुनाव : कमलनाथ के एक फैसले से पार्टी के सारे धुरंधर चारों खाने चित्त
कांग्रेस में टिकट की खींचतान रोकने के लिए पीसीसी ने इस बार कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए एक प्रोफार्मा तैयार किया है.
निकाय चुनाव में अपने समर्थकों को टिकट की सिफारिश करने वाले नेताओं की पूरी सूची तैयार की जाएगी. उसमें एक कॉलम इस बात का भी है कि कितने समर्थकों को नेताजी ने टिकट दिलाया और उसमें से कितने जीते. फिर इसी को पैमाना बनाकर 2023 और 2024 में नेताजी का पद और कद पार्टी में तय होगा. पीसीसी के इस फैसले से छोटे कहे जाने निकाय चुनाव कांग्रेस के बड़े बड़े नेताओं की नींद उड़ाए हुए हैं.
भोपाल. एमपी में कांग्रेस के वो किलेदार जो चुनाव के दौरान पार्टी की कलह बनते आए हैं, पीसीसी चीफ कमलनाथ ने बड़ी चतुराई से उन पर ब्रेक लगा दिया है. कमलनाथ ने निकाय चुनाव में टिकट देने की ऐसी शर्त रख दी है कि नेता चारों खाने चित्त हैं. पीसीसी चीफ के इस फैसले से पार्टी में खलबली मची हुई है.
निकाय चुनाव के बहाने कमलनाथ ने विधानसभा चुनाव 2023 और 2024 की भी जमीन तैयार कर ली है. उन्होंने पार्टी में गुटबाजी और कलह फैलाने वाले नेताओं को किनारे लगाने की तैयारी कर ली है. एक तीर से कई निशाने साध दिए हैं. कमलनाथ ने शर्त ये रखी है कि टिकट उसी नेता के समर्थकों को दिया जाएगा जो जीत की गारंटी दे जाएं.
रिकॉर्ड रखेगा पीसीसी
निकाय चुनाव में अपने समर्थकों को टिकट की सिफारिश करने वाले नेताओं की पूरी सूची तैयार की जाएगी. उसमें एक कॉलम इस बात का भी है कि कितने समर्थकों को नेताजी ने टिकट दिलाया और उसमें से कितने जीते. फिर इसी को पैमाना बनाकर 2023 और 2024 में नेताजी का पद और कद पार्टी में तय होगा. पीसीसी के इस फैसले से छोटे कहे जाने निकाय चुनाव कांग्रेस के बड़े बड़े नेताओं की नींद उड़ाए हुए हैं.
जीत की गारंटी दो टिकट लो
कांग्रेस में टिकट की खींचतान रोकने के लिए पीसीसी ने इस बार कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए एक प्रोफार्मा तैयार किया जिसने टिकट के दावेदारों और दावेदारों की पैरवी करने वाले उनके आकाओं सबको हैरान कर दिया है. ये कांग्रेस के उन दिग्गज कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा इम्तेहान है जो अपने समर्थकों को टिकट दिलाने का दम दिखा रहे हैं. कमलनाथ के निकाय चुनाव के इस नए फॉर्मूले में टिकट की सिफारिश करने वाले नेता को अपने समर्थक की जीत की जिम्मेदारी भी लेनी होगी. इसका बाकायदा पीसीसी में रिकार्ड मेंटेन होगा.
सिंधिया के दलबदल से झटका
2020 में सिंधिया के दलबदल के बाद से अब तक लगातार कांग्रेस को जो झटके मिले हैं उसमें नेताओं और कार्यकर्ताओं की पार्टी में आस्था लौटाना सबसे बड़ी चुनौती है. भले बाद में पार्टी ने अपना फैसला वापिस ले लिया हो लेकिन कार्यकर्ता निर्दलीय चुनाव ना लड़ें इस तरह का शपथ पत्र भरवाना उसी का नमूना था. अपने समर्थकों को जीत दिलाना नेताओं की भी नैतिक जिम्मेदारी है. उसके लिए प्रोफार्मा भरवाना और उसी के आधार पर नेताओं की परफार्मेंस रिपोर्ट तैयार करवाना, क्या पार्टी में पैदा हुई खाई का नतीजा है.






