Tuesday, April 28, 2026
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मेडिकल कॉलेज एडमिशन ठगी का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

मध्यप्रदेश stf को बड़ी कामयाबी मिली है,मेडिकल घोटाले का सरगना धरा गया है,विगत जनवरी से घेराबंदी चालू थी।

उत्तर प्रदेश के संदीप ने 10 वर्षों तक भोपाल में रहकर मेडिकल में दाखिला दिलाने के नाम पर लोगों को ठगा उसके बाद वो पांच साल तक भोपाल से अपने नेटवर्क का संचालन करता रहा। पूर्णिया से उसकी गिरफ्तारी ने कई राज खोले।

पटना हो या भोपाल, देशभर में मेडिकल में दाखिला दिलाना इनका बांए हाथ का काम! पूर्णिया से गिरफ्तार
भोपाल एसटीएफ ने पूर्णिया से की गिरफ्तारी।

‘मेडिकल में दाखिला कराना है? चुटकी में हो जाएगा।’ रकम ज्यादा लगेगी। कितनी? देशभर के मेडिकल कालेजों में दाखिला दिलाने के नाम पर ठगी का खेल पिछले 15 वर्षों से चल रहे खेल से इसका खुलासा हुआ। भोपाल से पूर्णिया पहुंची एसटीएफ ने जिनकी गिरफ्तारी की उस ठग गिरोह का सरगना संजीव पिछले पांच वर्षों से पटना में रहकर इस खेल को अंजाम दे रहा था। इसके पहले उसने 10 वर्षों तक भोपाल में रहकर गिरोह का संचालन किया था। गिरोह के एजेंट कई राज्यों में फैले हुए थे, जो दाखिले के नाम पर लोगों को अपने झांसे में ले लेते थे और उनसे मोटी रकम वसूलते थे। यह रकम 30 से 80 लाख रुपये तक होती थी।

इसी साल दो जनवरी से इस गिरोह के पीछे पड़ी भोपाल एसटीएफ ने पटना एसटीएफ की टीम के सहयोग से इस गिरोह के दो ठगों को पूर्णिया के भट्टा बाजार स्थित एक होटल से गिरफ्तार किया। इन ठगों के पास से मिले मोबाइल फोन एवं लैपटाप से कई अहम जानकारी भोपाल एसटीएफ को मिली है। गिरफ्तारी के बाद इन ठगों को रिमांड पर लेने के लिए न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद पांच दिनों के रिमांड पर इन्हें लेकर एसटीएफ की टीम भोपाल के लिए रवाना हो गई। भोपाल पुलिस के समक्ष मध्यप्रदेश रीवा जिला के मऊगंज निवासी विवेक कुमार मिश्र पिता जीवन लाल मिश्र ने मेडिकल में दाखिला के नाम पर ठगी करने की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

– एजेंट के माध्यम से मेडिकल कालेजों में दाखिला दिलाने का झांसा देकर वसूलते थे 30 से 80 लाख
– ठगी का आरोपित संदीप मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं का है रहने वाला, पिछले पांच वर्षों से पटना में रह रहा था
– पटना के पहले दस वर्षों तक संदीप ने भोपाल में रहकर किया मेडिकल के नाम पर फर्जीवाड़ा
– संदीप और दीपक अपने बैंक खातों में मंगाते थे रुपये, हर राज्य में सक्रिय थे इनके एजेंट
जिन ठगों को गिरफ्तार किया गया उनमें पटना सिटी जलालपुर निवासी श्याम सुंदर करवारिया के पुत्र संदीप कुमार करवारिया और मधुबनी जिला के नवरतन कालोनी निवासी दिलीप सिंह के पुत्र दीपक कुमार सिंह शामिल हैं। पुलिस के समक्ष की गई शिकायत में रीवा जिला के मऊगंज निवासी विवेक कुमार मिश्र के द्वारा रीवा एसपी को आवेदन देकर गांधी मेडिकल कालेज भोपाल और लोकमान्य मेडिकल कालेज साइन मुंबई में बेटा प्रतीक का नामांकन कराने के नाम पर संदीप करवारिया, देवराज मिश्र, चौहान, पोंटिल, राकेश वर्मा पर 36 लाख रुपया ठगी का आरोप लगाया था। आवेदन में बताया गया था कि संदीप करवारिया, देवराज मिश्र, चौहान, पोंटिल, राकेश वर्मा के द्वारा गांधी मेडिकल कालेज भोपाल एवं लोकमान्य मेडिकल कालेज साइन बांबे में प्रतीक मिश्र का एडमिशन कराने के नाम 36 लाख रुपये की मांग की गई थी।

विवेक कुमार मिश्र ने तीन किस्तों में 34 लाख रुपये दिल्ली आकर देवराज मिश्र, संदीप करवारिया और चौहान को दिए थे। इनमें पहली किस्त में 12 लाख, दूसरी किस्त में 15 लाख और तीसरी किस्त में सात लाख रुपये दिए गए थे। 34 लाख रुपये देने के बाद कुछ दिन में ही इन लोगों के द्वारा प्रतीक मिश्र का एडमिशन हो जाने का मोबाइल पर मैसेज भी भेजा गया था। उसके बाद बाकी के दो लाख रुपये भी इन लोगों के द्वारा ले लिया गया था।

मेडिकल में नामांकन कराने वाले गिरोह के हर राज्य में है एजेंट

पकड़ में आए दोनों ठगों ने भोपाल एसटीएफ के समक्ष इस बात का पर्दाफाश किया है कि देश के अमूमन हर राज्य में इनके एजेंट हैं। इन एजेंटों का काम मेडिकल कालेज में नामांकन के लिए छात्रों को फंसा कर लाना है। देश के अलग-अलग मेडिकल कालेजों में नामांकन के लिए इन ठगों द्वारा अलग- अलग फीस भी वसूली जाती थी। नामांकन के नाम पर 30 लाख से लेकर 80 लाख रुपये तक लिए जाते थे।

यह राशि इस गिरोह के मास्टरमाइंड संदीप एवं दीपक अपने बैंक खाते में मंगाते थे ताकि नामांकन के नाम पर राशि देने वाले भरोसा कर सकें। काफी कम रकम उनके द्वारा नकद में लिया जाता था। एसटीएफ की टीम के समक्ष पकड़ में आए इन ठगों ने कई छात्रों के मेडिकल में नामांकन कराने के नाम पर मोटी रकम की ठगी करने की बात कबूल की है।

पटना में रहने के पहले दस साल तक भोपाल में रहा था संदीप

ठगी का आरोपित संदीप पिछले पांच वर्षों से पटना में रह रहा था। इसके पूर्व वह दस वर्षों तक भोपाल में रहकर मेडिकल में नामांकन कराने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का संचालन करता रहा। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले का रहने वाला है। उसके साथ गिरफ्तार मधुबनी जिले का रहने वाला दीपक कुमार भी कई वर्षों से इस ठगी के खेल में शागिर्द था। भोपाल में रहने के दौरान भी उसने कई छात्रों से नामांकन के नाम पर ठगी की थी।

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