Monday, June 24, 2024
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शराब घोटालेबाज अरविंद केजरीवाल को जेल जाना पड़ा,पूरी ताकत लगा दी जमानत के लिए, नही मिली तो संविधान की ड्रामेबाजी

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आज तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया। दिल्ली की शराब नीति मामले में 10 मई को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें 2 जून को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया था। अरविंद केजरीवाल ने सरेंडर करने से पहले राजघाट पर जाकर महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद केजरीवाल ने कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर में भी दर्शन किए। इसके बाद वे आम आदमी पार्टी के ऑफिस पहुंचे।

आत्मसमर्पण से पहले का दिन
अपने आत्मसमर्पण से पहले, केजरीवाल ने राजघाट और हनुमान मंदिर का दौरा किया और पार्टी नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने AAP कार्यकर्ताओं को भावुक संदेश देते हुए कहा, “पता नहीं जेल से कब वापस आऊंगा; वहां मेरे साथ जाने क्या-क्या करेंगे। मेरी चिंता मत करना और दिल्ली के लोगों के लिए काम करते रहना।”
न्यायिक हिरासत
दिल्ली की एक अदालत ने केजरीवाल को 5 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर की गई न्यायिक हिरासत की मांग को स्वीकार कर लिया, क्योंकि वह अंतरिम जमानत पर थे। राउज एवेन्यू कोर्ट के ड्यूटी जज ने उनके आत्मसमर्पण के बाद यह फैसला सुनाया।
पार्टी नेताओं का समर्थन
दिल्ली के मंत्री कैलाश गहलोत ने इस घटना पर कहा, “दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई तय तारीख के मुताबिक सरेंडर कर दिया है। उन्होंने हमें दिल्ली के लोगों के लिए काम करते रहने का निर्देश दिया है।”
क्या है आगे का रास्ता?
अरविंद केजरीवाल के आत्मसमर्पण के बाद, AAP के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में मिश्रित भावनाएं हैं। जहां एक तरफ वे अपने नेता के साहस की प्रशंसा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके जल्दी से जल्दी रिहा होने की प्रार्थना भी कर रहे हैं।
केजरीवाल का जेल जाना भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना है। अब देखना यह होगा कि उनकी अनुपस्थिति में पार्टी कैसे आगे बढ़ती है और दिल्ली के विकास कार्यों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है। उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं के लिए यह एक कठिन समय है, लेकिन वे अपने नेता के संदेश को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।
दिल्ली की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि आगे क्या होगा और केजरीवाल की रिहाई के बाद राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाएंगे।

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