Wednesday, May 6, 2026
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केजरीवाल लड़ा 460 सीट पर चुनाव 3 राज्य में ,जीता कुल 2 सीट

आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत के सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं और वह एक राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर उभरने की ओर बढ़ रही है। पार्टी के कई नेताओं ने 2024 के आम चुनावों के लिए अभी से राष्ट्रीय स्तर के सपने बुनने शुरू कर दिए हैं। लेकिन, जिस दिल्ली की सल्तनत का रास्ता लखनऊ से होकर गुजरता है, उस उत्तर प्रदेश में मतदाताओं ने आम आदमी पार्टी के मुफ्त वाले फॉर्मूले को यूं नजरअंदाज कर दिया है कि उससे ज्यादा नोटा पर यकीन जताया है।

यूपी में एक भी सीट पर मुकाबले में नहीं ‘आप’
चुनाव आयोग की वेबसाइट के आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार रात 9.27 तक दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी और पंजाब में सरकार बनाने जा रही आम आदमी पार्टी देश के सबसे ज्यादा 403 सीटों वाली यूपी विधानसभा चुनाव में एक भी सीट पर आगे नहीं चल रही थी।

नोटा को मिले ‘आप’ से लगभग दोगुने वोट
इस समय तक यूपी में आम आदमी पार्टी को महज 0.38% वोट मिले थे। जबकि, नोटा (नन ऑफ द अबव) के खाते में 0.69% वोट जा चुके थे। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की पार्टी ही नहीं, हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम को भी इस समय तक यूपी में सिर्फ 0.48% वोट मिल पाए थे। इन दलों से आगे कांग्रेस (2.34%) और आरएलडी (2.88%) जैसी पार्टियां थीं।
‘आप’ 2014 से लड़ रही है यूपी में चुनाव
केजरीवाल ने यूपी का इंचार्ज अपने राज्यसभा सांसद संजय सिंह को बनाया है। उनका कहना है, ‘यूपी का चुनाव आम आदमी पार्टी की मौजूदगी, एएपी के आइडिया को लोगों तक ले जाने, अरविंद केजरीवाल जी की नीतियों को हर गांव तक ले जाने के लिए था।’ पार्टी की यूपी यूनिट ने एक ट्वीट में उनको कोट करते हुए कहा, ‘हमें बिना रुके या थके चुनौतियों को कबूल करते हुए आगे बढ़ना है।’ गौरतलब है कि किसान आंदोलन से लेकर यूपी से जुड़े हर राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह सबसे ज्यादा सक्रिय रहे हैं। बड़ी बात ये है कि केजरीवाल की पार्टी का यूपी में यह कोई पहला चुनाव नहीं है। पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव से ही यहां कोशिश करती रही है।

 

 

3 राज्य, 460 सीटों पर लड़े, 2 जीते: 2024 में मोदी से लड़ने का ख्वाब देखने वाली AAP का परफॉर्मेंस यह भी

पाँचों राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव का नतीजा आ गया है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में बीजेपी ने वापसी की तो वहीं पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत हुई। 10 मार्च को हुए मतगणना ने पहले AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पंजाब मामले के सह प्रभारी राघव चड्डा का बड़ा बयान सामने आया था। मोहाली में पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में राघव चड्डा ने कहा कि एक्जिट पोल के अनुसार, आम आदमी पार्टी एक राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर उभर कर आई है। भविष्य में आम आदमी पार्टी कॉन्ग्रेस की जगह लेगी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 2024 में भाजपा के खिलाफ एक चुनौती के तौर पर उभरेंगे।

जब आम आदमी पार्टी के बीजेपी के खिलाफ उतरने की बात हो रही है तो आइए एक नजर डालते हैं उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गोवा में उनकी क्या स्थिति रही। सबसे पहले बात करते हैं उत्तर प्रदेश की। प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा की लहर के आगे इस बार भी विरोधियों और विपक्ष की एक नहीं चली। इसी के चलते भाजपा एक बार फिर अकेले अपने दम पर 403 में से 255 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सरकार बनाने जा रही है। वहीं, पंजाब में करामात करने वाली आम आदमी पार्टी का यूपी में खाता भी नहीं खुला।

फोटो साभार: ECI

AAP ने यूपी चुनाव में 350 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। खलीलाबाद सीट पर पूर्व सांसद भालचंद्र यादव के बेटे सुबोध यादव से पार्टी को काफी उम्मीदें थी लेकिन वह पाँचवें नंबर पर खिसक गए। यहाँ AAP के संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी रैली की थी। पार्टी को कुल 0.38 प्रतिशत वोट मिले हैं, जो कि नोटा (0.69) से भी कम है। कानपुर में 10 में से 7 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।

फोटो साभार: ECI

वहीं उत्तराखंड की बात करें तो यहाँ आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे कर्नल अजय कोठियाल अपनी सीट भी नहीं बचा सके। वह उत्तराखंड की गंगोत्री विधानसभा सीट से अपना चुनाव हार गए। उनकी जमानत जब्त हो गई। उत्तराखंड में पार्टी का खाता भी नहीं खुला। उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी ने सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे लेकिन वो वहाँ पर कुल 3.31 प्रतिशत वोट ही हासिल कर सकी।

फोटो साभार: ECI

गोवा में पहली बार आम आदमी पार्टी के दो प्रत्‍याश‍ियों ने जीत तो दर्ज की है। लेकिन उनके सीएम उम्‍मीदवार अमित पालेकर अपनी सीट हार गए हैं। वहाँ उन्हें 6.77 प्रतिशत वोट मिले हैं। AAP ने सभी 40 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे।

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