Tuesday, July 16, 2024
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंत्रिमंडल ने रची प्लेन गिराने की साजिश,…. हाई कोर्ट…

‘PM मोदी ने विमान गिराने की रची साजिश, उनको चुनाव लड़ने से रोकें’: दिल्ली हाई कोर्ट ने पायलट की याचिका खारिज की, कहा- इसे इलाज की जरूरत, इस पर नजर रखें

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लोकसभा चुनाव से अयोग्य ठहराने को लेकर दायर की गई एक याचिका को ठुकरा दिया है। हाई कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले को लताड़ा भी है। हाई कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता को इलाज की जरूरत है।

दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गडेला ने इस मामले की सुनवाई की। हाई कोर्ट ने बुधवार (3 जुलाई, 2024) को मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “क्या आप ठीक हैं? आपकी याचिका आधी अधूरी है। आप एक छोर से दूसरे छोर पर जा रहे हैं। आप कह रहे हैं कि पीएम मोदी ने झूठी शपथ ली है और आपके प्लेन पर हमला हुआ था, आपकी बेटी गायब है, या कोई पूर्व चीफ जस्टिस आपको मारने की कोशिश कर रहा है।”

हाई कोर्ट ने कहा, “कोई भी इंसान आपकी याचिका समझ नहीं सकता। इसका कोई मतलब ही नहीं है। सिंगल बेंच ने बिल्कुल सही कहा कि याचिका में हवा-हवाई आरोप हैं।” कोर्ट ने कहा कि पीएम मोदी पर लगाए गए आरोप कल्पना का परिणाम हैं और इसके पीछे कोई सबूत नहीं है।

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को लताड़ा भी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को दिन में तारे नहीं दिखाई दे रहे तो भी उसे इलाज की जरूरत है। कोर्ट ने याचिककर्ता के घर वाले इलाके के SHO, SDM और जिला जज से नजर रखने को कहा है। कोर्ट ने इसी के साथ उसकी याचिका खारिज कर दी।

यह याचिका डालने वाले का नाम कैप्टन दीपक कुमार है और वह पूर्व में एयर इंडिया का पायलट था। उसने दिल्ली हाई कोर्ट ने एक याचिका लगाई थी कि पीएम मोदी और उनके मंत्रियों ने 8, जुलाई, 2018 को कथित तौर पर एयर इंडिया का एक विमान गिराने की साजिश रची थी और राष्ट्रीय सुरक्षा को अस्थिर करने का प्रयास किया था।

दीपक कुमार ने दावा किया था कि यह कथित कृत्य पीएम मोदी की संविधान के प्रति ली गई शपथ का उल्लंघन था। दीपक कुमार ने इसी कारण पीएम मोदी को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराने की माँग की थी। इससे पहले इस याचिका की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट की एकल बेंच ने की थी।

इस एकल बेंच ने भी 30 मई, 2024 को इस याचिका को रद्द कर दिया था। मामले की सुनवाई करते हुए एकल बेंच ने कहा था कि याचिकाकर्ता बिना किसी सबूत के फर्जी दावे कर रहा है। उसके द्वारा लगाए गए सभी आरोप फर्जी हैं। हाई कोर्ट की एकल बेंच के निर्णय के खिलाफ उसने चुनौती दाखिल की थी जो 3 जुलाई, 2024 को रद्द कर दी गई।

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