Friday, May 8, 2026
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भारतीय मूल की ब्रिटिश गृहमंत्री इंग्लैंड में भारतीयों के खिलाफ बोली,मोदी सरकार की बेआवाज लाठी से हुई बाहर

ब्रिटिश प्रधानमंत्री लिज ट्रस वीजा नियमों में ढील देंगी. उन्होंने भारतीय मूल की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन को इमिग्रेशन रिफॉर्म प्लानिंग से बाहर का रास्ता दिखा दिया है.

गृह मंत्री के कार्यालय में न जाने का निर्देश
लोकल बिजनेस में स्टाफ की कमी से चिंतित कंजर्वेटिव पार्टी के सदस्यों को कहा गया है कि वे गृह मंत्री के कार्यालय की जगह कैबिनेट ऑफिस और बिजनेस डिपार्टमेंट में जाएं. यह सुएला ब्रेवरमैन के लिए झटके की तरह है. अभी ब्रॉडबैंड इंजीनियर, बूचर और देखरेख करने वाले कर्मचारी वीजा के लिए कतार में हैं.

इमिग्रेशन नीति पर सरकार के एजेंडे को बाधित करने का आरोप
वहीं, कंजर्वेटिव पार्टी सदस्यों की ओर से ब्रेवरमैन पर इमिग्रेशन नीति पर स्वतंत्र रूप से काम करने और गृह मंत्रालय में खुद का नेतृत्व अभियान चलाने का आरोप लगाया है. एक सूत्र ने The Sun को बताया, यह स्पष्ट है कि सुएला ब्रैवरमेन के स्वतंत्र रूप से काम करने और सरकार के एजेंडे को लगातार बाधित करने से सरकार और पार्टी में व्यापक निराशा है.

‘रोजाना के कामकाज पर ध्यान दें सुएला’
सूत्र के मुताबिक, सुएला ब्रेवरमैन एक स्पष्ट नेतृत्व अभियान चला रही है, लेकिन इसका सरकार पर अस्थिर प्रभाव पड़ रहा है. उन्हें रोजाना के कामकाज पर ध्यान केंद्रित करने और अपनी हरकतों को रोकने की जरूरत है, अन्यथा वह बहुत लंबे समय तक नहीं टिकेंगी.

भारत के साथ खुली सीमा वाली इमिग्रेशन नीति पर जताई थी आपत्ति
दरअसल, एक साक्षात्कार में सुएला ने कहा था, उन्हें डर है कि भारत के साथ व्यापार समझौते से ब्रिटेन में आने वाले भारतीयों की संख्या बढ़ सकती है. उन्होंने कहा था, ‘मुझे भारत के साथ खुली सीमाओं वाली इमिग्रेशन नीति को लेकर आपत्ति है, क्योंकि मुझे नहीं लगता कि लोगों ने इसके लिए ब्रेक्जिट के पक्ष में मतदान किया था.’

भारत-ब्रिटेन के बीच टूट सकता है मुक्त व्यापार समझौता
इसके बाद ‘द टाइम्स’ अखबार ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा था कि भारत ब्रेवरमैन की ओर से की गई ‘अपमानजनक’ टिप्पणी से ‘हैरान और निराश’ है. साथ ही भारत सरकार के नाराज होने के बाद भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) कथित तौर पर टूटने की कगार पर है. ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने एफटीए के लिए इस साल दिवाली की समयसीमा तय की थी.

पूर्व में

ब्रिटेन की गृह मंत्री और भारतीय मूल की नेता सुएला ब्रेवरमैन ने ही भारत के साथ ब्रिटेन के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का विरोध किया है. उनका कहना है कि इससे ब्रिटेन में भारतीयों की भीड़ बढ़ सकती है. ये बयान उन्होंने ब्रिटेन के बर्मिंघम में कंजर्वेटिव पार्टी के वार्षिक सम्मेलन के ठीक बाद दिया है जिसमें उन्हीं की पार्टी की नेता केमी बैडेनओच ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने का ऐलान किया था.
केमी बैडेनओच ने दो दिन पहले ब्रिटेन के बर्मिंघम में कंजर्वेटिव पार्टी के वार्षिक सम्मेलन में भारत के साथ ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ FTA पर जताई गई चिंताओं को दूर करते हुए ये ऐलान किया था. प्रधानमंत्री लिज ट्रस की अगुवाई वाली सरकार में एफटीए पर बातचीत की प्रभारी बैडेनओच ने इस दौरान साफ किया था कि ब्रिटेन की नई सरकार भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अपनी तय समय-सीमा तक खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है.
वहीं, इससे पहले ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस ने भी कहा था कि वो इस महीने के अंत तक भारत के साथ FTA पर हस्ताक्षर करना चाहती हैं. भारत सरकार लंबे समय से भारतीय नागरिकों के लिए ब्रिटेन में काम करने और स्टडी वीजा बढ़ाने की मांग कर रही है और इस समझौते से ब्रिटेन में भारतीयों की एंट्री आसान हो सकती है.

भारत के साथ समझौते पर ब्रेवरमैन को आपत्ति
ब्रिटिश मैगजीन ‘द स्पेक्टेटर’ को दिए एक इंटरव्यू में ब्रेवरमैन ने कहा कि भारतीय प्रवासियों की संख्या ब्रिटेन में अपनी वीजा की अवधि से अधिक समय बिताने वाले लोगों में सबसे ज्यादा है. गृह मंत्री ने भारत के साथ पिछले साल हुए उस समझौते की भी आलोचना की जिस पर उनकी पूर्ववर्ती प्रीति पटेल ने हस्ताक्षर किए थे. उन्होंने दावा किया कि इससे देश में अवैध प्रवासियों और वीजा से अधिक समय बिताने वाले लोगों की संख्या में बहुत इजाफा हुआ था.
समझौते के खिलाफ क्यों बोलीं ब्रेवरमैन
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2020 में 20,706 भारतीयों ने यूके में अपने वीजा से अधिक समय बिताया जो संख्या बाकी देशों के नागरिकों की तुलना में अधिक है. 2020 में 473,600 भारतीयों में जिनके वीज़ा 12 महीनों के अंदर समाप्त होने वाले थे, उनमें 4,52,894 लोगों ने तो ब्रिटेन छोड़ दिया था लेकिन इनमें 4.4 फीसदी लोगों ने ओवरस्टे किया.
ब्रेवरमैन ने स्पेक्टेटर से कहा, ‘मैं भारतीयों के लिए ब्रिटेन की सीमा खोलने वाली इस नीति को लेकर काफी चिंतित हूं क्योंकि मुझे नहीं लगता कि लोगों ने इसलिए ब्रेग्जिट के लिए वोट किया था.’

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