Tuesday, April 16, 2024
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4 शादी नही कर सकेंगे मुसलमान, छोटी लड़कियां भी बचेंगी,खत्म हुआ मुस्लिम मैरिज एक्ट

असम सरकार ने समान नागरिक कानून की ओर पहला कदम बढ़ा दिया है. हेमंता बिस्वा सरमा की सरकार ने मुस्लिम मैरिज और डिवोर्स एक्ट 1930 को खत्म करने का फैसला लिया. शुक्रवार को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इसके बाद अब सभी शादियां स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत की जाएंगी. सरकार के मुताबिक, बाल विवाह को रोकने के मकसद से सरकार ने ये कदम उठाया है.
हेमंता बिस्वा सरमा की कैबिनेट ने फैसला लिया है कि मुस्लिम मैरिज और डिवोर्स एक्ट के मामलों से जुड़े 94 लोगों को एकमुश्त 2 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा.

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हाईकोर्ट के रिटायर जज की अगुवाई में बनाई गई थी कमिटी
असम सरकार ने बहुविवाह रोकने के लिए कानून बनाने की तैयारी काफी पहले से कर ली थी. राज्य सरकार ने इसके लिए हाईकोर्ट के रिटायर जज वाली एक स्पेशल कमिटी बनाई थी. कमिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लाम में मुस्लिम पुरुषों की चार महिलाओं से शादी परंपरा अनिवार्य नहीं है. असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने इस रिपोर्ट पर कहा था कि सभी सदस्यों की सर्वसम्मत राय है कि असम राज्य के पास बहुविवाह को समाप्त करने के लिए कानून बनाने की विधायी क्षमता है. असम सरकार अनुच्छेद 254 के तहत इस पर कानून बना सकती है.

 

असम के सीएम हिमंता विस्‍वा सरमा ने राज्‍य में पॉलीगेमी को रोकने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का ऐलान कर दिया था।

 

असम के मुख्‍यमंत्री हिमंत विस्‍वा सरमा के तेवरों से साफ था कि वह राज्‍य में पॉलीगेमी पर रोक लगाएंगे. उन्‍होंने 9 मई 2023 को कहा कि वह असम में एक राज्‍य अधिनियम के तहत पॉलीगेमी पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहे हैं. इस दौरान उन्‍होंने बताया, ‘इसके एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी, जो यह पता लगाएगी कि राज्‍य सरकार के पास पॉलीगेमी पर रोक लगाने का अधिकार है या नहीं.

असम के मुख्‍यमंत्री ने कि विशेषज्ञ समिति लीगल एक्‍सपर्ट्स से विचार-विमर्श कर भारत के संविधान के अनुच्‍छेद-25, संविधान में दिए राज्य के नीति निदेशक तत्व और मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एक्ट 1937 के प्रावधानों का अध्ययन करेगी. इसके अलावा इस मुद्दे से जुड़े सभी पक्षों से विचार-विमर्श किया जाएगा ताकि सही फैसला लिया जा सके. इससे पहले 6 मई को उन्‍होंने कर्नाटक के कोडागु के शनिवारासंथे मदिकेरी में एक रैली में कहा था कि असम में समान नागरिक संहिता लागू करना जरूरी है ताकि पुरुषों को चार शादियां करने और महिलाओं को बच्चे पैदा करने की मशीन बनने से रोका जा सके.

 

क्या है पॉलीगेमी, क्‍या है समस्‍या?
पॉलीगेमी का शाब्दिक अर्थ बहुविवाह है. देश में मुस्लिम समुदाय के पुरुषों को एक से ज्‍यादा शादियां करने की छूट मिली हुई है. मुस्लिम पुरुषों की एक से ज्‍यादा शादियां आईपीसी की धारा-494 के तहत कानूनी तौर पर वैध मानी जाती हैं. इसके अलावा शरई में भी एक से ज्‍यादा शादियों की अनुमति दी गई है. शरीयत के मुताबिक, मुस्लिम पुरुष पहली पत्‍नी की इजाजत लेकर चार शादियां कर सकता है. वहीं, शरीयत में महिलाओं को इस तरह की इजाजत नहीं है. उन्‍हें दूसरी शादी करने के लिए पहले पति से तलाक लेना होता है. उन्‍हें मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) 1937 के तहत पहले पति से बिना तलाक लिए दूसरी शादी की छूट नहीं है.

असम के सीएम हिमंता विस्‍वा सरमा ने कहा कि पॉलीगेमी के मुद्दे से जुड़े सभी पक्षों से विचार-विमर्श किया जाएगा ताकि सही फैसला लिया जा सके.

पहली पत्‍नी से नहीं लेते इजाजत
मुस्लिमों में पुरुषों के दूसरी शादी करने की छूट तभी है, जब पहली पत्‍नी इसकी मंजूरी दे दे. इसमें दिक्‍कत तब आती है, जब दूसरी शादी करने के पहले पहली पत्‍नी से पूछने की जरूरत तक नहीं समझी जाती है. कई मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि उनके शौहर ने दूसरी शादी उनकी बिना सहमति के ही कर ली. इससे उन्‍हें काफी अपमानित महसूस हुआ. यही नहीं, एक तरफ पति अपनी पहली पत्‍नी का ध्‍यान रखना बंद कर देते हैं. वहीं, दूसरी पत्‍नी से होने वाले बच्‍चों को पालने का बोझ भी पहली पत्‍नी पर डाल दिया जाता है. कई बार इन समस्‍याओं से निजात पाने के लिए उन्‍हें कानून का दरवाजा खटखटाना पड़ता है.

 

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