Tuesday, May 5, 2026
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पँचरपुत्र मुख्तार उर्फ बिरयानी बाबा का कारनामा,मंदिर ही कब्जा कर लिया

बेकनगंज के डा. बेरी चौराहा पर वर्ष 1990 के आसपास पूर्व तक यहां हिंदू आबादी भी थी। बाबरी मस्जिद विवाद के बाद दंगा भड़का तो लोग दुकानें मकान बेचकर चले गए। जिन लोगों ने अपने मकान और दुकान छोड़ दिए थे उन्होंने बाद में संपत्ति बेच दी। चूंकि मंदिर संपत्ति को बेचा नहीं जा सकता था लिहाजा उस पर कब्जा कर लिया गया।

शत्रु संपत्ति की खोजबीन करते हुए 17 नवंबर 2021 को एसडीएम ने जो रिपोर्ट तैयारी की थी उसके मुताबिक रामजानकी मंदिर ट्रस्ट का चौकीदार इशहाक बाबा था जो मंदिर परिसर की देखभाल करता था। मंदिर के चबूतरे पर ही इशहाक का बेटा मुख्तार बाबा पंचर जोड़ने का काम करता था। मुख्तार ने संपत्ति छोड़कर जाने वालों का फायदा उठाया और पाक नागरिक के नाम से संपत्ति अपने नाम करा ली। दुकानों में जो यदा कदा कब्जेदार बचे थे, उनसे डरा धमकाकर संपत्ति खाली करा ली और मंदिर की जमीन पर बाबा बिरयानी रेस्टोरेंट बना डाला। बाबा बिरयानी के दस आउटलेट शहर भर में हैं।
विवादित जमीनों का बड़ा सौदागर है मुख्तार : मुख्तार बाबा विवादित जमीनों का काम करता है। चमनगंज, बेकनगंज, कर्नलगंज और इसके आसपास विवादित जमीनों को कम कीमत पर खरीदना और डरा धमकाकर संपत्ति खाली कराना इसका मुख्य काम है।बिठूर, उन्नाव, चकेरी, लालबंगला, जाजमऊ में भी इसने प्लाटिंग कर जमीनों की खरीद फरोख्त की है।
वकीलों का भी पी गया था पैसा : बिठूर की एक संपत्ति को लेकर मुख्तार ने वकीलों से 15 लाख रुपये में सौदा किया था लेकिन रजिस्ट्री करने से बचता रहा। जिसके बाद कचहरी में वकीलों ने उसे पकड़ लिया। तीन घंटे के अंदर पैसा वापस कर मुख्तार ने अपनी जान बचायी थी।

कनगंज में मंदिर परिसर का अस्तित्व मिटाकर बाबा बिरियानी रेस्टोरेंट खड़ा करने वाले मुख्तार बाबा का एक और गजब कारनामा सामने आया है। उसने शत्रु संपत्ति पर पूरे परिवार के नाम से करीब पौने दो करोड़ रुपये लोन लेकर अब बैंक को भी कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है।

शत्रु संपत्ति अधिनियम में साफ है कि ऐसी संपत्तियों को प्रयोग ही नहीं किया जा सकता। जाहिर है, बेकनगंज के डा. बेरी चौराहा पर बाबा बिरयानी का रेस्टोरेंट खड़ा करने वाला मुख्तार बाबा यह अच्छे से जानता था। उसने इसका इस्तेमाल लोन लेने में कर लिया। चिह्नित शत्रु संपत्तियों पर बैंक आफ बड़ौदा कौशलपुरी शाखा के कर्मचारियों की मिलीभगत से अपने साथ ही परिवार के हर शख्स के नाम पर लोन लेकर उन्हें फंसा दिया। लोन में लिया गया पैसा वापस करने की उसकी मंशा नहीं थी, इसी वजह से उसने एक भी किस्त जमा नहीं की। इसके बाद बैंक ने नौ अक्टूबर, 2021 को सार्वजनिक सूचना के तहत बकाया नोटिस जारी कर 60 दिन में मूल के साथ ब्याज जमा न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। बैंक की यह समय सीमा बीत चुकी है और वह जारी नोटिस भी भूल गया।
मुख्तार के परिवार के ये सदस्य बैंक के बकायेदार

-हाजरा खातून पत्नी हाजी मो. इशहाक निवासी 99/88 बेकनगंज (मां)
-गुलशन जहां पत्नी मुख्तार अहमद निवासी 99/88 बेकनगंज (पत्नी)

-महफूज उमर पुत्र मुख्तार अहमद निवासी 99/88 बेकनगंज (बेटा)
-नाज आयशा पत्नी शाहिद आलम निवासी 88/21 सीसामऊ बाजार (बेटी)

 

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