ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने बुधवार (4 अगस्त 2021) को अंतर-धार्मिक विवाह के खिलाफ बयान जारी कर मुस्लिम युवकों से मुस्लिम समुदाय के भीतर ही शादी करने की अपील की है। बोर्ड का कहना है कि मुस्लिम और गैर-मुस्लिम के बीच शादी को शरिया कानून के मुताबिक इस्लाम में हराम माना गया है। इसके अलावा यह धार्मिक रूप से गलत है।
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AIMPLB के कार्यवाहक महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने मुस्लिम युवाओं, आलिमों और मुस्लिम बच्चों के माता-पिता से इस संबंध में अपील की है। बोर्ड ने प्रेस नोट में गैर-मुस्लिम से शादी को गलत चलन करार देते हुए कहा कि अगर कोई मुसलमान किसी गैर-मुस्लिम से शादी करता है तो वह जिंदगी भर गलत काम करता रहेगा।

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Elections) में असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) शुरू से ही चर्चा में रहे हैं. अब उनकी पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट सामने आने के बाद उनके चार हिंदू उम्मीदवारों पर भी खूब चर्चा हो रही है. सवाल उठाए जा रहे हैं कि मुसलमानों को एकजुट करने की बात करने वाले ओवैसी हिंदुओं को टिकट क्यों दे रहे हैं? इसे लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर मीडिया तक में खूब चर्चा है. शायद कम ही लोग जानते हैं कि ओवैसी के चार हिंदू उम्मीदवारों में से एक ऐसी दलित महिला है जिसने मुसलमान से शादी की है. ओवैसी ने उसे बिजनौर ज़िले की नगीना विधानसभा (Nagina Assembly constituency) से उम्मीदवार बनाया है. ये सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है.
नगीना सीट से ललिता कुमारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद यह बहस छिड़ी हुई है कि वो दलित हैं या मुसलमान? नाम से तो वह पूरी तरह दलित लगती हैं. लेकिन उनके बोलचाल का तरीक़ा और रहन-सहन पूरी तरह मुसलमानों वाला है. विधानसभा क्षेत्र में लोग उनसे पूछ भी रहे हैं कि क्या मुसलमान से शादी करने के बाद वो मुसलमान हो गई हैं? इस पर उनका जवाब होता है कि नहीं वह मुसलमान नहीं हुई हैं. ललिता कुमारी के पति इफ्तिख़ार कुरैशी कहते हैं, ‘मैंने ललिता कुमारी से 2016 में स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी की है. शादी के लिए ललिता कुमारी ने धर्म परिवर्तन नहीं किया है.’ लेकिन ललिता कुमारी जब भी मीडिया से मुख़ातिब होती हैं तो वो मुसलमानों वाले लहजे में ही बात करती हैं. बातचीत में वो, इंशा अल्लाह, माशाल्लाह जैसे शब्दों का ख़ूब इस्तेमाल करती हैं. वो कहती हैं, ‘इंशाल्लाह, हम चुनाव जीतेंगे क्योंकि हमें सभी वर्गों का समर्थन मिल रहा है.’ इसलिए उनके धर्म को लेकर क्षेत्र की जनता में संशय बना हुआ है.
दलित-मुस्लिम गठजोड़ से जीत की उम्मीद
ललिता के पति इफ्तिख़ार क़ुरैशी अपनी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और उनकी नीतियों के कट्टर समर्थक हैं. उनका कहना है कि मुसलमानों के मुद्दों पर जहां सपा, बसपा, कांग्रेस जैसी पार्टियां और इनके मुस्लिम सांसद मुंह सिले बैठे रहते हैं वहीं ओवैसी खुलकर बोलते हैं. तीन तलाक कानून, और सीएए-एनआरसी के खिलाफ ओवैसी के ओजस्वी भाषणों की वो जमकर तारीफ करते हैं. लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वह मुस्लिम समाज में ‘ट्रिपल तलाक़’ के जारी रहने के समर्थक हैं तो उन्होंने कहा कि मुसलमानों के लिए शरीयत ही काफी है, सरकार को अलग से कोई कानून थोपने की ज़रूरत नहीं है. क़ुरैशी के मुताबिक इस सीट पर दलित और मुस्लिम वोटों का समीकरण और मुस्लिम समाज में ओवैसी की हीरो वाली छवि उनकी पत्नी की जीत का रास्ता बन सकती है. वहीं क्षेत्र के लोगों क कहना है कि ओवैसी की पार्टी इस सीट पर जीत का ऐसा ख्वाब देख रही है जो कभी पूरा होने वाला नहीं है.
पहले भी हुए हैं ऐसे प्रयोग
दरअसल नगीना विधानसभा सीट पर पहले भी ऐसे प्रयोग हुए हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में भी ओवैसी ने इसी तरह की एक दलित महिला नीलम को अपना उम्मीदवार बनाया था जिसने मुसलमान से शादी कर रखी थी. लेकिन उनकी पार्टी क़रीब 4000 वोटों पर सिमट गई थी. यहां भी पहले भी कई बार मुसलमान से शादी करने वाली दलित महिलाएं चुनाव लड़ चुकी हैं. कभी किसी पार्टी के टिकट पर तो कभी निर्दलीय. लेकिन इनमें से कोई 5000 वोट भी हासिल नहीं कर सकीं. जीतना तो बहुत दूर की बात है. नगीना के अलावा कई और आरक्षित सीटों पर ऐसे प्रयोग हुए हैं. 2012 में पीस पार्टी ने धनौरा की आरक्षित सीट से इसी तरह की एक दलित महिला मनोज कुमारी को टिकट दिया था. उसे भी क़रीब दो हजार वोट मिले थे. मुसलमान से शादी करन वाली गुड्डी बेगम नाम की एक दलित महिला कई बार अलग-अलग विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ कर अपनी किस्मत आज़मा चुकी हैं. वह कभी भी दो ढाई हजार से ज़्यादा वोटों नहीं पा सकीं.





