आज़म खान समाजवादी पार्टी के वो घाघ खिलाड़ी हैं जो अपनी उपस्थिति और पहचान बनाये रखने को बड़े खेल रचते रहते हैं,वर्तमान में कई नए युवा मुस्लिम चेहरों के उभर आने से और खुद के जेल में होने से परेशान आज़म खान का ये दांव सिर्फ अखिलेश यादव को ये बताने का दांव है कि,मैं भी हूँ भूल मत जाना।
रामपुर में आज़म खान के समर्थक और सपा कार्यकर्ता उनसे हटकर एक कदम चल और सोच भी नहीं सकते। आजम खान की कार्यशैली या दबदबे के चलते उनके समर्थक और कार्यकर्ता पार्टी के बारे में कुछ भी बोलने की जुर्रत नहीं करते हैं।
अगर आज़म खान को उनसे कुछ करवाना या बुलवाना होता है तो मौखिक और लिखित में अपने कार्यकर्ताओं को सबक देते हैं, जिसको कार्यकर्ता अक्षरश पढ़कर सुना देते हैं और उससे अलग कुछ भी नहीं बोलते या करते।
पार्टी सूत्र तो यह भी बताते हैं कि फॉलो करने का यह नियम उनके बेटे अब्दुल्ला आजम और पत्नी डाॅ. तज़ीन फात्मा पर भी लागू होता है। दोनों आज़म खान से दिशा निर्देश लेते हैं, जो विधानसभा चुनाव के दौरान भी महसूस किया गया।
ऐसे में चर्चा है कि सीतापुर जेल में दो साल से बंद आजम खान अब अपने कार्यकर्ताओं के द्वारा शांत पानी में कंकड़ मारकर अपनी कम होती साख को बढ़ाना चाहते हैं।
पहले उठी नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग
अभी कुछ दिन पहले आजम खान के निजी मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां शानू ने अखिलेश यादव के द्वारा आजम खान को नेता प्रतिपक्ष बनाने की बात कही थी।
कहा था कि हम भी चाहते हैं कि आजम खान को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाए। आज़म खान ने भी इसी कड़ी में विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया।
आज़म खुद लिखते हैं पटकथा
अब फसाहत अली शानू ने सपा मुखिया अखिलेश यादव पर बगावती बयान दिया है, जिसे सियासी खेमे में माना जा रहा है कि आजम खान खुद ही यह बयानबाजी करवा रहे हैं,
ताकि अखिलेश यादव रूपी शांत पानी में आजम खान कंकड़ मारकर अपने घटते कद को बढ़ा सकें। दरअसल ऐसा हम इसलिए भी कह रहे हैं, क्योंकि आजम खान के मीडिया प्रभारी कुछ भी बयान देने से पहले आजम खान से लिखित और मौखिक सबक लेते रहे हैं और फिर उस सबक को अक्षरश बयान कर देते हैं और बयान से परे मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब घुमाफिरा कर वही स्क्रिप्ट से देते हैं।
ऐसे में मुमकिन है कि आजम खान ही अपने मीडिया प्रभारी के माध्यम से शांत पानी में कंकड़ मारने की कोशिश कर रहे हैं।
अचानक मीटिंग बुलाकर किया गया फ़ेसबुक लाइव
सपा कार्यालय में एक माह में हमेशा होने वाली मीटिंग में मीडिया को कैमरा अलाउ नहीं होता और रमजान में यह महीना मीटिंग भी नही होती है। ऐसा आज़म खान के हुक्म के मुताबिक बरसों से होता चला आया है।
आज़म खान भी हिंदुस्तान में किसी भी जरूरी काम को छोड़कर इस मीटिंग में हर हाल में जरूर शामिल होते रहे हैं। इन हालात में अचानक बुलाई गई मीटिंग में फसाहत शानू द्वारा अखिलेश यादव पर तंज करने सहित
कई आरोपों को फेसबुक लाइव कराया जाता है, ताकि यह बात राजनीतिक गलियारों में प्रदेश स्तर तक खबरों के माध्यम से पहुंच सके। राजनैतिक गलियारों में चर्चा है
कि आजम खान सपा मुखिया और पार्टी सपोर्ट की बड़ी कमी से सख्त मायूस और तकलीफ में हैं, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाने पड़ रहे हैं।
राजनैतिक दबदबा बनाए रखना चाहते हैं आज़म
सैकड़ों मुकदमों के चलते आजम खान अपना राजनैतिक वकार बनाए रखना चाहते हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि आजम खान अगर प्रभावकारी व्यक्तित्व रहेंगे तो उन्हें कहीं न कहीं इसका फायदा भी मिलता रहेगा।
पार्टी नहीं छोड़ सकते आज़म
पुराने समाजवादी समर्थक नाम न लिखने की शर्त पर कहते हैं कि आज़म खान के पार्टी में रहते हुए पार्टी में कई नाजुक दौर आए, लेकिन आजम खान ने शीर्ष नेतृत्व से भले ही मनमुटाव रखा हो!
लेकिन अपने आप को पार्टी का फाउंडर मेंबर बताते हुए उन्होंने कभी भी पार्टी से किनारा नहीं किया। लिहाजा इस बार भी आजम खान पार्टी से किनारा करते नजर नहीं आ रहे हैं।





