केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में कांग्रेस पार्टी को आईना दिखाते हुए यह साफ कर दिया एयर इंडिया को बदहाली की कगार पर लाने में यूपीए सरकार की अहम भूमिका रही है. उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए तथ्यात्मक तौर पर यह सिद्ध कर दिया कि इस कंपनी को जानबूझकर हजारों करोड़ के कर्ज में डुबो दिया गया. इसके कारण ही आज इस कंपनी के विनिवेश करने की स्थिति बनी है. उनकी इस उक्ति का कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी और गौरव गोगोई ने विरोध तो किया लेकिन अन्य विपक्षी दलों के सांसदों का उन्हें सहयोग नहीं मिला. इस मौके पर कांग्रेस पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी भी सदन में मौजूद थी और उनके चेहरे पर तिलमिलाहट साफ दिख रही थी। एयर इंडिया के डिसइनवेस्टमेंट का मुद्दा सदन में आरएसपी सांसद प्रेमचंद्रन और तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंधोपाध्याय ने उठाते हुए केंद्रीय मंत्री से स्पष्टीकरण की मांग की थी।
लोकसभा में नागर विमानन मंत्रालय की बजट अनुपूरक मांगो पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एयर इंडिया में हुए हजारों करोड़ के घपले और वित्तीय अनियमितता का चौंकाने वाला तथ्य रखा। उन्होंने कहा कि की यह एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है. उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को सदन के पटल पर स्वयं रखना चाहते थे लेकिन समय के अभाव में उन्होंने पहले नहीं रखा .उन्होंने कहा कि क्योंकि सुदीप बंदोपाध्याय और प्रेमचंद्रन ने इस मामले पर पुनः स्पष्टीकरण देने की मांग की है तो इसलिए वह विस्तार से अपनी बात रखने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि एयर इंडिया देश की नवरत्न कंपनी थी .निजी क्षेत्र से इसकी शुरुआत हुई. इसका राष्ट्रीयकरण किया गया. राष्ट्रीयकरण करने के बाद कई वर्षों तक इसे सफलतापूर्वक चलाया गया।
लोकसभा में नागर विमानन मंत्रालय की बजट अनुपूरक मांगो पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एयर इंडिया में हुए हजारों करोड़ के घपले और वित्तीय अनियमितता का चौंकाने वाला तथ्य रखा। उन्होंने कहा कि की यह एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है. उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को सदन के पटल पर स्वयं रखना चाहते थे लेकिन समय के अभाव में उन्होंने पहले नहीं रखा .उन्होंने कहा कि क्योंकि सुदीप बंदोपाध्याय और प्रेमचंद्रन ने इस मामले पर पुनः स्पष्टीकरण देने की मांग की है तो इसलिए वह विस्तार से अपनी बात रखने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि एयर इंडिया देश की नवरत्न कंपनी थी .निजी क्षेत्र से इसकी शुरुआत हुई. इसका राष्ट्रीयकरण किया गया. राष्ट्रीयकरण करने के बाद कई वर्षों तक इसे सफलतापूर्वक चलाया गया।
उन्होंने कहा की सुदीप बंधोपाध्याय और प्रेमचंद्रन ने विस्तृत तरीके से अपने कट मोशन में भी इस मामले की ओर सदन का ध्यान दिलाया है. लेकिन सवाल ये उठता है कि एयर इंडिया जैसी नवरत्न कंपनी की यह हालत क्यों हुई ? इसे समझने की आवश्यकता है. उन्होंने सदन को बताया कि वर्ष 2005- 6 में जिस एयर इंडिया की क्षमता केवल 14 करोड़ रु मुनाफे की थी उस कंपनी के द्वारा बोइंग की 68 एयरक्राफ्ट खरीदने के मसौदे पर हस्ताक्षर किया गया. साथ ही 43 एयरक्राफ्ट एअरबस भी खरीदने के मसौदे पर हस्ताक्षर किया गया।
उन्होंने सदन में बल देते हुए कहा कि जिस कंपनी की क्षमता केवल ₹15 करोड़ मुनाफे की थी उस कंपनी यानी एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के द्वारा 111 एयरक्राफ्ट खरीदने के अव्यवहारिक निर्णय लिए गए। उन्होंने कहा कि इसके पीछे के क्या कारण हैं उसका विश्लेषण मैं नहीं करना चाहता . लेकिन यह सदन को अवश्य समझना चाहिए कि 2005 के पहले जो एयर इंडिया कंपनी ₹15 करोड़ की प्रॉफिट बनाती है और इंडियन एयरलाइंस ₹50 करोड़ की प्रॉफिट बनाती है उन कंपनियों के लिए तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा 55000 करोड़ रुपए का कर्ज का बोझ लेने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने सदन को बताया कि इसमें चौंकाने वाली बात यह है की जो 111 एयरक्राफ्ट की खरीद हुई उनमें से 15b ट्777 ई आर जरूरत से ज्यादा खरीदी गई इसके अलावा 5 एयरक्राफ्ट वी 300 2 ई के वर्ष 13- 14 में बेच दी गई।
उन्होंने कहा कि किसी भी कंपनी के लिए कर्ज लेने के समय उसकी कुल आर्थिक क्षमता टर्नओवर को ध्यान में रखा जाता है. अन्यथा क्षमता से अधिक कर्ज लेने वाली कंपनी डूब जाती है. लेकिन एयर इंडिया के मामले में इन सारी बातों को दरकिनार करते हुए यह निर्णय लिया गया.
उन्होंने कहा कि एयर इंडिया के मामले में 55 हजार करोड़ का कर्ज लिया गया और एयर इंडिया इंडियन एयरलाइंस को मर्ज कर दिया गया. उन्होंने कहा जब दोनों कंपनियों के काम के तौर तरीके और उसकी सीमा अलग अलग थी उनके कर्मचारियों के लिए नियम कानून अलग-अलग थे लेकिन उन्हें मर्ज किया गया।





