Friday, August 21, 2026
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बंटवारा हुई सुपर फ्लॉप पिक्चर,पाकिस्तान प्रेमी बालीवुड ने पेशाब कर दिया बाक्स आफिस पर,…न सनी न अक्षय,रो रहा राजकुमार संतोषी

बॉलीवुड के भांड P@kistan से अपना प्यार कभी नहीं छोड़ेंगे –
भले ही इनकी ऑडियंस अब समझदार हो गई हो।

राजकुमार संतोषी रो रहे हैं कि “बंटवारा 1947” भारत में बुरी तरह फ्लॉप हो गई, क्योंकि आज की ऑडियंस उन फिल्मों को पसंद नहीं करती जो P@kistan को अच्छा दिखाती हैं।

उनके हिसाब से भारतीय ऑडियंस फिल्म समझ ही नहीं पाई।
क्योंकि इसमें सनी देओल P@kistani नहीं है –
बल्कि वो एक भारतीय मुसलमान है जिसे खुद और अपने परिवार को बचाने के लिए पलायन करना पड़ा।

श्री संतोषी,
असल में आप ही नहीं समझ पाए कि लोगों ने आपकी फिल्म क्यों ठुकरा दी…?
क्योंकि आपने इसमें अत्याचारों का व्हाइटवॉश करने की कोशिश की –
जैसा बॉलीवुड दशकों से करता आ रहा है…!

लेकिन भारतीय दर्शक अब बहुत होशियार है।
आपकी इस तुष्टिकरण वाली कहानी को वो एक मील दूर से ही सूंघ लेता है।

फिल्म में आपने दिखाया कि बंटवारे के दौरान हिंदुओं ने पहले कत्ले@आम शुरू किया और उनकी महिलाओं के साथ रे@प किया।
ये सरासर झूठ है!

असलियत में उल्टा हुआ था –
और इसे इतिहासकारों ने पूरी तरह दस्तावेज़ किया है।

भारतीय हिंदुओं ने तब पलटकर वार किया जब वहां से कटे-फटे हिंदुओं की लाशों से भरी ट्रेनें आने लगीं।

वहां के लोगों ने रेप के बाद हिंदू महिलाओं के स्त@न काट दिए और फिर उनका कत्ल कर दिया।

आपने झूठे इतिहास पर फिल्म बना दी।

▪︎ बंटवारे के बाद कोई भी भारतीय मुसलमान P@kistan जाने के लिए मजबूर नहीं किया गया,
सिवाय पंजाब के।
▪︎ बंटवारे के दौरान और बाद में 14% से भी कम भारतीय मुसलमान गए। 86% बहुसंख्यक भारत में ही रह गए।
▪︎ बंटवारे के बाद कोई भी हिंदू महिला अकेले लाहौर में जिंदा नहीं बच सकती थी।
▪︎ बंटवारे से पहले भी उन लोगों ने हिंदुओं का नरसंहार शुरू कर दिया था –
अगस्त 1946 में डायरेक्ट एक्शन डे, अक्टूबर 1946 में नोआखाली नरसंहार, मार्च 1947 में रावलपिंडी कत्@लेआम और भी बहुत कुछ।

श्री संतोषी, आप कह रहे हैं कि आपके पास ये घटिया स्क्रिप्ट काफी समय से थी पर कोई इसे बनाने को तैयार नहीं था,
जब तक Tingu नहीं आया।

क्या आपको लगता है उसने बिना किसी मकसद के इसे बनाया होगा….?
Tingu ने आपको इस्तेमाल किया, खासकर क्योंकि आप जैसे धर्मनिरपेक्ष हिंदू इस के लिए काम के “मूर्ख” होते हैं।

श्री संतोषी, क्या आप भारतीय दर्शकों को मूर्ख समझते हैं कि वो आज भी बॉलीवुड का पुराना प्रोपेगंडा मान लेंगे कि “शांति और सहिष्णुता” का ढोंग..!

आपने सनी देओल को ऐसी भूमिका क्यों दी जो Gadar और Border जैसी फिल्मों से बनी उसकी छवि के बिल्कुल उलट है..?

और सनी ने तो हद ही कर दी। फिल्म प्रमोट करते हुए कहा कि “भारतीय और P@kistani एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।”

सिर्फ सनी ही नहीं, उनके पिता भी वैसा ही कर रहे थे। उन्होंने कहा था “P@kistan मेरी मौसी जैसा है”। और उनके आखिरी रोल भी यही थे – टीवी सीरीज में मुगलों पर आधारित सूफी संत शेख सलीम चिश्ती और “इक्कीस” में P@kistan प्रेमी।

लोगों ने आपकी एजेंडा वाली फिल्म को पूरी तरह नकार दिया है, श्री संतोषी। अब जितना रोना है रो लीजिए।

“अमन की तमाशा”…!
अब आप देखिए घर बैठकर…

#बोलीवुड #भांड #सनातन #एजेंडा #करप्ट

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