
कालनेमियों को यही जवाब देना होगा 👍
राघौगढ़ के राजा कांग्रेस के मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री #श्रीमान_दिग्विजय_सिंह_जी आप ने चेक द्वारा हमारे आराध्य प्रभु श्रीराम जी के मंदिर में एक लाख दस हजार रुपए का चंदा दिया था,, पहले आप ने चेक माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को पहुंचाया था सो माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आपका चेक आपको वापस लोटा दिया था बाद में आप ने मंदिर में दिया था जिसकी रसीद शायद आपके पास है, आज मैंने टीवी चैनलों के माध्यम से सुना आपका बयान सुना आपके टीवी चैनलों पर कहते सुने गए मैंने श्रीराम मंदिर में चंदा दिया वह वापस लोटा दे नहीं तो कोर्ट जाऊंगा, मान्यवर कोर्ट जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी मैं श्रीराम जी का छोटा सा भक्त रामसिंह मकवाना गांव बेगन्दा तेहसील देपालपुर जिला इन्दौर म.प्र मोबाइल नं 9754578031 आपकी चंदे की राशि 110000 एक लाख दस हजार में लोटा रहा हूं कभी भी मेरे से चेक ले जा सकते हों ,
इन्दौर आवो तो मेरे मोबाइल नं 9754578031 पर फोन लगाकर चेक ले लेना या आपका पता भेज दिजिए मैं वहां पहुंचा दूंगा।।
किसी ओर की भी इच्छा हो लेने की तो रसीद ले आ जावे और रकम ले जावे
पूर्व में …
राम मंदिर के लिए 1.11 लाख दिए थे, वापस चाहता हूं’, दिग्विजय ने फिर बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन, कहा-कोर्ट जाएंगे
Digvijaya Singh: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर से ऐसा बयान दे दिया है, जिससे राजनीतिक हल्कों में सियासत गरमा गई है. उन्होंने राम मंदिर के लिए दिया हुआ अपना चंदा वापस मांगा है और इसके लिए कोर्ट तक जाने की बात कही है. इसके अलावा उन्होंने उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने की बात भी कही है.

दिग्विजय सिंह ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए चंदा मांगा गया. तब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक लाख रुपए दान में दिए थे. मैंने एक लाख 11 हजार रुपए का चंदा दिया. मुझे लगा कि इनसे ज्यादा देना चाहिए. नरेंद्र मोदी जी को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि वे यह पक्का करें कि दान की रकम ट्रस्ट में जमा हो जाए. हमने खुद इसे जमा किया और रसीद भी ली. हमने भगवान राम में आस्था और एक भव्य मंदिर की इच्छा के कारण दान दिया था.
दिग्विजय सिंह ने कहा कि चंपत राय को ट्रस्ट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. उन्होंने ₹10,000–₹15,000 की मासिक सैलरी पर कर्मचारी रखे. फिर भी रोजाना इकट्ठा होने वाले दान का 10% से 20% हिस्सा अक्सर कैश की गड्डियों के रूप में गायब हो जाता था. इसमें बैंक अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल थे. यह हमारी आस्था पर बहुत बड़ा आघात है.






