CM योगी ने 1 दिन में ही ₹19877 करोड़ का निवेश जुटाया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दिनों सिंगापुर में हैं। सिर्फ दो-तीन दिन की आधिकारिक यात्रा, लेकिन पहले दिन ही राज्य को 19,877 करोड़ रुपए के बड़े-बड़े निवेश के MoU मिल गए। ये कोई कागजी वादा नहीं, बल्कि ठोस समझौते हैं, जिसमें टाउनशिप, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क, ग्रीन एनर्जी पर निवेश शामिल है।
इसमें जेवर एयरपोर्ट के पास इंटरनेशनल टाउनशिप, नोएडा में 100 मेगावाट का डेटा सेंटर, कानपुर-लखनऊ हाईवे पर लॉजिस्टिक्स पार्क… सब कुछ ग्राउंड पर उतरने वाला है। पहले दिन के इन समझौतों से ही करीब 20 हजार युवाओं को नौकरियाँ मिलने का अनुमान है।
ये दौरा सिर्फ फोटो खिंचवाने या घूमने का नहीं है। मुख्यमंत्री योगी ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग, विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन, DBS ग्रुप, GIC, टेमासेक जैसे बड़े निवेशकों से सीधे बात की। कौशल विकास पर भी ITEES के साथ MoU साइन किया। मतलब निवेश तो आ रहा है, साथ में युवाओं को ट्रेनिंग भी मिलेगी। इसके बाद वो जापान जा रहे हैं, वहाँ भी 1-on-1 मीटिंग्स में ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन जैसे सेक्टर में बड़े समझौते होने वाले हैं।
योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर गढ़ रहे हैं, जहाँ कानून-व्यवस्था ठीक है, लैंड क्लियर है, सिंगल विंडो क्लियरेंस है और CM खुद निवेशकों को कॉल करके बुला रहे हैं।
पहले के मुख्यमंत्रियों ने भी किए विदेश दौरे, लेकिन नतीजे में मिले शून्य
अब तुलना करते हैं। पहले मुलायम सिंह यादव, फिर मायावती, फिर अखिलेश यादव… सबने विदेश गए, निवेश लाने की बात की, लेकिन जमीनी हकीकत क्या रही?
मुलायम सिंह यादव 1995 में ब्रिटेन गए थे। तब वे मुख्यमंत्री थे। निवेशकों को UP में बुलाने की कोशिश की। लेकिन उस समय UP में दंगे, अपराध, बिजली-पानी की समस्या, सड़कें खराब… विदेशी निवेशक डरते थे। दौरे के बाद कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं आया। कोई फैक्ट्री नहीं लगी। कोई MoU जमीन पर नहीं उतरा। सिर्फ घोषणा रह गई।
मायावती ने भी कोशिश की। 1997 में जापान और साउथ कोरिया गईं। फिर 2003 में पाँच देशों का लंबा दौरा किया, जिसमें इंग्लैंड, कनाडा, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, अमेरिका शामिल रहे। इन 15-16 दिन की यात्रा में वो NRIs और विदेशी कंपनियों से मिलीं। ताज एक्सप्रेसवे, NRI सिटी, मेडी सिटी, बायोटेक सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स में निवेश की बात की। वहाँ से वापस आकर दावा किया कि यूपी में निवेश के लिए ₹20,000 करोड़ के प्रस्ताव मिल गए।
लेकिन हकीकत? मीडिया रिपोर्ट्स साफ बताती हैं- रिस्पॉन्स ठंडा था। कोई ठोस निवेश नहीं आया। प्रोजेक्ट्स शुरू नहीं हुए। 2007-2012 के लंबे कार्यकाल में भी कोई बड़ा विदेशी निवेश दौरा नहीं हुआ। उनका फोकस राज्य के अंदर मूर्तियाँ बनाने पर ज्यादा रहा। विदेश दौरे सिर्फ एक-दो रहे, नतीजे शून्य।
अखिलेश यादव का समय तो और मजेदार रहा। उन्होंने साल 2012-2017 के बीच कई विदेश दौरे किए। जिसमें जुलाई 2012 का ऑस्ट्रेलिया दौरा पूरी तरह से पारिवारिक छुट्टी का था। वो अप्रैल 2013 में अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी गए, यहाँ खर्च भी ₹1.06 करोड़ का कर दिए, लेकिन आजम खान से हुई बदतमीजी (याद करें) के चलते उन्होंने प्रेजेंटेशन ही नहीं दिया।
इसके बाद वो साल 2014 में नीदरलैंड गए, निवेश की बात करे.. फिर साल 2015 में जर्मनी के बर्लिन टूरिज्म फेयर में शामिल हुए। इसके अलावा फ्रांस और ग्रीस में भी निवेशकों से मुलाकात की। हाँ, इस बीच में वो लंदन कई बार गए, कुछ दौरे पारिवारिक रहे, तो कुछ में जन्मदिन मनाने।
लेकिन निवेश? कोई बड़ा MoU नहीं आया जो जमीन पर उतरा हो। कुछ मीटिंग्स हुईं, कुछ इंटरेस्ट दिखा, लेकिन UP की छवि अराजकता वाली थी- लॉ एंड ऑर्डर खराब, घोटाले, राजनीतिक अस्थिरता। विदेशी कंपनियाँ दूर ही रहीं। अखिलेश खुद कहते थे निवेश लाएँगे, लेकिन दौरे ज्यादातर पर्सनल या फोटो-ऑप लगते थे।
योगी का पुराना बयान और नया रिकॉर्ड
सीएम योगी ने एक बार कहा था कि कुछ लोग विदेश जाते हैं ये जानने के लिए कि उनकी प्रॉपर्टी पर कब्जा तो नहीं हो गया। ये तंज पुराने नेताओं पर था। आज खुद योगी विदेश जा रहे हैं, लेकिन निवेश लाने, रोजगार देने।
सिंगापुर के बाद बाद वो जापान प्रवास के दौरान आठ प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। कुबोटा और सुजुकी के साथ ऑटोमोबाइल निवेश, टोक्यो इलेक्ट्रॉन के साथ सेमीकंडक्टर, तोशिबा के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग तथा टोयो डेंसो, जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स और नागासे एंड कंपनी के साथ ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन सहयोग प्रमुख एजेंडा रहेंगे। कनाडेविया के साथ ग्रीन हाइड्रोजन और मारुबेनी के साथ हॉस्पिटैलिटी व रियल एस्टेट निवेश पर भी चर्चा होगी।
दौरे के दौरान आयोजित जी-टू-बी और राउंड टेबल बैठकों में मुख्यमंत्री प्रदेश की औद्योगिक नीति, भूमि बैंक, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और कौशल विकास से जुड़े पहलुओं पर निवेशकों के साथ संवाद करेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इन बैठकों से निवेश प्रस्तावों को गति मिलेगी और संयुक्त परियोजनाओं का रास्ता साफ होगा। मुख्यमंत्री की यह यात्रा न केवल निवेश आकर्षित करने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक मंच पर ‘ब्रांड यूपी’ को सशक्त रूप से स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
योगी राज में कैसे आया फर्क?
क्योंकि योगी सरकार ने पहले घरेलू मोर्चा मजबूत किया। साल 2017 से कानून-व्यवस्था सुधारी, बुलडोजर चलाया, माफिया को मिट्टी में मिलाया और अब इसका असर भी दिख रहा है। आज इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में देखेंगे तो राज्य में 6 एक्सप्रेसवे हैं। नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट बने हैं। डेटा सेंटर पॉलिसी तैयार की गई है। सेमीकंडक्टर मिशन में यूपी आगे दिख रहा है। आज ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में UP टॉप-3 में आ चुका है।
सिंगापुर दौरे का पहला दिन ही देख लें, जिसमें यूनिवर्सल सक्सेस ग्रुप ने ₹6,650 करोड़ का निवेश किया। इसमें जेवर के पास टाउनशिप (3,500 करोड़), नोएडा डेटा सेंटर (2,500 करोड़), लॉजिस्टिक्स पार्क (650 करोड़ बनेगा। इसके साथ ही गोल्डन स्टेट कैपिटल ने 8,000 करोड़ के 100 MW डेटा सेंटर के लिए निवेश किया है। PIDG ने 2,500 करोड़ रुपए ग्रीन हाइड्रोजन और एग्री-पीवी में निवेश किया है, तो AVPN ने 2,727 करोड़ रिन्यूएबल एनर्जी में। कुल 19,877 करोड़ का निवेश और इससे राज्य में 19,500+ नौकरियाँ आएँगी।
CM योगी का मॉडल- चुपचाप काम को अंजाम देना
मुलायम-मायावती-अखिलेश के दौरों में निवेश प्रस्ताव तो आए, लेकिन 90% कागजों पर रह गए। 1995, 1997, 2003, 2012-17… कोई बड़ा विदेशी प्लांट UP में नहीं लगा जो उनके दौरे का नतीजा हो। जबकि योगी के समय Foxconn, Samsung, Adani, Reliance जैसी कंपनियाँ आ रही हैं। डेटा सेंटर हब बन रहा है। जेवर एयरपोर्ट विश्व स्तरीय बन चुका है और उसके आसपास विकास की रफ्तार तेज हो चुकी है।
योगी का फोकस रिजल्ट पर होता है। वो विदेश गए हैं तो पूरे डेलिगेशन, प्रेजेंटेशन, साइट विजिट, फॉलो-अप के साथ। सिंगापुर के बाद जब वो जाना जाएँगे, तो वहाँ भी Kubota, Suzuki, Tokyo Electron, Toshiba जैसी कंपनियों से 1-on-1 मीटिंग करेंगे।
सिंगापुर-जापान दौरा साबित करता है कि मुख्यमंत्री अगर संकल्पित हो, राज्य की छवि बदले, तो विदेशी निवेशक खुद आते हैं। पुराने CMs के समय में समस्या थी अंदरूनी अस्थिरता की, लेकिन योगी सरकार ने उसे दूर कर दिया। यही वजह है कि अब UP ग्लोबल इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बन रहा है।
ये दौरा सिर्फ 20 हजार करोड़ का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के नए ब्रांड का है, जहाँ निवेशक आते हैं, प्रोजेक्ट शुरू होते हैं, युवा नौकरी पाते हैं। योगी आदित्यनाथ का ये मॉडल पूरे देश के लिए उदाहरण है।






