पूरा पढ़ना तब समझ में आयेगा !
मैं एक बात बार बार सुनता हूँ कि इजराइल या रूस होना आसान नहीं है उनसे हथियार तो ले लोगे लेकिन हौसला कहाँ से लाओगे??.
बात 100 टका सही है।
हम इजराइल या रूस जैसे नहीं हैं ना ही मोदी नेतान्याहू या पुतिन जैसे हैं हो भी नहीं सकते कभी।
क्यूंकि हमारे समाज में, हमारी सोच में, हमारे आचार व्यवहार और माइण्डसेट में आधारभूत अंतर है जो कभी नहीं बदलने वाला।
इजराइल में चाहे कितना बड़ा हमला हो जाए चाहे सरकार की गलती हो सेना की या ख़ुफ़िया एजेंसी की गलती हो
लोग साथ खड़े हो जाते हैं और अंत तक खड़े रहते हैं उनके लिए युद्ध प्राईम टाईम एंटरटेन्मेंट नहीं है
उनके लिए युद्ध सरवाइवल का मुद्दा है युद्ध नहीं करेंगे तो मिट जाएंगे।
7 अक्टूबर का हमला हो या मुनिख का हमला हो जनता ने सालों साल इन्तजार किया बदला लेना का मुनिख के हमले का बदला लेने में दशकों लगे। 7 अक्टूबर का बदला तो आज तक चल रहा है अभी भी ढेरों इजराइली गाज़ा में कैद हैं और यकीन मानिये अगर इजराइल गाज़ा को बिलकुल बर्बाद भी कर देगा तो भी उसके दुश्मनों का माइण्डसेट नहीं बदलने वाला वो यहूदी कौम से नफ़रत करते रहेंगे।
इजराइल में अनिवार्य सैन्य सेवा है 2 साल की सर्विस सबको देनी है चाहें लड़का हो या लड़की। उसके बाद आपको सेवा मुक्त कर दिया जाता है ना कोई पेंशन मिलती है ना कुछ और हाँ ट्रेनिंग मिलती है सैलरी मिलती है और भविष्य में जॉब्स या काम धंधा करने के लिए सरकारी सहयोग मिलता है।
भारत में कुछ ऐसी ही योजना लाई गई थी अग्निवीर उसके प्रति लोगों की क्या सोच थी यह हमने देखा ही है।
यह माइण्डसेट आपकी कौम में सना होता है हमारे में नहीं है इसलिए हर बात पर इजराइल से तुलना करना बंद कर दीजिये।
अब आते हैं रूस पर…
रूस ने युक्रेन पर हमला किया और उसके बाद लगभग पूरी दुनिया उसके खिलाफ हो गई भारत चीन जैसे देश उसका दबा छुपा सहयोग और समर्थन करते रहे।
आपको याद होगा रातों रात रूस को इंटरनैशनल मॉनिटरी नैटवर्क से अलग कर दिया। स्विफ़्ट से हटा दिया वीजा मास्टरकार्ड और सामान्य बैंकिंग तक बंद कर दी गई लोग अपने पैसा ना निकाल सकते थे, ना कहीं भेज और मंगा सकते थे मतलब आर्थिक रूप से उन्हें पंगु बना दिया गया।
रूस में कार्यरत हजारों विदेशी कंपनियों ने रातों रात कुछ ही घंटो के नोटिस पर वहाँ काम करना बंद कर दिया।
आप जो भी काम करते हैं फोन पर या लैपटॉप पर वह सब एकदम से बंद हो गया। सारी ऐप्स बंद सब कुछ बंद।
लेकिन क्या आपने वहाँ की जनता को इस बात पर उबलते हुए देखा?
नहीं देखा
और कुछ ही समय में रूस ने टर्नराउंड कर लिया और आज वह दुनिया से अलग थलग होते हुए भी ग्रो कर गया है पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गया।
लेकिन इस मजबूती का क्रेडिट खाली पुतिन को नहीं जाता रूस की जनता को भी जाता है।
अब आते हैं भारत पर….
पहलगाम पर हमले के बाद सरकार ने कहा कि वो इसका बदला लेगी और पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों को करारा जवाब मिलेगा।
किसी भी सैन्य अभियान में सबसे जरूरी होता है ऑब्जेक्टिव
एक होता है लोंग टर्म ऑब्जेक्टिव और फिर होते हैं शॉर्ट टर्म ऑब्जेक्टिव.
लोंग टर्म ऑब्जेक्टिव हो सकता है POJK वापस लेना पाकिस्तान को ख़त्म कर देना टुकड़े कर देना।
वहीं पहलगाम के बाद हमारा ऑब्जेक्टिव था आतंकवादियों को सजा देना. लेकिन उसके बाद हर दिन हम आगे बढ़ते गए।
एयर स्ट्राइक की गई और सैंकड़ो आतंकवादी मारे गए।
IC-814 के प्लानर मारे गए संसद पर हमला करने वाले मारे गए पठानकोट हमला करने वाले मारे गए 26/11 हमले में जो इन्वॉल्व थे वो मारे गए डैनियल पर्ल के हत्यारे मारे गए और इतने सालों भारत में आतंकी हमले करवाने वाले कई आतंकी मारे गए।
हमने ना सिर्फ पहलगाम का बदला लिया बल्कि इतिहास में हुए हमलों के आरोपियों को भी मारा।
क्या हमने इजराइल की तरह रिवेंज नहीं लिया? बिलकुल लिया।
हर दिन हमने अपने ऑफेंस बढ़ाया पहले आतंकी ठिकाने उड़ाये उसके अगले दिन पाकिस्तानी सेना के ठिकाने उड़ाए शहरों में कई स्ट्रैटेजिक असेट्स उड़ाये और अंतिम दिन पाकिस्तान के 11 एअरबेस उड़ाये और अब जो ख़बर छन कर आ रही है.. उसके अनुसार तो हमने पाकिस्तानी न्युक्लियर अड्डों को भी नुकसान पहुंचाया।
POK लेना हमारा लोंग टर्म ऑब्जेक्टिव है और यह कोई 2-4 दिन की लड़ाई में नहीं आएगा इजराइल को गाज़ा को बर्बाद करते डेढ़ साल हो गया क्या वो गाज़ा की ज़मीन पूरी तरह से वापस ले पाया?? जबकि वहाँ तो दुश्मन भी बेहद कमजोर है उसका।
POK ऐसे नहीं आएगा वो पाकिस्तान के अंदरूनी बवाल से उत्पन्न परिस्थिति से ही आएगा जिस पर काम जारी रहेगा क्यूंकि TTP और BLA ने सीज़फायर नहीं किया है.
क्या भारत के नागरिक रूस की तरह संयम रख सकते हैं??
इसका उत्तर आप स्वयं दे सकते हैं🙏
आपकी नौकरी चली जाए आपका पैसे अनएक्सेसेबल हो जाए आपके मोबाईल, लैपटॉप चलना बंद हो जाएं कोई एप काम नहीं करे आपके देश से हजारों कम्पनिया रातों रात चली जाएं करोड़ों लोग बेरोजगार हो जाएं
क्या उस स्थिति में भी आप युद्ध के लिए खड़े रहेंगे.
अगर हां तो आपका सम्मान है.
अगर नहीं तो भी आपका सम्मान है क्यूंकि आप अपनी असलियत जानते हैं.
समरी इतनी ही है कि हम एक समाज के तौर पर अलग हैं हमारा राजनीतिक ताना बाना अलग है परिस्थिति अलग हैं दुश्मन अलग हैं इसलिए किसी भी स्थिति में हमारा रिस्पॉन्स अलग ही होगा
हम ना रूस हैं ना इजराइल और ना कभी बन सकते हैं वो अलग हैं हम अलग इसलिए हर बात में यह तुलना करना छोड़ दीजिए.
और जो ऑब्जेक्टिव्स पूरे हुए हैं उनसे खुश रहिये बड़ा ऑब्जेक्टिव फिर किसी और दिन लेकर रहेंगे।
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