नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के एक गांव में शव दफनाने को लेकर दो दिनों से विवाद चल रहा है। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार के महिला के शव को गांव में दफनाने नहीं दिया है। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंच कर पुलिस ग्रामीणों को समझाइश दे रही है, लेकिन फिर भी गांव वाले मानने को तैयार नहीं है। अब पीड़ित ने इसकी शिकायत कलेक्टर से की है। मामला जिले के भाटपाल गांव का है।
मृतका ने अपनाया था ईसाई धर्म
मिली जानकारी के अनुसार मृत महिला आदिवासी समाज छोड़कर ईसाई धर्म को अपना लिया था। इसके कारण गोंडवाना समाज गांव में शव दफनाने पर आपत्ति जता रहा है। शव दफनाने को लेकर दो पक्षों में पिछले करीब 52 घंटे से विवाद चल रहा है। पीड़ित परिवार ने पुलिस में इसकी सूचना दी थी, पर पुलिस के समझाइश के बाद भी ग्रामीण मानने को तैयार नहीं है। अब पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से नामजद शिकायत की है।
पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से की शिकायत
मृतका के पति संतुराम सोड़ी ने कलेक्टर से किए गए शिकायत में कहा है कि मेरी पत्नी जानकी सोड़ी पिछले डेढ़ साल से कैंसर के बीमारी से ग्रसित थी। 20 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे उसका निधन हो गया। 21 अक्टूबर की सुबह जब हम जानकी की लाश को दफनाने की तैयारी कर रहे थे तो गाँव के श्यामलाल पोटाई, सुरजू कोर्सम, अनुश यड्डे और रानु मोटाई ने गाँव के लोगों को भड़काकर हमारे खिलाफ मीटिंग रखकर मेरी पत्नी के शव को गाँव में दफनाने से मना कर दिया है। इसके बाद हमने घटना की जानकारी बेनूर थाने में दी, जिसके बाद थाना प्रभारी और कुछ शासकीय अधिकारी यहां आए हुए हैं। फिर भी गाँव के लोगों ने मेरी पत्नी के लाश को गाँव में दफनाने नहीं दे रहे हैं। इतना ही नहीं मुझ पर दबाव बना रहे हैं कि मैं अपनी पत्नी के लाश को नारायणपुर में जाकर दफन करू। अब पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है और कार्यवाही की मांग की है।
बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद
वहीं शव दफनाने के विवाद के बीच गांव में बड़ी संख्या में भीड़ इकट्ठा को गई है। कई गांव के ग्रामीण यहां पहुंच गए हैं। कहा जा रहा है कि यहां कई नेता भी पहुंचे है। गाड़ियों की भी भीड़ सी लग गई है।






