Friday, May 8, 2026
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नेहरू के पाप का अंत हो गया जम्मू कश्मीर में, अब्दुल्ला और मुफ्ती खानदान को गलत जगह लगी मिर्च,जो कानून देश भर में वही अब जम्मू कश्मीर में,नेहरू को मुंह पर मना किया था अम्बेडकर ने 370 लिखने से

 

जम्मू की उपायुक्त अवनी लवासा के एक फैसले ने जम्मू-कश्मीर की सियासत में भूचाल ला दिया है. मंगलवार को बड़ा ऐलान करते हुए उन्होंने आदेश दिया कि जम्मू में जो भी शख्स एक साल से अधिक समय से रह रहा है, उसे नए वोटर के रूप में रेजिस्टर किया जाए. उनके इस फैसले के बाद अगर कोई बाहरी व्यक्ति भी एक साल से अधिक समय तक जम्मू में रहता है तो उसे वोटिंग का अधिकार मिल जाएगा.
अब नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस फैसले का विरोध किया है. जोर देकर कहा गया है कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर की वोटर लिस्ट में 25 लाख नए वोटरों को जोड़ने की कवायद कर रही है.

जारी बयान में एनसी ने कहा है कि सरकार 25 लाख गैर स्थानीय लोगों को वोटर लिस्ट का हिस्सा बनाने वाली है. हम इस फैसले का विरोध करते हैं. बीजेपी चुनावों से डर रही है, उसे पता है कि वो बुरी तरह हारने वाली है. जनता को बीजेपी की इस साजिश को बैलेट बॉक्स के जरिए हरा देना चाहिए.
उपायुक्त के आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने लिखा कि पार्टी सरकार के इस कदम का विरोध करती है. ट्वीट में आगे कहा गया है कि बीजेपी चुनावों से डरती है और जानती है कि वह बुरी तरह हार जाएगी.

बता दें कि यह मुद्दा पहली बार अगस्त में सामने आया जब तत्कालीन मुख्य चुनाव अधिकारी हृदेश कुमार ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष संशोधन के बाद जम्मू-कश्मीर को बाहरी लोगों सहित लगभग 25 लाख अतिरिक्त मतदाता मिलने की संभावना है. बीजेपी को छोड़कर लगभग सभी राजनीतिक दलों ने इसका कड़ा विरोध किया. गैर-स्थानीय लोगों को मतदाता के रूप में शामिल करने और विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरे.
जानकारी के लिए बता दें कि जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं. हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह भी जम्मू दौरे पर आए थे, उन्होंने भी संकेत दिए थे कि घाटी में अब जल्द ही चुनाव करवाए जाएंगे.

ABDULLAH NEHRU

(अब्दुल्ला नेहरू)
जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir Politics) में विधानसभा चुनाव कब होंगे? ये सवाल इसलिए भी खड़ा हो रहा है, क्‍योंकि प्रदेश की राजनीति इस दिनों काफी गर्माई हुई है। जम्मू कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी हृदयेश कुमार ने 17 अगस्त को एलान किया था कि जम्मू कश्मीर में रहने वाला प्रत्येक नागरिक नियमों के आधार पर जम्मू कश्मीर में बतौर मतदाता अपना पंजीकरण करा कर सकता है और मतदान कर सकता है। इससे पूर्व अनुच्छेद 370 (Article 370) के रहते हुए सिर्फ जम्मू कश्मीर के स्थायी नागरिकों (स्टेट सब्जेक्ट) को विधानसभा चुनाव (Jammu Kashmir Election) में मतदान का अधिकार था।

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में प्रदेश में रह रहे अन्य राज्यों के नागरिक भी मतदान कर सकते थे। जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन के बाद यहां भी देश के अन्य राज्यों की तरह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 लागू हो गया है और इसी के तहत यहां चुनाव होंगे। इसके मुताबिक, देश का 18 वर्ष से अधिक आयु का प्रत्येक नागरिक जहां भी वह रह रहा हो, खुद को मतदाता के रूप में पंजीकृत करा सकता है और मतदान में हिस्सा ले सकता है। कश्मीर के दलों को आशंका सता रही है अन्य राज्यों के मतदाताओं के सूची में शामिल होने से उनका चुनावी गणित गड़बड़ा सकता है। इसीलिए वह इसे स्थानीय बनाम बाहरी का रंग दे रहे हैं। अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद क्या आया बदलाव?
अनुच्छेद 370 के बाद अब यहां भी अन्य राज्यों की तरह विधानसभा व लोकसभा चुनाव के लिए एक ही मतदाता सूची होगी। इससे पहले दोनों के लिए अलग-अलग मतदाता सूचियां बनती थीं।

जम्मू कश्मीर में मतदाता सूचियों की मौजूदा स्थिति है क्या
जम्मू कश्मीर में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण, समीक्षा और संशोधन की प्रक्रिया जारी है। 1 अक्टूबर 2022 तक 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाला कोई भी नागरिक बतौर मतदाता पंजीकरण करा सकता है। मसौदा मतदाता सूचियों का प्रकाशन 15 सितंबर तक होगा और मतदाता सूची को लेकर किसी भी तरह की आपत्तियां और दावों को 25 अक्टूबर तक दायर किया जा सकता है। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 25 नवंबर को होगा। कब होगा विधानसभा चुनाव
जम्मू कश्मीर में अंतिम विधानसभा चुनाव नवंबर 2014 में हुआ था। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत जम्मू कश्मीर में विधानसभा के गठन से पूर्व परिसीमन किया जाना था। परिसीमन की प्रक्रिया इस वर्ष मई में संपन्न हुई और अब मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण जारी है। विधानसभा चुनाव पर अंतिम निर्णय मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद जम्मू कश्मीर के सुरक्षा परिदृश्य के आकलन के आधार पर ही लिया जाएगा। किन-किन लोगों को माना जाएगा ‘सामान्य निवासी’
संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का पंजीकरण अधिकारी ही तय करेगा कि कौन इस क्षेत्र में ‘सामान्य निवासी’ है। वह नागरिक जो देश के किसी भी राज्य के मूल निवासी हों, लेकिन रोजगार, शिक्षा या किसी अन्य कारण से जम्मू कश्मीर में रह रहे हैं, उन्हें यहां किसी निर्वाचन क्षेत्र में बतौर मतदाता पंजीकृत किया जा सकता है। हां, यह स्पष्ट है कि कोई भी नागरिक दो निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत नहीं हो सकता।

जम्मू कश्मीर में किन्हें माना जाता है अस्थायी निवासी
अनुच्छेद 370 के चलते जम्मू कश्मीर में रह रहे अन्य राज्यों के नागरिक लोकसभा चुनाव में ही मतदान कर सकते थे। ऐसे मतदाताओं को एनपीआर (अस्थायी निवासी) कहा जाता है। गुलाम जम्मू कश्मीर के विस्थापित विधानसभा और संसदीय चुनाव में मताधिकार का प्रयोग कर सकते थे, जबकि जम्मू कश्मीर में 1947 से रह रहे पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थी सिर्फ संसदीय चुनाव में ही वोट डाल सकते थे। उन्हें एनपीआर के तौर पर खुद को पंजीकृत कराना होता था। जम्मू कश्मीर में क्यों बढ़ रहे हैं मतदाता?
जम्मू कश्मीर में अंतिम बार मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण 2019 में हुआ था। उस समय जम्मू कश्मीर में लोकसभा चुनाव में 78 लाख 44 हजार 343 मतदाता पंजीकृत हुए थे। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव के लिए 7316946 मतदाता पंजीकृत थे। वर्ष 2019 में जम्मू कश्मीर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1957 प्रभावहीन होने के बाद से मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण नहीं हुआ है। सरकारी अनुमान के मुताबिक अब तक जम्मू कश्मीर में लगभग एक करोड़ आबादी 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की हो चुकी है।

 

 

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