3 अक्टूबर को गुजरात सरकार द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने कहा था कि, ‘गुजरात में देश का 76 प्रतिशत नमक बनाया जाता है. यह कहा जा सकता है कि सभी देशवासी गुजरात का नमक खाते हैं.’
राष्ट्रपति के इस बयान पर दिखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता उदित राज ने सोशल मीडिया पर विवादास्पद बयान देकर एक विवाद को जन्म दे दिया. इस बयान को लेकर उदित राज की जमकर आलोचना हुई जिसके बाद उन्होंने अब इस मामले में सफाई दी है.
बुधवार को उदीत राज ने ट्वीट कर कहा था कि, ‘द्रौपदी मुर्मू जी जैसा राष्ट्रपति किसी देश को न मिले। चमचागिरी की भी हद्द है. कहती हैं 70% लोग गुजरात का नमक खाते हैं. खुद नमक खाकर ज़िंदगी जिएँ तो पता लगेगा.’
इस बयान के बाद उदित राज पर महिला विरोधी होने के आरोप लगे. राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, ‘देश की सर्वोच्च शक्ति और अपनी कड़ी मेहनत से इस मुकाम तक पहुंची महिला के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक बयान. डॉ उदितराज अपने अपमानजनक और अपमानजनक बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए. राष्ट्रीय महिला आयोग उन्हें नोटिस भेज रहा है.
आलोचनाओं का सामना करने के बाद उदित राज ने सफाई देते हुए कहा है कि, ‘मेरा बयान द्रोपदी मुर्मू जी के लिऐ निजी है, कांग्रेस पार्टी का नही है. मुर्मू जी को उम्मीदवार बनाया व वोट मांगा आदीवासी के नाम से. राष्ट्रपति बनने से क्या आदिवासी नही रहीं? देश की राष्ट्रपती हैं तो आदिवासी की प्रतिनिधि भी. रोना आता है जब एससी/एसटी के नाम से पद पर जाते हैं फिर चुप.’
उन्होंने आगे कहा कि, ‘द्रौपदी मुर्मू जी से कोई दुबे, तिवारी, अग्रवाल, गोयल, राजपूत मेरे जैसा सवाल करता तो पद की गरिमा गिरती. हम दलित – आदिवासी आलोचना करेगें और इनके लिए लड़ेंगे भी. हमारे प्रतिनिधि बनकर जाते हैं फिर गूंगे-बहरे बन जाते हैं. bjp ने मेरा सम्मान किया, जब एससी/एसटी की बात की तो बुरा हो गया.’
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि, ‘द्रौपदी मुर्मू जी का राष्ट्रपती के तौर पर पूरा सम्मान है. वो दलित – आदिवासी की प्रतिनिधि भी हैं और इन्हे आधिकार है अपने हिस्से का सवाल करना. इसे राष्ट्रपती पद से न जोड़ा जाए.’






