Wednesday, February 25, 2026
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16 सीट में से 7 सीट खो कर भाजपा बता रही विजय,खतरे की घंटी सुनने तैयार नहीं, बड़ी सर्जरी जरूरी

भाजपा की जीत या भाजपा की हार या खतरे की घण्टी
कमलनाथ साबित हुए पुराने चावल

नगरीय निकाय चुनाव के दोनों चरणों के नतीजे आ चुके हैं. निकाय चुनावों को 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा था. ऐसे में इस बार के नतीजे कई संकेत देते नजर आ रहे हैं. वहीं मध्य प्रदेश में कुल 16 नगर निगम हैं, जिनमें दो चरणों में चुनाव हुए थे. पिछले चुनाव में सभी 16 नगर निगमों में बीजेपी को जीत मिली थी. लेकिन इस बार परिस्थितियां बदल गई हैं. ऐसे में दोनों चरणों के बाद समझिए मध्य प्रदेश के नगर निगमों की तस्वीर

मध्य प्रदेश के 16 नगर निगमों में से 9 नगर निगमों में बीजेपी के महापौर प्रत्याशी को जीत मिली है, जबकि पांच नगर निगमों में कांग्रेस के महापौर जीते हैं. तीसरे दल के रूप में पहली बार में ही आम आदमी पार्टी को 1 नगर निगम में जीत मिली है, 1 निर्दलीय प्रत्याशी जीता है.

भोपाल-बीजेपी
भोपाल नगर निगम में पहले चरण में चुनाव हुआ था, भोपाल में बीजेपी की मालती राय और कांग्रेस के विभा पटेल के बीच मुकाबला था, जहां चुनाव में बीजेपी की मालती राय को जीत मिली. इस तरह बीजेपी में भोपाल की महापौर सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा. भोपाल में परिषद भी बीजेपी की बनेगी.
इंदौर-बीजेपी
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के नगर निगम चुनाव पर सबकी नजर थी. यहां बीजेपी के पुष्यमित्र भार्गव का मुकाबला कांग्रेस के संजय शुक्ला से था. जहां बीजेपी प्रत्याशी भार्गव ने 1 लाख 20 हजार से भी ज्यादा मतों से चुनाव जीता. यह प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों सबसे बड़ी जीत है. ऐसे में भार्गव ने अपनी जीत से इंदौर में बीजेपी के महापौर पद पर कब्जा बरकारर रखा.

ग्वालियर-कांग्रेस
ग्वालियर नगर निगम में इस बार उलटफेर हुआ. यहां बीजेपी की सुमन शर्मा का मुकाबला कांग्रेस की शोभा सिकरवार से था, जहां कांग्रेस की शोभा सिकरवार ने बीजेपी प्रत्याशी को हराकर ग्वालियर महापौर की सीट बीजेपी से छीनकर कांग्रेस की छोली में डाल दी.
जबलपुर-कांग्रेस
प्रदेश के चौथे बड़े शहर जबलपुर के नतीजे भी इस बार कांग्रेस के पक्ष में गए. जबलपुर में बीजेपी के डॉ. जितेंद्र जामदार का मुकाबला कांग्रेस के जगत बहादुर अन्नू से था. जहां कांग्रेस के जगत बहादुर अन्नू ने जीत दर्ज कर बीजेपी से महापौर का पद छीन लिया.

उज्जैन-बीजेपी
उज्जैन नगर निगम महापौर पद पर बीजेपी ने अपना कब्जा बरकरार रखा, यहां बीजेपी के मुकेश टटवाल और कांग्रेस विधायक महेश परमार के बीच मुकाबला था. जहां मुकेश टटवाल ने  महेश परमार को चुनाव हराकर महापौर का चुनाव जीता. पिछले चुनाव में भी यहां बीजेपी की जीत मिली थी.
सागर-बीजेपी
बुंदलेखंड अंचल के सागर नगर निगम में भी बीजेपी की जीत मिली. यहां बीजेपी की संगीता तिवारी का मुकाबला कांग्रेस की निधि जैन से था. जहां संगीता तिवारी ने 12 हजार वोटों से चुनाव जीतकर सागर नगर निगम में महापौर पद पर बीजेपी का कब्जा बरकरार रखा.

सतना-बीजेपी
सतना नगर निगम में बीजेपी के योगेश ताम्रकार और सतना से कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा के बीच था. जहां चुनाव में बीजेपी के योगेश ताम्रकार ने जीत दर्ज कर सतना में भी महापौर का पद बीजेपी के पक्ष में रखा. पिछले चुनाव में भी बीजेपी को सतना में जीत मिली थी.
खंडवा-बीजेपी
खंडवा नगर निगम चुनाव में बीजेपी की महापौर प्रत्याशी अमृता यादव और कांग्रेस की आशा मिश्रा के बीच मुकाबला था. जहां बीजेपी प्रत्याशी ने कांग्रेस की आशा मिश्रा को हराकर यहां भी बीजेपी का कब्जा बनाए रखा. पिछले चुनाव में भी बीजेपी को यहां जीत मिली थी.

बुरहानपुर-बीजेपी
बुरहानपुर नगर निगम में महापौर के चुनाव में बीजेपी की माधुरी पटेल और कांग्रेस की शहनाज ईस्‍माइल आलम के बीच मुकाबला था. जहां कड़े मुकाबले में बीजेपी की माधुरी पटेल ने चुनाव जीतकर महापौर का पद बीजेपी के पास बरकरार रखा.

छिंदवाड़ा-कांग्रेस
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में कांग्रेस ने इस बार उलटफेर कर दिया. यहां कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी विक्रम अहाके ने बीजेपी के अनंत धुर्वे को हराकर महापौर का पद बीजेपी से छीनकर कांग्रेस की छोली में डाल दिया.
सिंगरौली-आम आदमी पार्टी
मध्य प्रदेश के नगरीय निकाय चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर सिंगरौली नगर निगम में हुआ. जहां आम आदमी पार्टी की महापौर प्रत्याशी रानी अग्रवाल ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों को हराकर एमपी में आप की एंट्री करा दी. उनके लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी प्रचार किया था.

दूसरा चरण
रतलाम-बीजेपी
दूसरे चरण में संपन्न हुए चुनाव में रतलाम नगर निगम में बीजेपी ने अपना कब्जा बरकरार रखा, यहां बीजेपी प्रहलाद पटेल ने कांग्रेस के मयंक जाट को चुनाव हराया. 8वें राउंड की काउंटिंग में भाजपा के महापौर प्रत्याशी प्रहलाद पटेल ने 8951 वोटों से जीत गए हैं.

देवास-बीजेपी
देवास में महापौर पद के लिए बीजेपी की गीता अग्रवाल और कांग्रेस की विनोदनी व्यास के बीच टक्कर थी, जहां गीता अग्रवाल ने विनोदनी व्यास को हराकर देवास नगर निगम पर भी बीजेपी का कब्जा बनाए रखा. यहां पिछले चुनाव में भी बीजेपी को जीत मिली थी.
रीवा-कांग्रेस
दूसरे चरण में रीवा में कांग्रेस ने बड़ा उलटफेर किया. रीवा में कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी अजय मिश्रा बाबा ने बीजेपी के प्रबोध व्यास को हराकर चुनाव जीत लिया. रीवा में 24 साल बाद कांग्रेस की वापसी हुई है. पिछले चुनाव में यहां बीजेपी को जीत मिली थी.

मुरैना-कांग्रेस
मुरैना नगर निगम में कांग्रेस ने पहली बार जीत दर्ज की है. मुरैना में भाजपा की महापौर प्रत्याशी मीना-मुकेश जाटव और कांग्रेस प्रत्याशी शारदा सोलंकी के बीच मुकाबला था, जहां कांग्रेस की शारदा सोलंकी ने चुनाव जीतकर मुरैना नगर निगम में महापौर का पद बीजेपी से छीन लिया.
कटनी-निर्दलीय
दूसरे चरण का सबसे बड़ा उलटफेर कटनी में हुआ, यहां महापौर चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति सूरी ने जीत दर्ज की है. उन्होंने बीजेपी की ज्योति दीक्षित और कांग्रेस की श्रेहा खंडेलवाल को चुनाव हराया. प्रीति सूरी बीजेपी की तरफ से टिकट न मिलने की वजह से निर्दलीय चुनाव लड़ी थी.

कमलनाथ भी अपने गढ़ में हारे

कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा जिले के चौरई नगर पालिका में भाजपा की जीत हुई है। यहां 15 सीटों में से 9 पर भाजपा के पार्षदों ने जीत हासिल की है। जबकि कांग्रेस को सिर्फ 6 सीटें ही नसीब हुई हैं। हालांकि नगर निगम यानि कि महापौर पद पर कांग्रेस प्रत्याशी की ही जीत हुई है। आपको बता दें कि छिंदवाड़ा कमलनाथ का विधानसभा और उनके बेटे नकुल नाथ का लोकसभा संसदीय क्षेत्र है। इसलिए यहां पर सभी की निगाह थी। माना जा रहा था कि यहां पर पार्षद के लिए भी भाजपा पूरी तरह से साफ हो जाएगी, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज का यहां पर जादू चला और पार्टी 9 पार्षदीय सीट जीत गई।

जीत पर मुख्यमंत्री ने दी बधाई
छिंदवाड़ा में जीत पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर जनता का आभार जताया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्वीट में लिखा कि छिंदवाड़ा जिले की चौरई नगर पालिका में भाजपा के प्रत्याशियों को आशीर्वाद देकर आप सभी नागरिकों ने विश्वास जताया है। आप सभी का आभार और पार्टी के देवतुल्य कार्यकर्ताओं को धन्यवाद। विजयी प्रत्याशियों को मेरी शुभकामनाएं।
वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिला सीहोर की इछावर एवं जावर नगर परिषद में भाजपा प्रत्याशियों को आशीर्वाद देकर विजयी बनाने हेतु सभी नागरिकों का आभार जताया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि हर्ष की बात है की शाहगंज ने समरस नगर परिषद बनने का गौरव प्राप्त किया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने रीवा सहित अन्य जिलों में भाजपा प्रत्याशियों की जीत पर बधाई दी।

सात साल बाद हुए चुनाव को देखा जाए तो मध्यप्रदेश के कुल 16 नगर निगमों में से सत्तारूढ़ भाजपा केवल 9 नगर निगमों में जीत हासिल कर पाई वहीं पांच नगर निगम कांग्रेस के खाते में गए है। इसके साथ सिंगरौली नगर निगम पर आम आदमी पार्टी ने अपना कब्जा जमा लिया जबकि कटनी नगर निगम पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की है।
2023 विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता के सेमीफाइनल के तौर पर देखे गए महापौर चुनाव में भाजपा को 7 सीटों पर नुकसान झेलना पड़ा। अब तक भाजपा प्रदेश की सभी 16 नगर निगमों पर काबिज थी। ऐसे में विधानसभा चुनाव से ठीक डेढ़ साल पहले हुए निकाय चुनाव में सात सीटें हारना भाजपा के लिए एक तगड़ा झटका माना जा रहा है। अगर चुनाव परिणाम को देखा जाए तो प्रदेश के तीन बड़े अंचल ग्वालियर-चंबल, विंध्य और महाकौशल में भाजपा की बड़ी हार हुई है।

1-उम्मीदवार चयन में चूकी भाजपा-निकाय चुनाव के परिणाम सत्तारूढ़ भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सात बड़े जिलों में महापौर चुनाव भाजपा के हराने का सबसे बड़ा कारण महापौर उम्मीदवारों के चयन में भाजपा की चूक होना है। कटनी में महापौर का चुनावी जीती निर्दलीय प्रत्याशी प्रीती सूरी भाजपा की कार्यकर्ता थी और चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने बगावत कर चुनाव लड़ा था। भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़ने पर पार्टी ने प्रीती सूरी को पार्टी से 6 सालों के निष्कासित भी कर दिया था। कटनी में भाजपा उम्मीदावर ज्योति दीक्षित की हार बताती है कि पार्टी ने कहीं न कहीं प्रत्याशी चयन में चूक कर दी।
इसके साथ सिंगरौली में महापौर बनी आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार रानी अग्रवाल भी भाजपा की कार्यकर्ता थी और उन्होंने चुनावी वर्ष में भाजपा का साथ छोड़कर आम आदमी पार्टी ज्वाइन की थी। वहीं महाकौशल की सबसे प्रमुख जिला जबलपुर में भाजपा की हार का बड़ा कारण पार्टी का जमीनी कार्यकर्ता की जगह डॉक्टर जितेंद्र जामदार को मैदान में उतराना रहा। जिसके चलते पार्टी का कोर कार्यकर्ता पार्टी से नाराज हो गया और भाजपा को अपने गढ़ में हार का सामना करना पड़ा। जबलुपर की तरह ग्वालियर में भी भाजपा की हार का बड़ा कारण पार्टी का उम्मीदवार चयन रहा।

2-दिग्गजों के गढ़ में हारी भाजपा-निकाय चुनाव में भाजपा की हार का अगर विश्लेषण करें तो भाजपा दिग्गजों के गढ़ में महापौर चुनाव हार गई। मुरैना केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का संसदीय क्षेत्र है और मुरैना नगर निगम चुनाव में नरेंद्र सिंह तोमर ने मुरैना में डेरा डाल दिया था लेकिन वह भाजपा को जीता नहीं पाए। वहीं ग्वालियर जिसे ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ के रूप में देखा जाता है वहां पर भी भाजपा की महापौर उम्मीदवार चुनाव हार गई।

इसके साथ कटनी जो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा के संसदीय क्षेत्र में आता है वहां भाजपा की उम्मीदवार को निर्दलीय प्रत्याशी ने हरा दिया। वहीं महाकौशल के दूसरे नगर निगम में जबलपुर में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह का संसदीय क्षेत्र होने के साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की ससुराल है लेकिन भाजपा को जबलपुर में हार का सामना करना पड़ा।

3-भितरघात और अंदरूनी खींचतान- सात महापौर चुनाव भाजपा के हारने का बड़ा कारण भितरघात और पार्टी के नेताओं के बीच मची खींचतान है। दिग्ग्गज नेताओं की आपसी खींचतान से भाजपा चुनाव में भितरघात का शिकार हो गई। चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी के कार्यकर्ता जो बरसों से टिकट की आस लगाए बैठे थे उनको टिकट ना मिलने पर वह घरों से ही बाहर नहीं निकले जिसका असर चुनाव में दिखा और भाजपा को जबलपुर और ग्वालियर जैसे अपने गढ़ में हार का सामना करना पड़ा।

4-पार्टी में पीढ़ी परिवर्तन का खामियाजा-नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा को सबसे अधिक खामियाजा पार्टी में पीढ़ी परिवर्तन के दौर से उठाना पड़ा। चुनाव के दौरान अनुभवी और पुराने कार्यकर्ता घर बैठे गए जिसके कारण पार्टी को काफी नुकसान उठाना पड़ा। भाजपा ने 35 साल से कम उम्र के युवाओं को मंडल और वॉर्डों की जिम्मेदारी सौंपी थी। युवा मंडल अध्यक्षों ने वार्ड से लेकर बूथ तक अपनी अपनी नई टीम बना ली है। जिसमें पुरानी कार्यकर्ता बाहर कर दिए गए है। ऐसे में पार्टी को वह अनुभवी कार्यकर्ता जिनको दर्जनों चुनाव लड़वाने का अनुभव था वह अपने घर बैठ गए। मोहल्ले के रहने वाले बुजुर्ग पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रचार से भी दूरी भी बना ली और और उसका खामियाजा पार्टी के उम्मीदवारों को उठाना पड़ा।

5-AAP पार्टी का विकल्प के रूप में आना- मध्यप्रदेश में निकाय चुनाव के जरिए आम आदमी पार्टी ने अपनी जोरदरा एंट्री की है। सिंगरौली में आप की रानी अग्रवाल महापौर का चुनाव जीत गई तो ग्वालियर में भाजपा प्रत्याशी सुमन शर्मा की हार का बड़ा कारण आप उम्मीदवार रूचि गुप्ता को 45 हजार से अधिक वोट हासिल करना था। सियासी विश्लेषक मानते है कि मध्यप्रदेश में आम आदमी पार्टी को मतदाता एक विकल्प के तौर पर देख रहा है। भाजपा जो करीब 16 साल से सत्ता में है और बीच में कांग्रेस के 15 महीने में कांग्रेस कार्यकाल को देखने के बाद अब लोग आम आदमी पार्टी को एक विकल्प के तौर पर दिख रही है।

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