Tuesday, May 5, 2026
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क्रिप्टोकरेंसी पर ये है सरकार का नज़रिया, सावधान रहें सतर्क रहें,कई दलाल घूम रहे बेवकूफ बनाने

बजट में क्रिप्टो के लिए टैक्स प्रस्तावों के बारे में हमने टैक्स और क्रिप्टो मार्केट के विशेषज्ञों से बात की ताकि नए कदम से जुड़ी शिकायतें समझी जा सकें

पहली फरवरी को पौने 12 बजे वजीरएक्स (WazirX) क्रिप्टो टोकन 64 रुपये 50 पैसे पर ट्रेड कर रहा था, पिछले 24 घंटों में 3 पर्सेंट इजाफे के साथ। लेकिन ज्यों ही फाइनैंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने क्रिप्टो ट्रेडिंग से होनेवाली फायदे पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव सामने रखा, वजीरएक्स क्रिप्टो एक्सचेंज की ओर से जारी टोकन उछलकर 84 रुपये 50 पैसे पर पहुंच गया। यानी 30 मिनट से भी कम समय में 30 पर्सेंट से ज्यादा उछाल।

हालांकि जब बजट में हुई घोषणा की बारीकियों को विशेषज्ञों ने खंगाला और निवेशकों को नए नियमों का असर समझ में आया तो उत्साह ठंडा पड़ गया। साफ हो गया कि नए टैक्स नियम क्रिप्टो के निवेशकों के लिए कुछ ठीक नहीं हैं। क्रिप्टो ट्रेडिंग से होने वाली इनकम पर 30 फीसदी टैक्स लगेगा। गेन और लॉस को किसी दूसरी एसेट के साथ सेट-ऑफ नहीं किया जा सकेगा और इंडेक्सेशन बेनेफिट भी नहीं मिलेगा। यही नहीं, हर लेनदेन पर एक पर्सेंट TDS भी देना होगा। पीडब्ल्यूसी इंडिया (PwC India) के पार्टनर कुलदीप कुमार का कहना है कि ‘साफ तौर पर यह बेहद एग्रेसिव टैक्स पॉलिसी है। इससे एक इनवेस्टमेंट के रूप में क्रिप्टो ट्रेडिंग को बढ़ावा नहीं मिलेगा।’
क्रिप्टो बाजार से जुड़े लोगों ने सोशल मीडिया पर टैक्स प्रस्तावों को लेकर नाराजगी जताई। एक ऑनलाइन पिटीशन भी जारी की गई, जिसमें टैक्स नियमों पर दोबारा विचार करने की मांग की गई। टैक्स विशेषज्ञों और क्रिप्टो मार्केट से जुड़े लोगों का कहना है कि 30 पर्सेंट टैक्स रेट बहुत ज्यादा है। इससे ऊंचे इनकम ब्रैकेट वालों को हो सकता है कि कोई फर्क न पड़े क्योंकि उनके लिए दूसरे मामलों में भी टैक्स रेट 30 पर्सेंट है, लेकिन नए प्रस्तावों का असर उन पर पड़ेगा, जो अब तक क्रिप्टो इनवेस्टमेंट से टैक्स फ्री रिटर्न हासिल कर रहे थे। डीफाई (Defy) के फाउंडर और सीईओ भगबान बेहरा (Bhagaban Behera) का कहना है कि ‘कम आमदनी वाले लोग और छात्र क्रिप्टो से इनकम पर जीरो या बहुत कम टैक्स चुका रहे थे। नए टैक्स का बड़ा असर इन पर पड़ेगा।’ जियॉयस क्रिप्टो एक्सचेंज (Giottus Crypto Exchange) के सीईओ विक्रम सुब्बुराज ने कहा, ‘बड़े ट्रेडर तो पहले ही 30 पर्सेंट टैक्स स्लैब में थे। लिहाजा केवल छोटे प्लेयर्स पर ऊंचे टैक्स का असर होगा।’

समस्या यह है कि क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए कम इनकम वाले युवा निवेशक काफी अहम हैं। हालांकि सुब्बुराज को भरोसा है कि यह सेगमेंट क्रिप्टो से दूरी नहीं बनाएगा। उनका कहना है, ‘क्रिप्टो से हिस्टॉरिकल रिटर्न बहुत ज्यादा है। निवेशक इसे मिस नहीं करेंगे।’
बजट पास होने पर 30 पर्सेंट टैक्स रेट पहली अप्रैल से लागू हो जाएगा। यही वजह है कि क्रिप्टो निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे मौजूदा फाइनैंशयल ईयर पूरा होने से पहले प्रॉफिट बुक कर लें। नए प्रस्तावों के अनुसार क्रिप्टो से होने वाले नुकसान को किसी दूसरी इनकम से सेट-ऑफ नहीं किया जा सकेगा। इसे आगे के वर्षों में कैरी फॉरवर्ड भी नहीं कर सकते। यानी गेन पर तो सरकार उसका 30 पर्सेंट हिस्सा ले लेगी, लेकिन नुकसान हुआ तो उसका पूरा बोझ निवेशक का। यह पहलू क्रिप्टो इनकम पर 30 पर्सेंट से कहीं ज्यादा परेशान करने वाला है। इक्विटी, प्रॉपर्टी, गोल्ड और डेट फंड से होने वाले लॉस को तो दूसरी एसेट्स से होने वाले फायदे से एडजस्ट किया जा सकता है। लॉस अगर गेन से ज्यादा हो गया तो अनएडजस्टेड लॉस को आठ वित्त वर्षों तक कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है। लेकिन क्रिप्टो के मामले में ये बेनेफिट नहीं होंगे।

कॉइन डीसीएक्स (Coin DCX) के सीईओ सुमित गुप्ता इसे संजीदा निवेशकों के लिए काफी गड़बड़ चीज मानते हैं। उनका कहना है, ‘किसी भी मार्केट की तरह क्रिप्टो में भी अप-डाउन होता है। अभी मार्केट नवंबर के मुकाबले नीचे है, लेकिन निवेशकों को दूसरे गेंस से लॉस एडजस्ट नहीं करने दिया जाएगा।’ क्लियरटैक्स के सीईओ अर्चित गुप्ता का कहना है, ‘बजट में क्रिप्टो से आमदनी को जुआ, हॉर्स रेसिंग और लॉटरी से होने वाली इनकम जैसा माना गया है। उन मामलों में भी इनकम पर 30 पर्सेंट टैक्स लगता है और खर्च पर डिडक्शन की इजाजत नहीं है। दूसरी इनकम से सेट-ऑफ करने का नियम भी नहीं है।’
इसे इस तरह समझिए कि लॉटरी में हर लॉटरी टिकट एक अलग ट्रांजैक्शन होता है। अगर आपने 100 रुपये के एक हजार टिकट खरीदे लेकिन एक लाख का इनाम उनमें से किसी एक टिकट पर ही मिला तो आप बाकी टिकटों पर खर्च हुए 99 हजार 900 रुपये को विनर टिकट की इनकम से सेट-ऑफ नहीं कर सकते। और न ही लॉटरी टिकटों पर हुआ खर्च कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है।

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