आप पार्टी ने जहां अंतिम समय तक किसी नेता को बड़ा नही बनने दिया,भाजपा और कांग्रेस में VIP नेताओं की भरमार रही।
कृषि कानूनों की वापसी के महज एक महीने के भीतर उत्तर भारत में ये पहला चुनाव है, जिसमें भाजपा को हार मिली है। भाजपा के लिए नगर निगम चुनाव की ये हार इसलिए भी काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी के कई दिग्गज नेता चुनाव हार गए हैं। हालांकि सियासी जानकार इस बात के कयास लगा रहे थे कि चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में भाजपा विरोधी वोट कांग्रेस के खाते में जा सकते हैं, लेकिन परिणाम आम आदमी पार्टी के पक्ष में गए। कांग्रेस इस चुनाव में दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सकी और उसे केवल 8 सीटें ही मिल पाईं।
भाजपा की हार के पीछे ये कारण रहे
‘द वायर’ की खबर के मुताबिक, भाजपा नेताओं के बीच गुटबाजी को पार्टी की हार के एक बड़े कारण के तौर पर देखा जा रहा है। यहां तक कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के करीबी माने जाने वाले चंडीगड़ भाजपा अध्यक्ष अरुण सूद के ऊपर भी गुटबाजी को बढ़ावा देने के आरोप लगे। इसके अलावा ‘सिटी ब्यूटीफुल’ के नाम से मशहूर चंडीगढ़ में बुनियादी सुविधाएं सुचारू रूप से लागू करने में भी भाजपा नाकाम रही। स्थानीय लोगों का मानना है कि चंडीगढ़ के लिए एक बेहतर वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम बनाने, सड़कों का काम समय से पूरा करने और बारिश के दौरान बाढ़ से निपटने के लिए एक मैनेजमेंट बनाने में भाजपा असफल साबित हुई।
स्टार प्रचारकों के मुकाबले AAP ने स्थानीय नेताओं पर किया भरोसा
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में प्रचार अभियान के लिए भाजपा ने दिग्गज नेताओं की फौज उतारी थी। इस चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार करने वाले नेताओं में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर भी शामिल थे। वहीं, भाजपा के मुकाबले में आम आदमी पार्टी ने चुनाव प्रचार की कमान स्थानीय नेताओं के हाथ में ही दी। पार्टी के मुखिया और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने वोटिंग से दो दिन पहले केवल एक रैली की और लोगों से आप आदमी पार्टी को मौका देने की अपील की। भाजपा की हार के पीछे एक बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है।
लेकिन एक मामले में भाजपा-कांग्रेस से पिछड़ी AAP
सीटों के मामले में कांग्रेस और भाजपा को मिली हार के बावजूद एक दिलचस्प फैक्ट ये भी है कि सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी का वोट शेयर इन दोनों दलों के मुकाबले कम है। चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में जहां कांग्रेस को 29.8 फीसदी और भाजपा को 29.3 फीसदी वोट शेयर मिला है, वहीं आम आदमी पार्टी के खाते में केवल 27.08 फीसदी वोट शेयर गया है। 2016 में चंडीगढ़ नगर निगम में केवल 26 सीटें थीं, जिनमें से 21 सीटों पर भाजपा और 4 सीटों पर कांग्रेस जीती थी। इस बार पंचायत के इलाके जोड़कर नगर निगम सीटों की संख्या 35 की गई थी और कांग्रेस ने 8 सीटों पर जीत हासिल की।
इस वजह से मामूली नहीं है नगर निगम के ये हार
केंद्र शासित होने की वजह से चंडीगढ़ पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन आता है और अभिनेत्री किरण खेर 2014 से लगातार इस लोकसभा सीट से भाजपा की सांसद के तौर पर चुनी जा रही हैं। इसके बावजूद ना केवल चंडीगढ़ के मौजूदा मेयर रविकांत शर्मा, बल्कि दो पूर्व मेयरों की सीट भी भाजपा इस चुनाव में हार गई है। चंडीगढ़ भाजपा अध्यक्ष अरुण सूद वार्ड 25 में रहते हैं, लेकिन वहां भी पार्टी को हार मिली है। चुनाव नतीजों के बाद अरुण सूद ने बयान दिया है कि उनकी पार्टी मेयर पद के लिए दावेदारी नहीं करेगी। ऐसे में इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि चंडीगढ़ भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन की भी मांग उठ सकती है।





