रिमोट संचालित बंदूक से इजरायल की जासूसी संस्था मोसाद ने ईरान के परमाणु वैज्ञानिक मोहसीन फखरीजादेह की हत्या की है। इस हत्या की वजह से ईरान का परमाणु कार्यक्रम काफी दिनों तक बाधित हुआ थे। वैसे अब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को व्यवस्थित कर चुका है। वैसे इस हमले के बाद अब जाकर इस रहस्य पर से पर्दा उठा है। जिसमें यह पता चला है कि जिस बंदूक से उस वैज्ञानिक की हत्या की गयी थी, उसे दूर से संचालित किया गया था। यह हत्या नवंबर 2020 में हुई थी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से युक्त एक शक्तिशाली बंदूक को खास स्थान पर रखने के बाद उसे रिमोट से संचालित किया गया था।
ईरान के मुख्य सैनिक परमाणु वैज्ञानिक फखरीजादेह सारे परमाणु अस्त्रों के कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वैसे जब उनकी हत्या हुई थी, तभी से इस हत्या पर संदेह किया जा रहा था क्योंकि तब उस बारे में हत्यारे का कोई पता नहीं चल पाया था। पहली बार अमेरिकी मीडिया में इसका खुलासा होने के बाद अब इस हमले की गुत्थियां सुलझती जा रही हैं। शनिवार को पहली बार इस अनसुलझी गुत्थी का पहली बार खुलासा हुआ है। दरअसल ईरान द्वारा परमाणु बम तैयार करने की तैयारियों की बीच ही यह घटना घटी थी।
रिमोट संचालित नजर रख रहे थे हमलावर
अब इस बात का राज खुला है कि मोसाद के लिए काम करने वाले ईरान के गुप्तचरों ने मुख्य सड़क और अबसर्द शहर को जोड़ने वाली सड़क के करीब एक नीले रंग की निसान गाड़ी खड़ी कर दी थी। जहां यह गाड़ी खड़ी की गयी थी, वह थोड़ा ऊंचा इलाका था। इस वजह से वहां से आने वाली गाड़ियों पर नजर रखना आसान था। इसी गाड़ी में तिरपाल और अन्य नकली आवरणों के नीचे एक स्नाइपर मशीनगन रखा गया था।
7.62 मिलिमीटर के इस खास निशाना साधने वाली बंदूक से ही ईरानी वैज्ञानिक की हत्या हुई थी। लेकिन वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। इस रहस्य की गुत्थी सुलझने के क्रम में यह बताया गया है कि जिनलोगों पर इस काम को अंजाम देने की जिम्मेदारी थी, उन्हें दोपहर करीब एक बजे इस बात की सूचना मिली थी कि वह वैज्ञानिक अपनी पत्नी के साथ सुरक्षा प्रहरियों के साथ आ रहा है।
उन्हें अबसर्द शहर जाना था, जो देश का अन्यतम अमीर इलाका माना जाता है। ईरान गये मोसाद के लोग सारा कुछ तैयार कर लेने के बाद स्वदेश लौट गये थे। घटनास्थल से करीब सोलह सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित नियंत्रण कक्ष से इस खास मशीन गन से जुड़े उपकरणों की मदद से इलाके पर नजर रखी जा रही थी। अब इस बात का खुलासा हो गया है कि बेल्जियम में निर्मित यह मशीन गन एक रोबोट के साथ जुड़ी हुई थी।
इसके कल पूर्जे अलग अलग लाये गये थे ईरान में
इन सारे उपकरणों को एक एक कर कई महीनों में वहां अलग अलग पहुंचाया गया था। जिन्हें बाद में ईरान में ही जोड़कर तैयार किया गया था। पूरी तरह बनकर तैयार होने के बाद इस बंदूक और उससे जुड़े रोबोट आदि का कुल वजन करीब एक टन हो गया था। वैसे अब पता चला है कि इस गाड़ी और हथियार को भी नष्ट करने के लिए विस्फोटक लगाये गये थे लेकिन वह विस्फोट किसी वजह से नहीं हो पाया।
फिर भी ईरान को बंदूक मिलने के बाद भी यह बात समझ में नहीं आयी थी कि आखिर इसका इस्तेमाल कैसे किया गया था। ईरान के जासूसी को इस तकनीक से अनजान रखने के लिए इस बात का भी प्रचार किया गया कि किसी हमलावर दल ने इस घटना को अंजाम दिया है। ईरान की पुलिस और अन्य एजेंसियां उसी हमलावर टीम को तलाशने में व्यस्त हो गयी थी।
अब इस रहस्य पर से पर्दा उठने के साथ साथ यह भी साफ हो गया है कि जिस मकसद से यह हत्या की गयी थी। इसमें आंशिक सफलता ही मिली है। कुछ महीनों तक ईरान का परमाणु कार्यक्रम डांवाडोल रहने के बाद किसी नये व्यक्ति को इसकी जिम्मेदारी दी गयी है। इस व्यक्ति के बारे में सिर्फ यह कहा गया है कि वह फरही नाम से जाना जाता है। इसके बारे में ईरान भी गोपनीयता बरत रहा है। ईरान परिष्कृत यूरेनियम का भंडार खड़ा कर परमाणु बम बनाने की योग्यता हासिल कर चुका है।





