Saturday, February 24, 2024
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सऊदी अरब के मुस्लिमों ने खरा जवाब दिया,तुम्हारे बाप दादा कन्वर्ट हो गए,तुम हमारे बराबर नही हो गए

सऊदी अरब के मुस्लिम समाज का खरा जवाब

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इस हफ्ते इस्लाम के पवित्र तीर्थ मदीना का दौरा किया था। सऊदी अरब के मदीना का दौरा करने वाले गैर-मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल में कश्मीरी हिंदू IRS अधिकारी निरुपमा कोटरू भी शामिल थीं। केंद्रीय मंत्री ईरानी को साड़ी पहने और बिना हिजाब पहने पवित्र शहर का दौरा करते देखा गया था, जो सऊदी अरब और हिंदुस्तान के बीच घनिष्ठ सांस्कृतिक संबंधों और आपसी सांस्कृतिक समझ को दर्शाता है।

इस यात्रा के दौरान स्मृति ईरानी ने हज की तैयारियों की समीक्षा की, सऊदी अरब के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और जेद्दा में उमरा सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने पैगंबर की मस्जिद, अल मस्जिद अल नबवी, उहुद के पहाड़ और क़ुबा मस्जिद – इस्लाम की पहली मस्जिद की परिधि का दौरा भी किया। लेकिन, उनकी इस यात्रा ने भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों और पाकिस्तानियों को और अधिक परेशान कर दिया है। पाकिस्तानी समाचार पोर्टल ‘द न्यूज’ ने स्मृति ईरानी के पहनावे पर प्रश्न उठाए और प्रतिनिधिमंडल को भारतीय प्रतिनिधिमंडल नहीं बल्कि हिंदू प्रतिनिधिमंडल कहकर संबोधित किया।

पाकिस्तानी मीडिया इस बात से भी गुस्सा था कि मंत्री वी मुरलीधरन ने यात्रा के दौरान धोती और भगवा कुर्ता पहना था, जबकि ईरानी ने अपने माथे पर एक हिंदू प्रतीक बिंदी लगा रखी थी और वे बिना हिजाब के थीं। कई मुसलमान सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी स्मृति ईरानी के मदीना दौरे पर गुस्सा जताया था और सऊदी अरब को भला बुरा बोला था। उनका बोलना था कि, किसी भी गैर मुसलमान (काफिर) को मदीना में जाने कि इजाजत नहीं है और सऊदी ने ऐसा करके पैगम्बर मोहम्मद के वचनों का उल्लंघन किया है। इसके अतिरिक्त भी कई बातें कहीं गईं थी, जिसमे सऊदी के शासकों को शैतान के अनुयायी बोलना भी शामिल था।

भारत और पाक के मुस्लिमों द्वारा इस तरह के ट्वीट बड़ी मात्रा में किए गए, लेकिन अब सऊदी के मुस्लिमों ने स्वयं इसका उत्तर देना प्रारम्भ कर दिया है। सऊदी अरब के एक मुसलमान सोशल मीडिया यूजर ने इन टिप्पणियों का उत्तर देते हुए बोला है कि ”उनकी (टिपण्णी करने वालों की) राय कोई अर्थ नहीं रखती, क्योंकि वे सऊदी नहीं हैं।” एक अन्य यूज़र ने लिखा कि, ”हमारी ज़मीन, हमारा देश, हमारे नियम। केवल इसलिए कि आपके पूर्वजों ने इस्लाम अपना लिया और आपको अरबी नाम दिया, इसका मतलब यह नहीं है कि आपकी इसमें कोई राय है। आप अप्रासंगिक हैं और हम एक जैसे नहीं हैं।” यानी सऊदी वालों का साफ बोलना था कि, वे कन्वर्ट हुए मुस्लिम्स को अपने जैसा नहीं मानते और उनकी राय कोई अर्थ नहीं रखती।

जब एक यूज़र ने लिखा कि, ‘तुम सऊदी अरब में पैदा हुए हो, इसका मतलब ये नहीं कि वो तुम्हारी जमीन हो गई, ये सभी मुस्लिमों के लिए पवित्र भूमि है।’ इसका उत्तर देते हुए सऊदी अरब के उसी यूज़र ने लिखा कि ”नहीं यह नहीं है। आप सिर्फ़ राष्ट्र के नियमों और शर्तों का पालन करने और इसके समझौते के अधीन होने के बाद एक मुसलमान के रूप में पवित्र भूमि का दौरा कर सकते हैं।”

बता दें कि, सोशल मीडिया पर कुछ कट्टरपंथी, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को ”काफिर खातून” कहकर संबोधित कर रहे हैं जिसका अर्थ है काफिर महिला। एक अन्य यूज़र ने ‘खातून’ शब्द के इस्तेमाल पर विरोध जताई, क्योंकि यह सम्मानजनक था और इसके जगह पर ‘काफिर औरत’ शब्द का इस्तेमाल करने को कहा। ये घृणित एकाउंट अधिकांश भारत, पाक और बांग्लादेश के यूज़र्स के पाए गए हैं।

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