#देशभक्ति_खून_में_ही_होती_है
साल था 1973..
#पाकिस्तान के पेशावर–रावलपिंडी रोड पर 22 नंबर माइलस्टोन के पास एक व्यक्ति बस से उतरा
नाम — इब्राहिम
पहनावे.. हावभाव.. भाषा..
सब कुछ बिल्कुल एक पाकिस्तानी मुसलमान जैसा
होटल में ठहरना.. पहचान-पत्र..
सब कुछ पूरी तरह ठीक
लेकिन पाकिस्तान के इंटेलिजेंस अधिकारियों की नज़र से वह बच न सका
शक के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया
पूछताछ शुरू हुई
पहले सामान्य पूछताछ
फिर शुरू हुआ अमानवीय अत्याचार
Photo curtsey – Times of India/
#इब्राहिम से कहा गया
“कबूल कर..
तू भारतीय जासूस है”
लेकिन..
इब्राहिम ने मुंह नहीं खोला
यह ‘इब्राहिम’ वास्तव में भारतीय सेना का पूर्व जवान काश्मीर सिंह (Kashmir Singh) था..
जो मात्र 400 रुपए के मासिक कॉन्ट्रैक्ट पर
अपना नाम.. धर्म.. पहचान..
सब बदलकर दुश्मन देश में घुस गया था
#35_वर्षों_का_नरक
ग्रफ्तारी के बाद..
उस पर जो अत्याचार हुए
वह सुनकर रूह कांप जाती है
पहले कुछ महीनों तक थर्ड डिग्री टॉर्चर
नाखून उखाड़ना.. बिजली के झटके..
कोई तरीका नहीं छोड़ा गया
फिर भी उसके मुंह से देश के राज न निकाल सके
उसे मौत की सज़ा सुनाई गई
लेकिन उसे #फाँसी देने की बजाय
उसे जेल की अंधेरी कालकोठरी में
सड़ने के लिए छोड़ दिया गया
#अविश्वसनीय..
लगातार 17 साल उसे
एक अकेले सेल में जंजीरों से बांधकर रखा गया
हाथ–पैर.. बेड़ियों में
हिलने–डुलने तक की जगह नहीं
साढ़े तीन दशक तक उसने
न आसमान देखा. न सूरज.. न किसी इंसान का चेहरा
जेलकर्मी उसे पागल समझते थे
वह खुद भी #मानसिक संतुलन खोने लगा था
लेकिन उसका मन
इस्पात जैसा मजबूत !!
उसे पता था
एक शब्द भी बोल दिया
तो देश का नुकसान होगा..
परिवार की इज़्ज़त जाएगी..
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घर पर इंतज़ार
जब वह पकड़ा गया
उसकी पत्नी #परमजीत कौर की गोद में
तीन छोटे बच्चे थे
सबकी उम्र 10 से कम
पति लापता
सभी ने कहा..
काश्मीर सिंह मर चुका है
पर एक व्यक्ति ने यकीन नहीं खोया..
और वो थी परमजीत
उन्होंने न सफेद साड़ी पहनी..
न #चूड़ियाँ तोड़ीं..
उन्हें विश्वास था
पति जीवित है..
और एक दिन जरूर लौटेगा
1986 में पाकिस्तान ने
जब कुछ भारतीय बंदियों की सूची जारी की
तब पता चला..
काश्मीर सिंह ज़िंदा हैं
लेकिन फाँसी के कैदी के रूप में
इसके बाद भी बीत गए 22 साल
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मुक्ति और सत्य
2008
पाकिस्तान के
#मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी (Ansar Burney)
लाहौर जेल का निरीक्षण करने गए
वहाँ उन्होंने एक कमजोर.. जर्जर..
लगभग मानसिक रूप से टूट चुके..
बूढ़े व्यक्ति को देखा
पता लगाने पर मालूम हुआ
यह व्यक्ति बिना किसी न्याय प्रक्रिया के
35 वर्षों से जेल में है
मानवीय आधार पर बर्नी ने #राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से उसकी रिहाई की सिफारिश की
मुशर्रफ़ ने मंज़ूरी दे दी
4 मार्च 2008..वाघा बॉर्डर..
35 वर्षों बाद एक कांपते कदमों वाला बुजुर्ग
भारत की सीमा में प्रवेश करता है..
उसे लेने खड़ी थी
उसकी पत्नी और उसके बच्चे
सीमा पार करते ही..
काश्मीर सिंह ने वह बात कही
जिसे सुनकर सब स्तब्ध रह गए
अब तक उन्होंने
खुद को मानसिक रूप से अस्थिर
या साधारण नागरिक बताया था
लेकिन भारतीय धरती पर कदम रखते ही..
गर्व से बोले
“मैं भारतीय जासूस था
मैंने अपना #फ़र्ज़ निभाया है..
उन्होंने मुझे 35 साल कैद में रखा
लेकिन मेरे मुंह से एक शब्द भी नहीं निकलवा पाए”
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एक कीमतहीन #देशभक्ति
एक ऐसा इंसान
जिसने मात्र 400 रुपए के बदले
अपनी पूरी जवानी..
जीवन के 35 साल..
पाकिस्तान की अंधेरी कोठरी में कुर्बान कर दिए !!
17 साल जंजीरों में रहा !!
#काश्मीर सिंह साबित कर गए..
देशभक्ति की कोई कीमत नहीं होती
यह खून में होती है






