Tuesday, May 28, 2024
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मोदी ने रच दिया इतिहास,नेहरू फेल इंदिरा फेल राजीव फेल

कोई प्रधानमंत्री नही तोड़ पाया था रिकार्ड….

न गोली.. ना पत्थर.. मतदान भयंकर, कश्मीर में टूटा 35 साल का रिकॉर्ड

कश्मीर में चुनाव के ऐलान के बाद से ही चुनाव बहिष्कार और आतंकी धमकियों का दौर शुरू हो जाता था. लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में संवेदनशील इलाकों में भी आज मतदान के दौरान खूब चहलपहल रही.

कश्मीर में चुनाव के ऐलान के बाद से ही चुनाव बहिष्कार और आतंकी धमकियों का दौर शुरू हो जाता था. लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में संवेदनशील इलाकों में भी आज मतदान के दौरान खूब चहलपहल रही. चाहे पुलवामा हो या श्रीनगर का डाउनटाउन.. कश्मीर में तीन दशक बाद रिकार्ड तोड़ मतदान हुआ.

 

पिछले तीन दशकों में लगभग हर चुनाव में ग्रेनेड हमले, गोलीबारी और पत्थरबाजी का सामना करने वाले दक्षिण कश्मीर के पुलवामा के काकपोरा मतदान केंद्र पर आज वोट डालने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी हुई थीं. यह सिर्फ एक मतदान केंद्र नहीं था, बल्कि पुलवामा और शोपियां जैसे इलाके जो अलगाववादियों और आतंकियों का गढ़ रहा है.. आज चुनावी खुमारी में था. मतदान शुरू होने के बाद से ही लगभग सभी इलाकों में लंबी कतारें देखी गईं, चाहे वह आतंकी रयाज नायकू का गांव हो या बुरहान वानी का त्राल इलाका, एक संदेश साफ था कि कश्मीरी एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा करने लगे हैं. चाहे उनकी मांगें कुछ भी हों, लेकिन उनका साफ कहना है कि यह सिर्फ उनके वोट की ताकत है जो उनकी मांगों को पूरा कर सकता है.

अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पहला बड़ा चुनाव

कश्मीर घाटी में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पहला बड़ा चुनाव हो रहा है. लोगों में उत्साह साफ देखा जा सकता है. श्रीनगर से लेकर पुलवामा तक के कई लोगों से बात की, कुछ ने बताया कि वे अनुच्छेद 370 को बहाल करने के पक्ष में मतदान कर रहे हैं. कुछ ने स्टेटहुड और कुछ ने रोजगार, बिजली के ऊंचे बिल और रोजमर्रा की समस्याओं जैसे मुद्दों को अपने पसंदीदा उम्मीदवार के समर्थन में वोट देने के कारणों के रूप में उजागर किया. मुख्य आकर्षण पहली बार मतदान करने वाले मतदाता रहे, जिनकी सांख्य इस बार 2 लाख है. यह पहली बार के मतदाता लगभग हर मतदान केंद्र पर उत्साहित दिखे और उन्होंने कहा कि हमें बदलाव की जरूरत है.

टूटा 3 दशक का रिकॉर्ड

यह चुनाव तीन दशकों में पहली बार है जब कश्मीर घाटी अलगाववादियों के बहिष्कार और हिंसा से मुक्त चुनाव का अनुभव कर रही है. 2019 के चुनावों की तुलना में मतदान लगभग 3 गुना अधिक रहा. कुछ स्थानों पर दक्षिण कश्मीर में कुछ आतंकवादियों और अलगाववादियों के परिवार के सदस्यों ने भी अपना वोट डाला. कश्मीर घाटी में पिछले चुनावों की तुलना में मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. जो 37.73% से ऊपर पहुंच गया. मतदान प्रतिशत लगभग 40% को पार करने संभावना है, जो श्रीनगर संसदीय क्षेत्र के लिए पिछले तीन दशकों में ऐतिहासिक उच्च स्तर का मतदान रहा है.

2019 के चुनाव से तुलना करें तो श्रीनगर संसदीय क्षेत्र में 15 विधानसभा क्षेत्र थे. कुल 11,06,729 मतदाता के साथ 14.1% वोट पड़े थे. और मतदान प्रतिशत अगर सेगमेंट के हिसाब देखे तो चौका देने वाले हैं.
1. हज़रतबल – 9.5%
2. ज़दीबल – 8.3%
3. ईदगाह – 3.4%
4. खानियार – 9.1%
5. हब्बा कदल – 4.3%
6. अमीरा कदल – 4.9%
7. सोनवार – 12.5%
8. बटमालू – 7.9%
9. चदोरा – 9.9%
10. खानसाहिब- 24.3%
11. चरार शरीफ; 32.6%
12. गंदेरबल: 13.00%
13. कंगन: 23.5%

(इन 13 विधानसभा क्षेत्रों को नए संसदीय क्षेत्र में शामिल किया गया है.

और अब 2024 लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो.. 2024 में श्रीनगर संसदीय क्षेत्र में 18 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें 17,47,810 मतदाता हैं और मतदान प्रतिशत (अंतिम प्रतिशत आने के बाद बदलना होगा) शाम तक 36.88%  रहा.

1. सेंट्रल शाल्टेंग – 26.43 प्रतिशत
2. चडूरा – 46.60 प्रतिशत
3. चार-ए-शरीफ – 53.23 प्रतिशत
4. चन्नपोरा – 22.97 प्रतिशत
5. ईदगाह – 26.81 प्रतिशत
6. गंदेरबल – 49.48 प्रतिशत
7. हब्बा कदल – 14.05 प्रतिशत
8. हजरतबल – 26.28 प्रतिशत
9. कंगन (एसटी) – 58.80 प्रतिशत
10. खान साहिब – 48.50 प्रतिशत
11. खानयार – 23.06 प्रतिशत
12. लाल चौक – 26.01 प्रतिशत
13. पंपोर – 38.01 प्रतिशत
14. पुलवामा – 43.39 प्रतिशत
15. राजपोरा – 42.80 प्रतिशत
16. शोपियां – 45.04 प्रतिशत
17. त्राल – 40.29 प्रतिशत
18. जादीबल – 27.52 प्रतिशत

कुल मिलाकर: 36.88 प्रतिशत रहा..

 

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