बड़ी ॰॰आँखों वाली सुंदर घेंट अम्बिका सोनी को ख़ुद इंदिरा गांधी रोम से ले के आयी थी जहां वो एक हाउसवाइफ थी। अंबिका सोनी असल में ईसाई थी मतलब क्रिप्टो क्रिश्चियन
सोनी को इटली से एयरलिफ़्ट करके सीधे यूथ कांग्रेस के नेता चंद्रजीत यादव के हवाले कर दिया गया। यादव कम्युनिस्ट पार्टी से आये थे और इन्हें चमकीली आँखों वाली सोनी में बड़ा टैलेंट दिखा। हर कम्युनिस्ट नेता की पहली पहचान यही होती है जनाब।पहले इन्हें यूथ कांग्रेस की पब्लिकेशन डिवीज़न का हेड फिर सेक्रेटरी बनाया। कांग्रेस महिला मोर्चा का भी इन्होंने मोर्चा बखूबी सम्भाला।बाद में संजय की निगाह इन पर पड़ी और यूथ कांग्रेस का प्रेसिडेंट बना दिया। चौंतीस साला सोनी की फायरब्रांड नारा लगवाने की कला यूथ कांग्रेस में एक बिजली का करंट बन कर दौड़ी।
किंतु अंबिका सोनी जी का पीक टाइम आपातकाल में आया। 13 जून 1975 में जब अनेक स्टूडेंट्स इंदिरा के इस्तीफ़े की माँग पर प्रदर्शन कर रहे थे- सोनी ने बाहर आकर लड़के लड़कियों को वो रहपटे रसीद किए कि अगलें दिन अखबारो की सुर्ख़ियाँ बन गये। संजय को ऐसी कार्यशील महिलाएँ ही पसंद थी- काम जियादा और बातें कम वाली। अपनी हर स्पीच में आधे से जियादा बार संजय गांधी ज़िंदाबाद बोलने वाली सोनी ने यूथ कांग्रेस में जवानी की वो लहर पैदा की थी कि उस ज़माने के लोग यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता से थर्रा उठे थे।
कूमी कपूर ने अपनी पुस्तक में सोनी जी के अनेक कारनामों का बखान किया है जहां वो गली गली सड़क सड़क पर लड़कों को गाली देते मारती फिरती थी। कूमी के पति को भी सोनी ने अपने लपेटे में लिया और हवालात में डलवा दिया।जगदीश लूथरा नामक पत्रकार ने भी संजय और सोनी का ड्यूल इंटरव्यू ग़ज़ब का छापा था। यूथ कांग्रेस को गुंडा कांग्रेस के रूप में बदलने में सोनी जी का आक्रामक रूप बड़ा काम आया। गुआहाटी में हुए 1976 के कांग्रेस अधिवेशन में अंबिका सोनी और संजय गांधी जब तीस किलोमीटर के रास्ते पर एक साथ खुले वाहन में निकले तो अलग ही समा बंध गया। सड़क के दोनों ओर स्कूल के बच्चे गाना गाते हुए , टीचर फूल बखेरते हुए- अहा हा हा – क्या बात है ! बरुआ को हड़काने में माहिर सोनी ने यूथ कांग्रेस का वो वर्चस्व क़ायम किया था कि किसी भी यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता को हर गुनाह मुआफ़ था।
सोनी ने संजय गांधी को इतने तगड़े कॉन्फिडेंस में ले रखा था कि संजय को उनके अलावा कोई और नज़र ना आता था। हालाँकि कभी कभी रुखसाना आदि हूरें उन्हें दिखती रहती थी। जगदीश टाइलर – दूसरे कांग्रेसी नगीने ने तो सोनी पर बाक़ायदा इल्ज़ाम लगाया कि ये यूथ कांग्रेस के फण्ड में ग़बन कर रही है। हालत इतने बिगड़े कि हर कांग्रेसी सोनी से दूरी बनाने लगा। लोगों का कहना था सोनी का चार्म दोनों गांधी से अधिक होने लगा था।
सोनी जी का योगदान नसबंदी से लेके झोपड़ पट्टी जड़ से उखाड़ने से लेके प्रौढ़ शिक्षा से लेके दहेज से जुड़ी रिफार्म से लेके जातपात से जुड़े रिफॉर्म्स से लेके संजय की देखभाल तक रहा। बड़ी विडंबनापूर्ण बात है संजय की मृत्यु के बाद सोनी जी का रोल फीका सा पड़ गया था।उनके झापड़ और तमाचे कांग्रेस ने भुला दिये- उनके टैलेंट को नज़रअंदाज़ कर दिया 💯






