Tuesday, February 24, 2026
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कैप्टन अमरिंदर सिंह बने हीरो,श्री गुरु नानक देव जयंती पर,विपक्ष हुआ धाराशायी,29 नवम्बर की योजना लीक होकर हो गयी फुस्स

संसद का शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से शुरू होगा और इसके 23 दिसंबर को समाप्त होने की संभावना है। लोकसभा सचिवालय ने एक बयान में कहा, सत्रहवीं लोकसभा का सातवां सत्र सोमवार, 29 नवंबर, 2021 को शुरू होगा। सरकारी कामकाज की अत्यावश्यकताओं के अधीन, सत्र गुरुवार, 23 दिसंबर, 2021 को समाप्त होने की संभावना है।

विपक्ष को एकजुट करने में लगी।और अपना प्रभुत्व विपक्ष में साबित करने में औंधे मुंह गिर गई कांग्रेस,पूरे सत्र में नित्य नए नाटक की योजना थी।

 

कृषि कानूनों की प्रधानमंत्री मोदी द्वारा करने के बाद कैप्टन ने ट्वीट कर ट्वीट किया, “बढ़िया खबर! #गुरुनानकजयंती के पवित्र अवसर पर हर पंजाबी की मांगों को मानने और 3 काले कानूनों को निरस्त करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी जी का धन्यवाद। मुझे विश्वास है कि केंद्र सरकार किसानी के विकास के लिए मिलकर काम करती रहेगी!

 

 

इससे पहले कैप्टन ने 19 अक्टूबर को कहा था कि अगर केंद्र सरकार किसानों के हित में कृषि कानूनों को वापस लेती है तो वह पंजाब विधानसभा चुनावों में भाजपा के साथ गठबंधन पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा था, “अगर किसानों के हित में #FarmersProtest का समाधान किया जाता है तो 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ सीट व्यवस्था की आशा है। समान विचारधारा वाले दलों जैसे अलग हुए अकाली समूहों, विशेष रूप से ढींढसा और ब्रह्मपुरा गुटों के साथ गठबंधन किया जा सकता है।”

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा करने के साथ ही सियासत के नए रंग दिखने लगे हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के पूर्व नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले पर शुक्रवार (19 नवंबर) को खुशी जाहिर की और कहा कि वे भाजपा के साथ काम करने को लेकर उत्सुक हैं। इस बयान के बाद माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में पंजाब में होने के वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा और कैप्टन अमरिंदर सिंह की नवगठित पार्टी ‘पंजाब लोक कॉन्ग्रेस’ के बीच गठबंधन हो सकता है।
प्रधानमंत्री की घोषणा पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, “इससे न केवल किसानों को बड़ी राहत मिली है बल्कि पंजाब की प्रगति का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मैं किसानों के विकास के लिए बीजेपी के नेतृत्व वाले केंद्र के साथ मिलकर काम करने को लेकर उत्सुक हूँ। मैं पंजाब के लोगों से वादा करता हूँ कि तब तक चैन से नहीं बैठूँगा, जब तक कि हर एक आँख से आँसू नहीं पोंछ देता।” इस बात की जानकारी अमरिंदर सिंह के राजनीतिक सलाहकार रवीन ठुकराल ने ट्वीट कर दी।

शुक्रवार सुबह। पीएमओ से एक ट्वीट होता है- प्रधानमंत्री मोदी 9 बजे देश को संबोधित करेंगे। ट्वीट के बाद तमाम तरह की अटकलें लगनी शुरू हो जाती हैं कि इस मुद्दे पर बोल सकते हैं, उस मुद्दे पर बोल सकते हैं, फलां मुद्दे पर बोल सकते हैं, अमुक मुद्दे पर बोल सकते हैं….। लेकिन तब शायद ही किसी को अंदाजा रहा होगा कि मोदी एक बहुत ही बड़ा मास्टर स्ट्रोक खेलने जा रहे हैं जो एक ही झटके में विपक्ष को निहत्था कर देगा। साल-डेढ़ साल से सरकार को घेरने के लिए बनी और बनाई जा रहीं विपक्ष की रणनीतियों, चक्रव्यूह को तहस-नहस कर देगा। सियासत के मंझे खिलाड़ी मोदी ने देश को संबोधित करते हुए तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर ऐसा ही मास्टर स्ट्रोक खेला है।

संबोधन की शुरुआत में जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि और किसान हितों के लिए अपनी सरकार की तरफ से उठाए गए फैसलों की फेहरिस्त गिनानी शुरू की, तभी अंदाजा हो गया था कि वह ऐसा कुछ ऐलान कर सकते हैं। हुआ भी ऐसा। पीएम मोदी ने कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान भले किया लेकिन साथ ही साथ उनका पुरजोर बचाव भी किया कि ये किसानों के ही हित में थे। शायद उनकी सरकार किसानों को सही से अपनी बात समझा नहीं पाई, तपस्या में शायद कोई कमी रह गई। उन्होंने तीनों कानूनों को वापस लेने का ऐलान करते हुए प्रदर्शनकारी किसानों से आंदोलन खत्म कर घर लौटने की भी अपील की।

कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर तमाम किसान संगठन पिछले एक साल से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं। इन्हीं कानूनों को लेकर सरकार पिछले साल-डेढ़ साल से विपक्ष के निशाने पर थी। पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में आंदोलनकारी किसान संगठनों ने खुलकर बीजेपी के खिलाफ प्रचार किया। कृषि कानूनों का सबसे ज्यादा विरोध पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी में हो रहा था। किसानों में नाराजगी का आलम यह था कि कई गांवों में बीजेपी नेताओं को घुसने नहीं दिया जा रहा था। केंद्रीय मंत्रियों तक को विरोध का सामना करना पड़ रहा था। कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर कुछ अराजक तत्वों की तरफ से बीजेपी नेताओं की पिटाई की घटनाएं भी हुईं। मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक तक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे। पश्चिमी यूपी का जाट समुदाय जिसका 2014, 2017 और 2019 के चुनावों में बीजेपी की जबरदस्त कामयाबी के पीछे बड़ा हाथ था, उसमें बीजेपी के खिलाफ इस कदर नाराजगी थी कि 2022 के चुनावों में सबक सिखाने के लिए तैयार बैठा था। अब कृषि कानूनों को वापस लेने से बीजेपी डैमेज कंट्रोल में कामयाब हो सकती है।

 

 

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