Tuesday, July 16, 2024
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आईएएस अधिकारियों के भरोसे जैसे ही हुए राजनेता, सरकार डूब गई,देखिए प्रत्यक्ष उदाहरण

नेता क्या समझ नही पाते कि हारने के बाद भी आईएएस को आईएएस ही रहना है,लेकिन नेता मुख्यमंत्री या मंत्री नही रहेगा।इलीट सर्विसेस होने के कारण आम जनता से वैसे भी इनका वास्ता नही रहता

लोकसभा चुनाव में केन्द्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा झटका लगा है। क्योंकि यूपी में बीजेपी की सरकार है और उसके बावजूद बीजेपी सिर्फ 33 सीटें जीत कर, राज्य में दूसरे नंबर की पार्टी बन गयी है। जबकि राज्य में 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा गठबंधन के बावजूद पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था। हालांकि राज्य में मुद्दे कई थे, लेकिन माना जा रहा है कि राज्य की नौकरशाही के कारण भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है। खासतौर से सीएम योगी के करीबी अफसरों के कारण। जो चुनाव से पहले ये दावे कर रहे थे कि राज्य में बीजेपी 70 सीटें जीत रही हैं और इन्हीं अफसरों ने राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ को गलत तस्वीर पेश की। जिसके कारण पीएम मोदी के बाद बीजेपी में पीएम के पद के लिए सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे सीएम योगी आदित्यनाथ की केन्द्रीय राजनीति में सियासी ताकत कम हुई है। चुनाव के बाद अब वही अफसर इसके लिए अलग अलग तर्क दे रहे हैं और इसके लिए संगठन और संघ को जिम्मेदारी बता रहे हैं। साफ तौर पर कहें तो जिस प्रकार ओडिशा में पूर्व आईएएस अफसर वीके पांडियन ने नवीन पटनायक की पार्टी को राज्य में 24 साल के बाद सत्ता से बाहर करा दिया। वही स्थिति यूपी की भी है। जहां सीएम योगी के आंख और कान माने जाने वाले तेज तर्रार और आज के दौर में सबसे ताकतवर अफसर माने जाने वाले अफसर ने सीएम योगी के कद को सियासी तौर पर कम किया है।राज्य में चर्चा है कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ हमेशा साये के तौर पर रहने वाले अफसर के कारण ही यूपी में इस तरह की स्थिति हुई है। इस अफसर को राज्य का में सबसे डेसिंग और स्टाइलिश अफसर भी कहा जाता है। ब्यूरोक्रेसी में इसके कपड़े और पहनावे के लेकर चर्चा होती है। कुछ अफसर तो ये भी बताते हैं कि ये अफसर सोने के पेन को अपनी जेब में रखते हैं। कभी दिल्ली में सेंट्रल डेपुटेशन में बी ग्रेड की मिनिस्ट्री के साथ ही रक्षा जैसे मिनिस्ट्री में रहे ये अफसर आजकल सीएम योगी की आंख और कान माने जाते हैं। हालांकि राज्य में इन अफसरों की तरह कई और भी अफसर हैं। जो अपने स्टाइल के लिए जाने जाते हैं। सीएम योगी ने इस अफसर को कई अहम विभाग दिए हैं। जिसका काम राज्य सरकार के काम को जनता के सामने लाना है। यानी सरकार के कामों को मीडिया के जरिए बताना है। वहीं सीएम को भी सलाह देनी है। लेकिन इस अफसर ने ना तो सिर्फ सीएम योगी को मिसगाइड किया बल्कि राज्य में बीजेपी को बदतर स्थिति में ला दिया है।2022 में नवनीत सहगल ने लगाई थी नैया पारअगर यूपी के विधानसभा चुनाव 2022 की करें तो उस वक्त राज्य में अतिरिक्त मुख्य सचिव सूचना के पद पर नवतीत सहगल थे। उस वक्त राज्य में बीजेपी सरकार ने रिपीट किया था। हालांकि बाद में नवनीत सहगल को उस पद से हटा दिया था। हालांकि नवनीत सहगल पर भी इस तरह के आरोप लगते आए हैं कि जिस भी सरकार में वह रहते थे वह सरकार चली जाती थी। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में नवनीत सहगल के टीम मैनेजमेंट ने अच्छा काम किया और राज्य में सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बीजेपी सरकार ने रीपिट किया था।क्या सीएम योगी करेंगे बाहरराज्य में लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद अटकलें लग रही हैं कि सीएम योगी अपनी टीम को बदलेंगे। वहीं इस नकारे अफसर को भी अपनी टीम से बाहर करेंगे। क्योंकि अगले दो साल में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। अगर राज्य में यही हालात रहे तो बीजेपी की स्थिति खराब हो सकती है और सरकार भी सत्ता से बाहर हो सकती है।ओडिशा में पूर्व आईएएस अफसर वीके पांडियन ने पटनायक सरकार को किया बाहरयूपी के सीएम के करीबी अफसर की तरह ओडिशा में भी वहां की सत्ताधारी बीजेडी सरकार को एक आईएएस के कारण सत्ता से बाहर जाना पड़ा। असल में पांडियन को ओडिशा में नवीन पटनायक का आंख कान माना जाता था। वह 2000 बैच के आईएएस अफसर हैं। जिसके बाद उन्होंने आईएएस से इस्तीफा दिया था। हालांकि ओडिशा में नवीन पटनायक की सरकार जाने के बाद पांडियन ने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया है।पहले भी लगे हैं ब्यूरोक्रेट्स पर आरोपउत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत के सीएम के पद पर रहते हुए उनकी सचिव राधिका झा पर भी सियासी दखल के आरोप लगे हैं। उस वक्त बीजेपी के नेताओं ने आरोप लगाए थे कि राधिका झा सीएम रावत के सियासी मामलों में दखल देती हैं। हालांकि इससे पहले छत्तीसगढ़ में भी तत्कालीन सीएम रमन सिंह पर अपने सचिव अमन सिंह के इशारों पर काम करने के आरोप लगे थे। अमन सिंह राजस्व सेवा के अफसर थे। वहीं अगर देखें तो यूपी में भी आईएएस अफसर अनिता सिंह पर भी मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान सियासी मामलों में दखल देने के आरोप लगे थे। अनिता सिंह तो समाजवादी पार्टी के अहम बैठकों में भी मौजूद रहती थी। अनिता सिंह अखिलेश यादव सरकार में भी अहम फैसले लेती थी।

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