कांग्रेस को फिर से जिंदा करने के लिए सोनिया गांधी कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हैं। राष्ट्रपति चुनाव में उनकी ये रणनीति साफ तौर पर दिखाई दे रही है। अभी तक के हालात के मुताबिक कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारकर विपक्षी एकता को धाराशाई नहीं करना चाहती। उसे पता है कि खुद को जिंदा करने के लिए बीजेपी को कमजोर करना बेहद जरूरी है।
नेशनल हेराल्ड केस में ईडी की तलवार के बीच सोनिया गांधी ने खुद ममता बनर्जी और शरद पवार को फोन किया। कांग्रेस का कहना है कि ये समय मतभेदों से ऊपर उठकर देश को बचाने का है। वो सभी विपक्षी दलों के साथ मिलकर चलेगी।
हालांकि विपक्षी एकता की पहल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की है। उन्होंने 15 जून को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब दिल्ली में एक संयुक्त बैठक में भाग में लेने के लिए विपक्षी मुख्यमंत्रियों और नेताओं को पत्र लिखा है। उन्होंने गैर बीजेपी शासित मुख्यमंत्रियों अरविंद केजरीवाल, पिनाराई विजयन, नवीन पटनायक, के चंद्रशेखर राव, एमके स्टालिन, उद्धव ठाकरे, हेमंत सोरेन, भगवंत मान और कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी समेत 22 नेताओं को पत्र लिखा है।






