जिस माफिया अतीक अहमद को प्रयागराज और पूर्वांचल के इलाके में खौफ का दूसरा नाम कहा जाता था, आज वह खुद खौफ में जी रहा है। माफिया अतीक किसी भी सूरत में यूपी पुलिस की कस्टडी में प्रयागराज नहीं जाना चाहता। उसे डर है कि विकास दुबे की तरह कहीं उसकी भी गाड़ी नहीं पलट जाए। सुप्रीम कोर्ट में राहत के लिए पहुंचे बाहुबली पूर्व सांसद को झटका लगा है।
शीर्ष अदालत ने उसकी याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि उसकी याचिका 17 मार्च को सुनवाई के लिए लगाई जाएगी। 61 वर्षीय अतीक अहमद फिलहाल अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद है। उसे साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही यूपी सरकार ने यहां ट्रांसफर किया था।
माफिया को सता रहा जान जाने का डर
उमेश पाल हत्याकांड में यूपी पुलिस की सख्ती को देखते हुए बाहुबली एवं माफिया अतीक अहमद का पूरा परिवार खौफ में जी रहा है। पत्नी शाइस्ता परवीन और जेल में बंद भाई पूर्व विधायक अशरफ पुलिस एनकाउंटर की आशंका जताकर कोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगा चुका है। माफिया अतीक अहमद ने भी बुधवार को एक ऐसी ही याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की। याचिका में उसने दावा किया है कि उमेश पाल की हत्या में उसे आरोपी बनाया गया है, इसलिए उसकी जान को खतरा है।
अतीक ने शीर्ष अदालत से अनुरोध किया है कि वह यह निर्देश दे कि पुलिस हिरासत में या पूछताछ के दौरान उसे किसी तरह का शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचाया जाए। साथ ही उसने उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य को अहमदाबाद सेंट्रल जेल से प्रयागराज या प्रदेश के किसी अन्य हिस्से में उन्हें नहीं ले जाने का निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।
सीएम योगी के बयान का दिया हवाला
माफिया अतीक अहमद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पिछले दिनों सदन में ‘माफियाओं को पूरी तरह से मिट्टी मिला दिया जाएगा’ बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि उसे और उसके परिवार के सदस्यों को जान का वास्तिवक और प्रत्यक्ष खतरा है। उसने कहा कि इसकी पूरी संभावना है कि यूपी पुलिस उसकी ट्रांजिट रिमांड मांगेगी और फिर उसे अहमदाबाद से प्रयागराज ले जाने के लिए पुलिस रिमांड मांगेगी । उसे आशंका है कि इस ट्रांजिट अवधि के दौरान फर्जी मुठभेड़ में उसे मार दिया जाए।






