Friday, November 6, 2026
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ऐसे हुआ खतना अखिल कुमार चांडक का

ये अखिल कुमार चांडक है।
फलोदी, जोधपुर, राजस्थान के रहने वाले।
2019 में दिल्ली में इनकी मुलाक़ात असम की रहने वाली नूरशिखा बेग़म से होती है। दोनों में प्यार मोहब्बत होता है और 2020 में ये कोर्ट मैरिज कर लेते हैं।
हंसी-खुशी रहने लगते है।
फिर एक दिन बेग़म साहिबा अपने फेसबुक पेज में अपने हस्बैंड के साथ फोटो अपलोड करती है जिसमें वो सिंदूर पहने हुए रहती है।
फ़ोटो नूरशिखा के गांव वाले देख लेते है।
गाँव वाले नूरशिखा के घर वालों के गाँव में बांस करने लगते है।
कि तुम्हारी बेटी एक हिंदू से शादी करी है। ऐसा कैसे ??
नूरशिखा की अम्मी नूर ख़ातून फोन लगाती है नूरशिखा को और कहती है कि बेटी घर आ जाओ बहुत इमरजेंसी आन पड़ी है। दामाद जी को भी साथ ले के आना।
नूरशिखा और अखिल दौड़े-दौड़े गुवाहाटी पहुंचते है।
इन्हें भंगागढ़ के टीवी टावर के पास बुलाया जाता है।
जहाँ सास नूर ख़ातून दो और आदमियों के साथ इसका इंतजार कर रही होती है।
जैसे ही अखिल वहाँ पहुँचता है इसे एक द्रव्य जबरी पिलाया जाता है, जिसके बाद वह बेहोश हो जाता है।
जब होश आता है तो वह फील करता है कि उनके फार के अग्र भाग में तेज जलन हो रही है और पैंट भी खून से सना हुआ है।
समझने में जरा सा भी देर नहीं लगा कि बाबू की आगे की चमड़ी टोपाज़ ब्लेड से उधेड़ दी गई है।
होश आते ही सासू अम्मी ने कहा कि,
“बेटा! अब तो तुम्हारा कट चुका है, अफ़सोस करके कोई फ़ायदा नहीं.. चलो अब कलमा पढ़ो, नाम बदलो, गोरु माँस खाओ और हमारी बिरादरी में दाख़िल हो जाओ।”
अखिल अब अकील बनने की दहलीज़ में था…. दुनों अम्मी-बेटी और गाँव वाले रोज़-रोज़ धर-धर के ईमान के रास्ते में लाने की कोशिश करते… लेकिन अखिल ईमान ही न ला पा रहा था… बस कटी लुल्ली का दर्द और जलन लिए जी रहा था।
जलन बर्दाश्त न हुआ तो वह एक दिन डेटोल घिस के सीधा दौड़ निकला और थाने जा पहुंचा जहां इसने अपनी ‘लुल्ली-कटी’ कथा सुनाई और अपनी बेग़म और सासू अम्मी के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराई।
तो हे तमाम अखिलों! सावधान रहें! सतर्क रहें!
नमस्कार।
जोहार।मिसोजिनिस्ट गंगवा,
पेण से।

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