U.P. में दो लोगों ने जबरदस्त शिक्षा सुधार किया था।
वीर बहादुर सिंह, मुलायम सिंह यादव
एक थे कांग्रेस के मुख्यमन्त्री वीर बहादुर सिंह जिन्होंने 1986 से 1988 तक हाई स्कूल और इंटर में सपुस्तकीय परीक्षा का अभिनव प्रयोग किया था।
कांग्रेस के मुख्यमन्त्री लिखने के पीछे यह कारण है कि इस नयी पीढी को पता चले कि प्राचीन भारत के कालखंड में उत्तर प्रदेश नामक राज्य में कभी कांग्रेस का शासन भी हुआ करता था।
नहीं बताऊंगा तो लड़के यह कह कर गरियाने लगेंगे कि यू पी में कांग्रेस का मुख्यमंत्री कब हुआ था बे ?
आइए मुद्दे पर बात करें
वीर बहादुर सिंह की सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को अत्यंत सरल और सुगम बना दिया। मतलब बच्चे परीक्षा में पुस्तक लेकर जा सकते थे। उसमें से देखकर उत्तर पुस्तिका में उत्तर लिख सकते थे।
उन्हें रात- दिन पढ़ने और विषयों को मेमोराइज करने की कोई जरूरत नहीं थी। खाओ- खेलो, ह गो, मू तो और सरकार को धन्यवाद दो कि उसने तुम्हें पढ़ाई के दुष्कर कार्य से लगभग मुक्ति ही दे दिया है।
लगभग इसलिए क्योंकि भाई इतना तो फिर भी पढ़ना ही पड़ेगा कि जान सको कि प्रश्न का उत्तर किस चैप्टर में मिलेगा। यह भी मासूम किशोरों के लिए कम दुःसाध्य कार्य थोड़े था।
बाद में थू- थू हुई, कड़ी आलोचना हुई तो इस सुविधा को वापस ले लिया गया।
फिर 92 में भाजपा की जालिम सरकार आई और राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री बने।
इस निष्ठुर मंत्री ने मासूम किशोरों के साथ बड़ा गलत किया और नकल को संगेय अपराध घोषित करवा दिया। परिणाम हुआ कि जो लोग कहते थे कि नकल रोकी ही नहीं जा सकती वे लोग शर्म के मारे खुद ही गड़हा खोद कर उसमें कूद गए।
फिर हाई स्कूल और इंटर का रिजल्ट आठ से दस परसेंट ही बना। अधिकतर स्कूलों में कोई भी लड़का प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण नहीं हुआ। 45-50 परसेंट पाकर लोग स्कूल के टॉपर बन गए थे।
इससे बच्चों में उस समय जबरदस्त रोष पैदा हुआ। यह कैसी सरकार जो पढ़ने के लिए मजबूर कर रही है? यह तो अन्याय है, अत्याचार है।
फिर बाबरी डेमो लीशन हुआ….
कल्याण सिंह की सरकार बर्खास्त हुई और उत्तर प्रदेश में पुनः चुनाव और स्वर्गीय पद्मविभूषण मुलायम सिंह यादव मुख्यमन्त्री बने और उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं में स्वकेंद्रिय परीक्षा प्रणाली की महान अवधारणा को जन्म दिया।
सारे युवाओं में खुशी की लहर छा गयी….
इतने लड़के प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए कि अखबार में छपे रिजल्ट में हर रोल नम्बर के आगे बस FFFFFFF ही दिख रहा था।
उस दौर में जो लड़का दुर्भाग्य से सेकेंड डिविजन पास हुआ था उसे FFFFF वाले सारे लड़के हिकारत की नजर से देख रहे थे।
इस प्रकार बिना पढ़े ही लड़कों को सिर्फ अपने मैनेजमेंट और कमाल से FFFF डिविजन में पास कराने वाले माननीय मुलायम सिंह जी ने शिक्षा के इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया।
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