हिंदू-सिख-बौद्ध ही हो सकते हैं SC: सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, कहा- धर्म बदलते ही खत्म हो जाएगा दर्जा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (24 मार्च 2026) को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के लोग ही अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा पा सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म में बदल जाता है, तो उसका SC दर्जा खत्म हो जाएगा।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने की। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई दलित ईसाई धर्म अपना लेता है, तो वह SC/ST एक्ट के तहत केस नहीं कर सकता। यह टिप्पणी कोर्ट ने एक ईसाई पादरी चिंथाडा आनंद की अपील पर सुनवाई करते हुए की। उन्होंने साल 2025 में आए आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।
चिन्थाडा आनंद ने आरोप लगाया था कि उनके साथ अक्काला रामिरेड्डी ने जातिगत भेदभाव किया। इसके बाद उन्होंने SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज कराया और पुलिस ने उनकी शिकायत पर FIR भी दर्ज की।
इसके बाद अक्काला रामिरेड्डी ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में जाकर इस केस को रद्द करने की माँग की। उनका कहना था कि चिन्थाडा आनंद ने ईसाई धर्म अपना लिया है, इसलिए उनका SC दर्जा खत्म हो चुका है। हाई कोर्ट ने रामिरेड्डी के पक्ष में फैसला दिया।
इसके बाद पादरी चिन्थाडा आनंद सुप्रीम कोर्ट पहुँचे। मंगलवार (24 मार्च 2026) को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा, “जो व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा। किसी अन्य धर्म में परिवर्तन करने पर SC का दर्ज खत्म हो जाता है।”






