Monday, February 2, 2026
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हाई कोर्ट नहीं चलने दी,नेताओं की बोलती बंद,बड़े बड़े ज्ञान देने वाले गायब,सुप्रीम कोर्ट को अभी तक दिखा नहीं शायद

ईडी बनाम ममता : लड़ाई सिर्फ रेड की नहीं
सुनवाई टली, लेकिन दांव और बड़ा हो गया !!

#कोलकाता हाईकोर्ट में आज जो हुआ
वह सिर्फ एक कानूनी कार्यवाही नहीं
बल्कि खुलेआम संवैधानिक मर्यादा को
ललकारने जैसा तमाशा बन गया

जब कोलकाता उच्च न्यायालय में #मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी से जुड़े मामलों की सुनवाई चल रही थी
तभी ममता बनर्जी ने बड़ी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ताओं को अदालत के अंदर भेज दिया
इससे अदालत परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई

#कोर्ट में जुटी भारी भीड़ ने हाईकोर्ट की बेंच को लगभग राजनीतिक रैली के मंच में बदल दिया आखिरकार हालात इतने खराब हुए
कि जस्टिस “सुव्रा घोष” ने खुद
कोर्ट से उठकर निकल जाना बेहतर समझा
यानी लोकतंत्र के तीसरे पिलर ने
पॉलिटिकल प्रेशर के इस शोर से किनारा कर लिया !!

#जज की बार-बार की चेतावनी के बावजूद
ऐसे लोग कोर्टरूम में जमे रहे
जिनका केस से कोई लेना-देना नहीं था
जिससे कानून के मंदिर में
अनुशासन की जगह हुड़दंग हावी दिखा

जब जज ने साफ कहा
कि जो लोग मामले से जुड़े नहीं हैं
वे बाहर जाएं
तो #हंगामा ऐसा बढ़ा
कि अदालत की गरिमा ही दांव पर लगती दिखी !!
और माहौल ‘कानूनी बहस’ से ज्यादा
‘सड़किया भिड़ंत’ जैसा हो गया !!

#वकीलों और तृणमूल #कार्यकर्ताओं के शोर-शराबे के बीच जज को आखिरकार बेंच छोड़कर उठना पड़ा
जो एक तरह से
न्यायपालिका पर सीधा दबाव बनाने जैसा दिखा

नतीजा यह हुआ
कि ईडी और टीएमसी की याचिकाओं पर
आज की सुनवाई पूरी तरह ठप हो गई
और अब अगली तारीख 14 जनवरी पर टाल दी गई
यानी
#राजनीति ने कानून की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया !!

#ईडी पहले ही कोर्ट से कह चुकी है
कि ममता बनर्जी ने I-PAC रेड के दौरान
दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक सबूत ‘उठाकर ले जाने’
जैसे कदम से जांच में बाधा डाली
और अब कोर्ट में हुआ यह बवाल
उसी टकराव को हाई वोल्टेज मोड में ले गया है

#एजेंसी ने हाईकोर्ट से CBI जांच की मांग कर दी..
साफ संदेश है कि मामला सिर्फ I-PAC दफ्तर की रेड नहीं, बल्कि एक सिटिंग मुख्यमंत्री पर ‘सबूत से छेड़छाड़’ और ‘जांच में बाधा’ का रिकॉर्डेड आरोप है

दूसरी तरफ..
ममता बनर्जी और टीएमसी
इसे सीधे-सीधे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहे हैं
यह कहते हुए कि I-PAC से जुड़ा डेटा
दरअसल उनकी पार्टी की चुनावी रणनीति है
जिसे #सेंटर की एजेंसियां हथियाना चाहती हैं !!

#संवैधानिक टकराव की खुशबू एक तरफ..
केंद्रीय एजेंसी ईडी..
दूसरी तरफ राज्य की पुलिस.. बीच में हाईकोर्ट..
और केंद्र–राज्य रिश्ते की रस्साकशी !!
यह पूरा एपिसोड आने वाले वक्त में
#फेडरल स्ट्रक्चर बनाम पॉलिटिकल मसल-पावर का केस स्टडी बन सकता है

ईडी अब चीफ जस्टिस से दूसरी बेंच
और जल्द सुनवाई की मांग कर रही है

यानी #एजेंसी साफ संकेत दे रही है
कि उसे न सिर्फ रेड के दौरान..
बल्कि कोर्ट के फ्लोर पर भी..
ऑब्स्ट्रक्शन महसूस हो रहा है

इधर ममता बनर्जी सड़क पर उतर चुकी हैं
I-PAC रेड को ‘राजनीतिक साज़िश’ बता कर
मेगा प्रोटेस्ट मार्च निकाल रही हैं !!
और कह रही हैं
कि ईडी उनकी पार्टी के
#इंटरनल डेटा पर कब्जा करना चाहती है !!

अब असली सवाल ये है
ये लड़ाई #मनी लॉन्ड्रिंग की है !!
पॉलिटिकल डेटा की है !!
या फिर एक ऐसे मॉडल की..
जहाँ सत्ता यह मैसेज देना चाहती है
कि एजेंसियां भी अगर ‘हमारे खिलाफ’ जाएंगी
तो उन्हें कोर्ट तक में..
आसानी से सांस नहीं लेने दी जाएगी

#देश के मुख्य न्यायाधीश को
अविलंब स्वतः संज्ञान लेना चाहिये !!

अन्यथा देश की जनता को स्पष्ट करना चाहिये
कि भारत में कानून
क्या वाकई सबके लिए बराबर है !!
या फिर पावरफुल के लिए न्याय भी..
भीड़ और प्रेशर की शर्तों पर लिखा जाता है !!

✍️ Manoj Kumar

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